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आलू के भावों में नहीं हो रहा सुधार
Updated Sun, 11 Jun 2017 11:33 PM IST
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दुकान में रखा नया आलू।
- फोटो : अमर उजाला
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ब्यूरो, अमर उजाला ब्यूरो, हाथरस।
जिले के आलू किसानों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। देश की सभी मंडियों में किसान को आलू के वाजिब भाव नहीं मिल पा रहे हैं। मौजूदा समय में भी आलू के बाजार भाव सही नहीं होने से मंडियों में ए ग्रेड के आलू के दाम 200 से 250 रुपये प्रति बोरा (50 किग्रा) के आसपास हैं, जोकि लागत मूल्य से भी बेहद कम है। मंडियों और किसानों के घरों पर डंप पड़ा आलू भी गर्मी के कारण सड़ने लगा है, जिससे किसानों की लगातार मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। कोल्ड स्टोर मालिक चाहते हुए भी इनकी मदद नहीं कर पा रहे।
गौरतलब है कि पिछले दिनों कोल्ड स्टोर मालिकों ने आलू के रेट में आ रही जबर्दस्त गिरावट और इसकी वजह से कोल्ड स्टोरों से आलू की निकासी ठप होने पर चिंता जताई थी और निर्णय लिया था कि किसान को हर दिन उन मंडियों का रेट और पता बताया जाएगा, जहां उनका आलू अच्छे दाम पर बिक सकता है। अब चूंकि बाहरी मंडियों में भी यहां के आलू की डिमांड नहीं है और वहां तक आलू को लाने-ले जाने पर ही इतना खर्चा हो जाएगा, जितना किसान को वहां आलू बेचकर मुनाफा भी नहीं मिलेगा, इसलिए कोल्ड स्टोर मालिकों का किसानों को राहत देने का यह फॉर्मूला भी फिलहाल फ्लॉप हो गया है और किसान के आलू की बेकद्री जारी है।
मौजूदा समय में किसी भी मंडी में आलू की कोई डिमांड नहीं हैं, जिससे आलू किसानों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए मजबूरी में ही औने-पौने दामों में आलू बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालात यह है कि जिन किसानों का आलू शीतगृहों में नहीं रख पाया, अब वह सड़ने लगा है। कुछ किसानों ने अपना आलू मंडियों में आढ़तियों की दुकानों पर भी पहुंचा दिया है, जिससे यह आलू हाथरस मंडी में मारामारा फिर रहा है।
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आलू खराब होने पर आलू के पूरे बोरे आढ़तियों द्वारा आवारा पशुओं के सामने फेंके जा रहे हैं, जिससे आढ़ती इस आलू को फिंकवाने के लिए अतिरिक्त मजदूरी का बोझ सहने से बच सकें। इसके साथ ही मंडी में डंप पड़े आलू की आढ़तियों द्वारा लगातार छंटाई भी कराई जा रही है, जिससे इसमें से अच्छे आलू को निकालकर खराब आलू को फेंका जा सके और अच्छे आलू को बेचकर कुछ मूल्य प्राप्त किया जा सके। मौजूदा समय में ए ग्रेड के आलू के भाव 200 से 250 रुपये बोरा (50 किग्रा) के आसपास हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दलों ने आलू किसानों की भलाई के लिए बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन मौजूदा समय में सरकार आलू किसानों के लिए कुछ कर नहीं रही है और विरोधी पार्टियां भी मौन साधे बैठी हैं।
आलू किसानों की किसी सरकार को कोई चिंता नहीं हैं। मंडियों में जो आलू के भाव हैं, उनसे किसानों को आलू का लागत मूल्य भी प्राप्त नहीं हो रहा है।
रामस्वरूप, आलू किसान जरैया
आलू किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। अगर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाए तो किसान को तबाह होने से कोई रोक नहीं पाएगा।
बलवीर सिंह, किसान नगला बिहारी
जिले के आलू किसानों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। देश की सभी मंडियों में किसान को आलू के वाजिब भाव नहीं मिल पा रहे हैं। मौजूदा समय में भी आलू के बाजार भाव सही नहीं होने से मंडियों में ए ग्रेड के आलू के दाम 200 से 250 रुपये प्रति बोरा (50 किग्रा) के आसपास हैं, जोकि लागत मूल्य से भी बेहद कम है। मंडियों और किसानों के घरों पर डंप पड़ा आलू भी गर्मी के कारण सड़ने लगा है, जिससे किसानों की लगातार मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। कोल्ड स्टोर मालिक चाहते हुए भी इनकी मदद नहीं कर पा रहे।
गौरतलब है कि पिछले दिनों कोल्ड स्टोर मालिकों ने आलू के रेट में आ रही जबर्दस्त गिरावट और इसकी वजह से कोल्ड स्टोरों से आलू की निकासी ठप होने पर चिंता जताई थी और निर्णय लिया था कि किसान को हर दिन उन मंडियों का रेट और पता बताया जाएगा, जहां उनका आलू अच्छे दाम पर बिक सकता है। अब चूंकि बाहरी मंडियों में भी यहां के आलू की डिमांड नहीं है और वहां तक आलू को लाने-ले जाने पर ही इतना खर्चा हो जाएगा, जितना किसान को वहां आलू बेचकर मुनाफा भी नहीं मिलेगा, इसलिए कोल्ड स्टोर मालिकों का किसानों को राहत देने का यह फॉर्मूला भी फिलहाल फ्लॉप हो गया है और किसान के आलू की बेकद्री जारी है।
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मौजूदा समय में किसी भी मंडी में आलू की कोई डिमांड नहीं हैं, जिससे आलू किसानों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए मजबूरी में ही औने-पौने दामों में आलू बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालात यह है कि जिन किसानों का आलू शीतगृहों में नहीं रख पाया, अब वह सड़ने लगा है। कुछ किसानों ने अपना आलू मंडियों में आढ़तियों की दुकानों पर भी पहुंचा दिया है, जिससे यह आलू हाथरस मंडी में मारामारा फिर रहा है।
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आलू खराब होने पर आलू के पूरे बोरे आढ़तियों द्वारा आवारा पशुओं के सामने फेंके जा रहे हैं, जिससे आढ़ती इस आलू को फिंकवाने के लिए अतिरिक्त मजदूरी का बोझ सहने से बच सकें। इसके साथ ही मंडी में डंप पड़े आलू की आढ़तियों द्वारा लगातार छंटाई भी कराई जा रही है, जिससे इसमें से अच्छे आलू को निकालकर खराब आलू को फेंका जा सके और अच्छे आलू को बेचकर कुछ मूल्य प्राप्त किया जा सके। मौजूदा समय में ए ग्रेड के आलू के भाव 200 से 250 रुपये बोरा (50 किग्रा) के आसपास हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दलों ने आलू किसानों की भलाई के लिए बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन मौजूदा समय में सरकार आलू किसानों के लिए कुछ कर नहीं रही है और विरोधी पार्टियां भी मौन साधे बैठी हैं।
आलू किसानों की किसी सरकार को कोई चिंता नहीं हैं। मंडियों में जो आलू के भाव हैं, उनसे किसानों को आलू का लागत मूल्य भी प्राप्त नहीं हो रहा है।
रामस्वरूप, आलू किसान जरैया
आलू किसानों की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। अगर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाए तो किसान को तबाह होने से कोई रोक नहीं पाएगा।
बलवीर सिंह, किसान नगला बिहारी