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Hathras News: जिला अस्पताल पहुंचे 2000 बीमार, 100 शरीर में पानी की कमी के शिकार
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गर्मी के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। सोमवार करीब 2000 लोग अस्पताल पहुंचे, इनमें सौ मरीज उल्टी दस्त और शरीर में पानी की कमी होने से बीमार होकर पहुंचे। लू के शिकार भी दो-तीन मरीज रोज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। बलिया और प्रदेश के अन्य जिलों में लू से हो रही मौतों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है।
सुबह होते ही गर्मी पड़ना शुरू हो जाता है। दोपहर को तेज धूप के साथ लू चलने लगती है। गर्मी और लू से लोगों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा। लोग डी हाइड्रेशन, डायरिया और हीट स्ट्रोक जैसी गर्मी जनित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हीट स्ट्रोक चिकित्सकीय आपातकालीन स्थिति है। जब लंबे समय तक अधिक तापमान में रहने या काम करने पर शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइड से अधिक हो जाता है, तो हीट स्ट्रॉक आने का खतरा रहता है। हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर अपने आप को ठंडा नहीं कर पाता है। हीट स्ट्रोक का अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा हो सकता है।
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उल्टी दस्त से परेशान हूं। उपचार के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आई हूं।
- कुसुम देवी, मरीज
बेटे के पेट में परेशानी है। उपचार के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया है।
-रहीशा बेगम, तीमारदार।
हीट स्ट्राक के लक्षण
-शरीर का तापमान 104 डिग्री से अधिक होना
-भ्रम पैदा होना, त्वचा का सूख जाना,उल्टी आना
-हृदय गति तेज होना और प्यास ज्यादा लगना
- सिर में तेज दर्द होना और बेहोश हो जाना
बचाव के उपाय--
-धूप के सीधे संपर्क में न आएं
-धूप में बेवजह घर से बाहर न निकलें
-बाहर निकलते समय छाते का प्रयोग करें
-पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें
- सिर को ढ़क कर बाहर निकलें
- संतुलित आहार लें, बासी भोजन न खाएं
- गरिष्ठ भोजन न करें, पानी अधिक पीयें
-ठंडी प्रकृति के खाद्य पदार्थेां का सेवन करें
गर्मी के मौसम में लोगों को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए। गर्मी जनित बीमरियों से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाएं पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। पर्याप्त मात्रा में बेड मोजूद हैं। यदि किसी मरीज को परेशानी है तो सरकारी अस्पताल में अपना उपचार कराएं।
-डॉ. मंजीत सिंह, सीएमओ हाथरस।
जिला अस्पताल में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। अस्पताल में पर्याप्त दवाएं मरीजों के लिए निशुल्क उपलब्ध हैं। अस्पताल में 70 बेड और चार वेंटीलेटर उपलब्ध हैं। अगर किसी मरीज में हीट स्ट्रॉक के लक्षण दिखें तो तत्काल जिला अस्पताल में अपना उपचार कराएं।
- डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस, बागला जिला अस्पताल।
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सुबह होते ही गर्मी पड़ना शुरू हो जाता है। दोपहर को तेज धूप के साथ लू चलने लगती है। गर्मी और लू से लोगों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा। लोग डी हाइड्रेशन, डायरिया और हीट स्ट्रोक जैसी गर्मी जनित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि हीट स्ट्रोक चिकित्सकीय आपातकालीन स्थिति है। जब लंबे समय तक अधिक तापमान में रहने या काम करने पर शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइड से अधिक हो जाता है, तो हीट स्ट्रॉक आने का खतरा रहता है। हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर अपने आप को ठंडा नहीं कर पाता है। हीट स्ट्रोक का अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा हो सकता है।
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उल्टी दस्त से परेशान हूं। उपचार के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी में आई हूं।
- कुसुम देवी, मरीज
बेटे के पेट में परेशानी है। उपचार के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया है।
-रहीशा बेगम, तीमारदार।
हीट स्ट्राक के लक्षण
-शरीर का तापमान 104 डिग्री से अधिक होना
-भ्रम पैदा होना, त्वचा का सूख जाना,उल्टी आना
-हृदय गति तेज होना और प्यास ज्यादा लगना
- सिर में तेज दर्द होना और बेहोश हो जाना
बचाव के उपाय
-धूप के सीधे संपर्क में न आएं
-धूप में बेवजह घर से बाहर न निकलें
-बाहर निकलते समय छाते का प्रयोग करें
-पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें
- सिर को ढ़क कर बाहर निकलें
- संतुलित आहार लें, बासी भोजन न खाएं
- गरिष्ठ भोजन न करें, पानी अधिक पीयें
-ठंडी प्रकृति के खाद्य पदार्थेां का सेवन करें
गर्मी के मौसम में लोगों को अपनी सेहत का खास ख्याल रखना चाहिए। गर्मी जनित बीमरियों से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में जरूरी दवाएं पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। पर्याप्त मात्रा में बेड मोजूद हैं। यदि किसी मरीज को परेशानी है तो सरकारी अस्पताल में अपना उपचार कराएं।
-डॉ. मंजीत सिंह, सीएमओ हाथरस।
जिला अस्पताल में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। अस्पताल में पर्याप्त दवाएं मरीजों के लिए निशुल्क उपलब्ध हैं। अस्पताल में 70 बेड और चार वेंटीलेटर उपलब्ध हैं। अगर किसी मरीज में हीट स्ट्रॉक के लक्षण दिखें तो तत्काल जिला अस्पताल में अपना उपचार कराएं।
- डॉ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस, बागला जिला अस्पताल।