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वचनेश त्रिपाठी स्मृति सम्मान से नवाजे गए सोम
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फोटो-24-वरिष्ठ साहित्यकार सोम को पं. वचनेश त्रिपाठी स्मृति सम्मान से सम्मानित करते संस्था पदाधिका
- फोटो : HARDOI
हरदोई। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था मां आशा फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने विश्व हिंदी दिवस पर वरिष्ठ साहित्यकार सुरेशपाल सिंह सोम को पं. वचनेश त्रिपाठी स्मृति सम्मान से सम्मानित किया।
आजाद नगर निवासी 84 वर्षीय कवि सोम का जन्म सवायजपुर के ग्राम बरवन में हुआ था। इन गीतकार की नौ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। गीतों से सजी पहली पुस्तक आंगन तो सीधा था पर हम नाच नहीं पाए... सन 2000 में प्रकाशित हुई।
उसके बाद छंदाटवी, मां भवानी का प्रसाद, कब तक हम और सुने, गीत मेरे मीत, आराधना के स्वर, मेरी काव्य यात्रा के पड़ाव, भोर और अंधेरे व गद्य ग्रंथ सोम संतति प्रकाशित हो चुकी हैं।
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रविवार को उनको सम्मानित करते हुए संस्था के संरक्षक पंकज अवस्थी ने कहा कि साहित्यकार हमारी धरोहर हैं। उनका सम्मान करना हमारा दायित्व व परम सौभाग्य है।
संस्थाध्यक्ष अजीत शुक्ल ने कहा कि जिन साहित्यकारों को पढ़कर व सुनकर हमने कविता लिखना सीखा उनको सम्मानित कर स्वयं गौरवांवित हैं। कहा कि युवा रचनाकारों द्वारा सम्मान की परंपरा सराहनीय है। इस अवसर पर संयोजक आकाश सिंह, सचिन मिश्र, श्याम जी गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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आजाद नगर निवासी 84 वर्षीय कवि सोम का जन्म सवायजपुर के ग्राम बरवन में हुआ था। इन गीतकार की नौ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। गीतों से सजी पहली पुस्तक आंगन तो सीधा था पर हम नाच नहीं पाए... सन 2000 में प्रकाशित हुई।
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उसके बाद छंदाटवी, मां भवानी का प्रसाद, कब तक हम और सुने, गीत मेरे मीत, आराधना के स्वर, मेरी काव्य यात्रा के पड़ाव, भोर और अंधेरे व गद्य ग्रंथ सोम संतति प्रकाशित हो चुकी हैं।
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रविवार को उनको सम्मानित करते हुए संस्था के संरक्षक पंकज अवस्थी ने कहा कि साहित्यकार हमारी धरोहर हैं। उनका सम्मान करना हमारा दायित्व व परम सौभाग्य है।
संस्थाध्यक्ष अजीत शुक्ल ने कहा कि जिन साहित्यकारों को पढ़कर व सुनकर हमने कविता लिखना सीखा उनको सम्मानित कर स्वयं गौरवांवित हैं। कहा कि युवा रचनाकारों द्वारा सम्मान की परंपरा सराहनीय है। इस अवसर पर संयोजक आकाश सिंह, सचिन मिश्र, श्याम जी गुप्ता आदि मौजूद रहे।