फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   want free poshahar but not jobcard

मुफ्त पोषाहार को तैयार, मनरेगा में काम से इनकार

Sun, 10 Oct 2021 11:21 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 10 Oct 2021 11:21 PM IST
विज्ञापन
want free poshahar but not jobcard
हरदोई। कुपोषण की बड़ी वजह आर्थिक तंगी भी मानी जाती है। कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के अभिभावकों को आय बढ़ाने के विभिन्न मौके दिए जाते हैं। मनरेगा के तहत मजदूरी भी दी जाती है। लेकिन परेशानी यह है कि मुफ्त पोषाहार लेने वाले बच्चों के अभिभावक रोजगार से इनकार कर रहे हैं।
विज्ञापन

बाल विकास पुष्टाहार विभाग के अधीन कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने की कवायद की जाती है। जब कुपोषण के कारणों पर चर्चा होती है, तो यह भी सामने आता है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण माता पिता अपने बच्चों पर बहुत अधिक ध्यान नहीं दे पाते। इस बिंदु के सामने आने पर शासन ने ऐसे अभिभावकों को रोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए। कहा कि ऐसे बच्चों के पिता को मनरेगा के तहत जॉबकार्ड दिया जाए और एक वित्तीय वर्ष में सौ दिन का रोजगार उपलब्ध कराएं।
विज्ञापन

इसके तहत बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की सूची पूरे ब्योरे के साथ मनरेगा सेल को सौंप दी। ग्राम सचिवों और रोजगार सेवकों ने गांव-गांव जाकर संबंधित बच्चों के पिता से संपर्क किया, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने जॉब कार्ड बनवाने और मनरेगा में मजदूरी करने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

टड़ियावां विकास खंड के ग्राम नानकगंज ग्रंट में रहने वाली राखी कुपोषित है। ग्राम्य विकास विभाग के कर्मचारियों ने राखी के पिता अमित से संपर्क कर उन्हें मनरेगा जॉबकार्ड बनाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन अमित ने इच्छुक न होने की बात कह दी।
मल्लावां विकास खंड के ग्राम शाहपुर गंगा निवास प्रिंस भी कुपोषित है। उसके पिता गिरजा प्रसाद से ग्राम सचिव और रोजगार सेवक ने संपर्क किया। मनरेगा के तहत कार्य करने के लिए जॉबकार्ड बनवाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन गिरिजा प्रसाद ने इनकार कर दिया।
हरियावां विकास खंड के ग्राम खेरिया में बरखेरिया केंद्र पर पंजीकृत शीला कुपोषित है। उसके पिता सालिक से ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने संपर्क किया और मनरेगा के तहत कार्य उपलब्ध कराने का प्रस्ताव देकर जॉब कार्ड बनवाने को कहा। सालिक ने जॉबकार्ड बनवाने का इच्छुक न होने की बात कह दी।
डीपीओ की सुनिए
जिला कार्यक्रम अधिकारी बुद्धि मिश्रा ने बताया कि कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों की सूची समय-समय पर ग्राम्य विकास विभाग के अधिकारियों को भेजी जाती है। हर माह इसकी समीक्षा भी होती है। बच्चों के अभिभावकों को मनरेगा से रोजगार दिलाने की जिम्मेदारी मनरेगा उपायुक्त की है।

मनरेगा उपायुक्त बोले
मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल का कहना है कि सूची बाल विकास पुष्टाहार विभाग से मिली है। ग्राम सचिव और रोजगार सेवक संपर्क भी करते हैं। जो लोग इच्छुक होते हैं उनके जॉबकार्ड बनाकर कार्य उपलब्ध कराया जाता है। अगर कोई जॉबकार्ड नहीं बनवाता और मनरेगा से कार्य नहीं करना चाहता तो उस पर दबाव नहीं बनाया जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed