{"_id":"6ad3b9c496d73154f006c732","slug":"verdict-delivered-in-cow-slaughter-act-case-after-27-years-convict-sentenced-to-three-years-in-prison-hardoi-news-c-213-1-hra1001-158645-2026-10-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: गोवध अधिनियम में 27 साल बाद फैसला, दोषी को तीन साल की सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: गोवध अधिनियम में 27 साल बाद फैसला, दोषी को तीन साल की सजा
विज्ञापन
हरदोई। गोवध अधिनयम में 27 साल पुराने मामले में सिविल जज जूनियर डिवीजन एफटीसी महिला विशाल दीक्षित ने एक शख्स को दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। तीन आरोपियों में दो की पहले ही मौत हो चुकी है।
शिवसेना पार्टी से जुड़े अवनीश श्रीवास्तव विद्रोही ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 19 दिसंबर 1999 को बघौली पशु नखासे के पास पावर हाउस के सामने छह वृद्ध मवेशियों (बैलों) को ले जा रहे तीन लोगों को पकड़ा था। शाहजहांपुर जनपद के थाना कांट के गांव रावतपुर निवासी नसीर बंजारा, शराफत बंजारा और माधौगंज के हीरा रोशनपुर निवासी बन्ने बैलों को कटान के लिए शाहजहांपुर के कांट ले जा रहे थे। तहरीर पर तीनों के खिलाफ गोवध निवारण अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों को पेश किया गया। बचाव पक्ष ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास, स्वतंत्र गवाहों की कमी और झूठा फंसाने का तर्क दिया। अदालत ने माना कि घटना और गवाही के बीच करीब 27 साल का अंतर होने के कारण मामूली विरोधाभास स्वाभाविक हैं। न्यायालय ने साक्ष्य के आधार पर माना कि बैलों को कटान के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था और उनके परिवहन के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं था।
विज्ञापन
मुकदमा की सुनवाई दौरान नसीर बंजारा और शराफत बंजारा की मौत हो चुकी है। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर सिविल जज ने दोषी बन्ने को उप्र गोवध निवारण अधिनियम के तहत सजा सुनाई है।
विज्ञापन
शिवसेना पार्टी से जुड़े अवनीश श्रीवास्तव विद्रोही ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 19 दिसंबर 1999 को बघौली पशु नखासे के पास पावर हाउस के सामने छह वृद्ध मवेशियों (बैलों) को ले जा रहे तीन लोगों को पकड़ा था। शाहजहांपुर जनपद के थाना कांट के गांव रावतपुर निवासी नसीर बंजारा, शराफत बंजारा और माधौगंज के हीरा रोशनपुर निवासी बन्ने बैलों को कटान के लिए शाहजहांपुर के कांट ले जा रहे थे। तहरीर पर तीनों के खिलाफ गोवध निवारण अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों को पेश किया गया। बचाव पक्ष ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास, स्वतंत्र गवाहों की कमी और झूठा फंसाने का तर्क दिया। अदालत ने माना कि घटना और गवाही के बीच करीब 27 साल का अंतर होने के कारण मामूली विरोधाभास स्वाभाविक हैं। न्यायालय ने साक्ष्य के आधार पर माना कि बैलों को कटान के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था और उनके परिवहन के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र नहीं था।
विज्ञापन
मुकदमा की सुनवाई दौरान नसीर बंजारा और शराफत बंजारा की मौत हो चुकी है। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर सिविल जज ने दोषी बन्ने को उप्र गोवध निवारण अधिनियम के तहत सजा सुनाई है।