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Hardoi News: 100 शैया में दो, हरपालपुर में हुए सिर्फ तीन सिजेरियन प्रसव
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हरदोई। सरकारी अस्पतालों में संसाधनों में भले ही वृद्धि की जा रही हो, लेकिन जिम्मेदारों ने शासन की मंशा पर प्रश्न चिंह लगा दिया है। सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव कराए ही नहीं जा रहे। मासिक रिपोर्ट ने कई ब्लॉकों की पोल खोली है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पूरे माह एक भी सिजेरियन नहीं हुए, जबकि सभी संसाधन मौजूद हैं।
जिला स्तर पर महिला अस्पताल और 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय सहित 19 विकास खंडों पर बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों की तैनाती कर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा देने के निर्देश हैं। गर्भवती महिलाओं के प्रसव में भी संसाधन बढ़ाए गए हैं। इसके बावजूद मरीज भटक रहे हैं। संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी नहीं है, सिजेरियन प्रसव की स्थिति उससे भी बदतर है।
जिम्मेदार किसी लाभवश अस्पताल में सिजेरियन प्रसव करते नहीं हैं और मरीज को निजी क्लीनिकों पर रेफर कर देते हैं। शासन की मंशा के विपरित सुविधाएं लोगों को नहीं मिल रही हैं। मार्च 2025 की मासिक रिपोर्ट के अनुसार जिले के 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय में सिर्फ दो सिजेरियन प्रसव हुए। वहीं, हरपालपुर में तीन, पिहानी में पांच और बिलग्राम में 3, संडीला में 11 हुए। जिला महिला अस्पताल में 210 प्रसव हुए।
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निजी क्लीनिकों पर पहुंच जातीं प्रसूताएं
हरदोई। सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार सिजेरियन प्रसवों से दूर भागते हैं और प्रसूताओं को किसी कारणवश निजी क्लीनिकों पर रेफर कर देते हैं। स्वास्थ्य कर्मी आशा ही योजनाओं में पलीता लगाए हैं और प्रसूताओं को निजी क्लीनिकों पर पहुंचा देती हैं। आए दिन मरीजों को बाहर भेजने के मामले में सामने भी आते रहते हैं। जिला महिला अस्पताल में यह रोजाना होता है। इसलिए अस्पताल के गेट पर इनकी भीड़ भी काफी देखी जाती है।
-सिजेरियन प्रसवों को बढ़ाने के लिए विशेषकर हरपालपुर और बिलग्राम इकाई प्रभारियों को निर्देशित किया गया है। सुविधाएं और संसाधन बढ़ाए गए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों को भी निर्देशित किया गया है कि वह प्रसूताओं को लाभान्वित कराएं। -डॉ. रोहताश कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी
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जिला स्तर पर महिला अस्पताल और 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय सहित 19 विकास खंडों पर बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों की तैनाती कर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा देने के निर्देश हैं। गर्भवती महिलाओं के प्रसव में भी संसाधन बढ़ाए गए हैं। इसके बावजूद मरीज भटक रहे हैं। संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी नहीं है, सिजेरियन प्रसव की स्थिति उससे भी बदतर है।
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जिम्मेदार किसी लाभवश अस्पताल में सिजेरियन प्रसव करते नहीं हैं और मरीज को निजी क्लीनिकों पर रेफर कर देते हैं। शासन की मंशा के विपरित सुविधाएं लोगों को नहीं मिल रही हैं। मार्च 2025 की मासिक रिपोर्ट के अनुसार जिले के 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय में सिर्फ दो सिजेरियन प्रसव हुए। वहीं, हरपालपुर में तीन, पिहानी में पांच और बिलग्राम में 3, संडीला में 11 हुए। जिला महिला अस्पताल में 210 प्रसव हुए।
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निजी क्लीनिकों पर पहुंच जातीं प्रसूताएं
हरदोई। सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार सिजेरियन प्रसवों से दूर भागते हैं और प्रसूताओं को किसी कारणवश निजी क्लीनिकों पर रेफर कर देते हैं। स्वास्थ्य कर्मी आशा ही योजनाओं में पलीता लगाए हैं और प्रसूताओं को निजी क्लीनिकों पर पहुंचा देती हैं। आए दिन मरीजों को बाहर भेजने के मामले में सामने भी आते रहते हैं। जिला महिला अस्पताल में यह रोजाना होता है। इसलिए अस्पताल के गेट पर इनकी भीड़ भी काफी देखी जाती है।
-सिजेरियन प्रसवों को बढ़ाने के लिए विशेषकर हरपालपुर और बिलग्राम इकाई प्रभारियों को निर्देशित किया गया है। सुविधाएं और संसाधन बढ़ाए गए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों को भी निर्देशित किया गया है कि वह प्रसूताओं को लाभान्वित कराएं। -डॉ. रोहताश कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी