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20 सितंबर तक जिले को ओडीएफ करने में जुटे अधिकारी
Updated Fri, 07 Sep 2018 11:32 PM IST
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न्यूज डेस्क अमर उजाला हाथरस
हाथरस। जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए अब जिला प्रशासन ने शौचालय निर्माण के कार्यों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। अब जिले में केवल 3 हजार शौचालयों के निर्माण कार्य शेष रह गया है। इस निर्माण को पूरा कराने के लिए अब विभागीय अधिकारी खुद क्षेत्र में भ्रमण पर उतर आए है।
डीएम डॉ. रमा शंकर मौर्य ने बताया कि जिले को 20 सितंबर तक ओडीएफ घोषित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण की गति को तेज करने के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक करीब 1.40 लाख शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इनके फोटो अपलोड का काम अधिकारियों को लगाकर कराया जा रहा है।
जिन शौचालयों के निर्माण के बाद फोटोग्राफ नहीं खिच सके है। उन शौचालयों के फोटोग्राफ कराने के लिए अलग से टीमें बना दी गई है। यह ग्राम पंचायतों में भ्रमण कर चिह्नित शौचालयों के फोटोग्राफ करेंगी और पोर्टल पर अपलोड करेंगी। वही जिला स्तरीय अधिकारियों से निर्माण कार्य पूरे हुए शौचालयों का सत्यापन भी कराया जा रहा है, ताकि कोई भी अधूरा शौचालय न रह सके।
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हाथरस। जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए अब जिला प्रशासन ने शौचालय निर्माण के कार्यों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। अब जिले में केवल 3 हजार शौचालयों के निर्माण कार्य शेष रह गया है। इस निर्माण को पूरा कराने के लिए अब विभागीय अधिकारी खुद क्षेत्र में भ्रमण पर उतर आए है।
डीएम डॉ. रमा शंकर मौर्य ने बताया कि जिले को 20 सितंबर तक ओडीएफ घोषित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण की गति को तेज करने के लिए भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक करीब 1.40 लाख शौचालयों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इनके फोटो अपलोड का काम अधिकारियों को लगाकर कराया जा रहा है।
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जिन शौचालयों के निर्माण के बाद फोटोग्राफ नहीं खिच सके है। उन शौचालयों के फोटोग्राफ कराने के लिए अलग से टीमें बना दी गई है। यह ग्राम पंचायतों में भ्रमण कर चिह्नित शौचालयों के फोटोग्राफ करेंगी और पोर्टल पर अपलोड करेंगी। वही जिला स्तरीय अधिकारियों से निर्माण कार्य पूरे हुए शौचालयों का सत्यापन भी कराया जा रहा है, ताकि कोई भी अधूरा शौचालय न रह सके।
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