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पौने दो लाख बच्चों का नामांकन घटा

Mon, 12 Jan 2015 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Mon, 12 Jan 2015 12:05 AM IST
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Twenty-two million children enrolled reduced

जिले में स्कूल में पढ़ने वाले 1 लाख 71 हजार 249

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बच्चे रजिस्टर के पन्नों से गायब हो गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में नामांकन में आई कमी से शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। नामांकन कम होने के मामले में सर्वाधिक संख्या निजी स्कूलों की है। इसको लेकर सांख्यिकी प्रपत्राें को दुबारा खंगाला जा रहा है।

ज्ञात हो कि जिले में शैक्षिक स्तर की जानकारी को हर वर्ष सांख्यिकी प्रपत्र से स्कूलाें से सूचना मांगी जाती है। उसी पर फीडिंग कर डाटा भारत सरकार को भेजा जाता है। एमआईएस डाटा पर ही सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत बजट व कार्य योजना बनाई जाती है।

जिले में कक्षा एक से 12 तक के स्कूलों से प्रपत्रों से जानकारी मांगी गई थी। जिसको फीड़ कर डाटा तैयार किया गया, पर जब फाइनल डाटा आया तो उसे देख सभी के होश उड़ गए। जिले में विगत वर्ष की तुलना में नामांकन में सवा बच्चों की संख्या कम हो गई। विगत वर्ष जिले में कुल 9,70,873 थी जो अबकी घटकर 7,99,624 रह गई। जिले में 1,71,249 बच्चे कम हो गए।

इनमें जहां 84,888 बालक कम हो गए। वहीं 86,361 बालिकाओं को नामांकन कम हुआ, जबकि स्कूलों की संख्या 5525 से बढ़कर 5591 हो गई है। इससे विभाग में हड़कंप है। इनमें परिषदीय स्कूलों में छात्र संख्या 5,24,477 से घटकर 4,96,017 रह गई। सरकारी स्कूलों में जहां मात्र 28 हजार 460 का अंतर आया है, वहीं निजी स्कूलों में एक लाख 42 हजार 789 बच्चे कम हो गए है।

उधर, शासन की ओर से कक्षा एक से आठ तक की छात्रवृत्ति मुहैया कराई जाती थी। जिसमें मान्यता प्राप्त स्कूल शामिल रहते थे। आशंका है कि निजी स्कूल छात्रवृत्ति के कारण विद्यार्थियों की संख्या को बढ़ा कर भेजते थे, जिससे नामांकन कम हुए या फिर बढ़ाकर भेजी जाने वाली छात्र संख्या पर अंकुश लगा, क्योंकि वर्तमान शिक्षा सत्र में छात्रवृत्ति बंद होने से निजी स्कूलों में अचानक नामांकन कम हो गया।

उधर, एमआईएस प्रभारी शैलेंद्र झा ने बताया कि सांख्यिकी प्रपत्र में काफी खामियां मिली है। इस कारण फीडिंग में संख्या कम हुई है। इसके अलावा अन्य भी खामियां मिली हैं, जिसकी जांच कराई जा रही है। उधर, स्कूलों में नामांकन कम होने से सांख्यिकी प्रपत्र भरने में भी स्कूल प्रधानाचार्यों की उदासीनता जाहिर हुई है।

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