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Hardoi News: नौ फीट गहरी बखारी में उतरे प्रधान के पति समेत दो की दम घुटने से मौत

Wed, 15 Apr 2026 11:06 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2026 11:06 PM IST
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Two people, including the husband of the Pradhan, who had descended into a nine-foot deep barn, died of suffocation.
बिलग्राम (हरदोई)। कोतवाली क्षेत्र के जलालपुर गांव में मंगलवार रात नौ फीट गहरी बखारी की सफाई करने उतरा ग्रामीण बेहोश हो गया। उसे बचाने उतरे प्रधान के पति भी बेसुध हो गए। कुछ देर बाद बाहर निकाले गए दोनों को अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टर ने दोनों को मृत बता दिया। पुलिस के मुताबिक दम घुटने से दोनों की मौत हुई है।
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जलालपुर की प्रधान विद्यावती के पति सुरेंद्र कुमार (65) खेती करते थे। उनके मकान के सामने ही उनका गोड़ा है। गोड़ा में जमीन से लगभग नौ फीट नीचे अनाज रखने के लिए बखारी बनी है। मंगलवार रात उनके कहने पर पड़ोसी कैलाश (45) बखारी की सफाई करने के लिए नीचे उतरा। कुछ ही देर में बेसुध हो गया। यह देखकर सुरेंद्र ने शोर मचाया और खुद भी सीढ़ी से नीचे उतर गए। उतरते ही वे भी बेसुध हो गए। तब तक वहां परिजनों और ग्रामीणों की भीड़ लग चुकी थी।
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परिवार का ही एक किशोर नीचे जाने के लिए उतरा लेकिन दिक्कत महसूस होने पर तुरंत ऊपर आ गया। इसके बाद ग्रामीणों ने बखारी में पानी भरना शुरू किया। कुछ देर बाद ग्रामीण बखारी के अंदर उतरे और सुरेंद्र व कैलाश को बाहर निकालकर सीएचसी बिलग्राम ले गए। यहां चिकित्सक ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
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सुरेंद्र के परिवार में तीन पुत्र हैं। कैलाश के चार बेटियां हैं। अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सुबोध गौतम ने बताया कि दम घुटने के कारण दोनों की मौत हुई है। दोनों शवों का पोस्टमार्टम कराया गया है।



पोस्टमार्टम में मौत की वजह साफ नहीं, पेशाब व खून के नमूने लिए



सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम में सुरेंद्र और कैलाश की मौत की वजह स्पष्ट न होने से पेशाब और खून के नमूने भी लिए गए हैं। इन्हें विसरा के साथ विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा। इनकी जांच से मौत की वजह स्पष्ट हो जाएगी।








बंद बखारी में बनती है अमोनिया गैस, इसी से घुट जाता है दम

पोस्टमार्टम के जानकार चिकित्सा विभाग के फार्मासिस्ट पंकज कुमार बताते हैं कि अमूमन ऐसे मामलों में मौत का कारण अमोनिया गैस होती है। खून और पेशाब की जांच में यह स्थिति स्पष्ट होती है। उन्होंने बताया कि जमीन के अंदर बनी बखारी अगर कई दिनों तक खाली रहती है और खोली नहीं जाती है तो उसमें अमोनिया गैस बन जाती है। जलालपुर के मामले में भी पता चला है कि लगभग सवा माह से बखारी खाली पड़ी थी और तभी से बंद भी थी।
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