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Hardoi News: मेडिकल कॉलेज में पांच दिन बाद शुरू हुए एक्सरे, मरीजों को राहत
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फोटो-06- मेडिकल कॉलेज में फोल्डर मशीन से एक्स-रे करता कर्मचारी। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में पांच दिन पहले खराब हुई एक्सरे की पोर्टेबल मशीन बुधवार को दुरुस्त हो गई। बुधवार को यहां एक्सरे भी किए गए। मशीन दुरुस्त होने से अब मरीजों को फिलहाल भटकना नहीं पड़ेगा। प्राइवेट सेंटर में एक्सरे कराने पर होने वाला खर्च भी फिलहाल बच जाएगा।
एक्सरे विभाग में वैसे तो डिजिटल मशीन लगी हुई है लेकिन वह बीते एक साल से खराब है। मरीजों का एक्सरे पोर्टेबल मशीन से हो रहा है। पोर्टेबल मशीन 100 एमसी की क्षमता वाली मशीन है। ऐसे में मशीन से एक बार में सिर्फ 70 से 75 एक्सरे हो पाते हैं। इसके बाद मशीन को कुछ देर के लिए आराम देना पड़ता है। यही मशीन बीते शुक्रवार को खराब हो गई थी। कर्मचारी उससे कम क्षमता वाली मशीन को जोड़कर इमरजेंसी मरीजों के एक्सरे कर रहे थे लेकिन ओपीडी मरीजों को बैरंग कर दिया जाता था।
रोजाना करीब 100 मरीजों को वापस भेजा जा रहा था। मरीजों को बाहर से 500 से 800 रुपये खर्च करने पड़ रहे थे। बुधवार को पोर्टेबल मशीन सायरिक्स कंपनी के टेक्नीशियनों ने सही कर दिया और अब फिर से एक्सरे शुरू हो गए। सीएमएस डॉ. चंद्र कुमार ने बताया कि मशीन सही हो गई है और एक्सरे किए जाने लगे हैं।
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एक्सरे विभाग में वैसे तो डिजिटल मशीन लगी हुई है लेकिन वह बीते एक साल से खराब है। मरीजों का एक्सरे पोर्टेबल मशीन से हो रहा है। पोर्टेबल मशीन 100 एमसी की क्षमता वाली मशीन है। ऐसे में मशीन से एक बार में सिर्फ 70 से 75 एक्सरे हो पाते हैं। इसके बाद मशीन को कुछ देर के लिए आराम देना पड़ता है। यही मशीन बीते शुक्रवार को खराब हो गई थी। कर्मचारी उससे कम क्षमता वाली मशीन को जोड़कर इमरजेंसी मरीजों के एक्सरे कर रहे थे लेकिन ओपीडी मरीजों को बैरंग कर दिया जाता था।
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रोजाना करीब 100 मरीजों को वापस भेजा जा रहा था। मरीजों को बाहर से 500 से 800 रुपये खर्च करने पड़ रहे थे। बुधवार को पोर्टेबल मशीन सायरिक्स कंपनी के टेक्नीशियनों ने सही कर दिया और अब फिर से एक्सरे शुरू हो गए। सीएमएस डॉ. चंद्र कुमार ने बताया कि मशीन सही हो गई है और एक्सरे किए जाने लगे हैं।
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