फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   Trauma center between medical college and health department became non-existent

Hardoi News: मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग के बीच अस्तित्वहीन हो गया ट्रॉमा सेंटर

Thu, 06 Nov 2025 10:46 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Nov 2025 10:46 PM IST
विज्ञापन
Trauma center between medical college and health department became non-existent
फोटाे- 14- लखनऊ रोड ​स्थित ट्रामा सेंटर। संवाद
हरदोई। दुर्घटनाग्रस्त और गंभीर रोगियों के लिए संचालित किया गया ट्रॉमा सेंटर अब आस्तित्व हीन हो चुका है। ट्रॉमा सेंटर सिर्फ कागजों पर चल रहा है। ट्रॉमा सेंटर पर गंभीर मरीजों का इलाज होना तो दूर ओपीडी तक नहीं होती है। स्टाफ भी ट्रॉमा सेंटर जाकर कुछ ही घंटों में वापस लौट आता है। ऐसे में ट्रॉमा सेंटर के संचालन को लेकर सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है।
विज्ञापन

शहर से सात किमी दूर लखनऊ रोड पर नयागांव के पास 2.61 करोड़ रुपये से वर्ष 2016 में बना ट्रॉमा सेंटर अब सिर्फ कागजों पर चल रहा है। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए शुरू किए गए ट्रॉमा सेंटर पर आज किसी भी मरीज का इलाज ही नहीं हो सका, जबकि ट्रॉमा सेंटर को 20 बेडों के साथ उपकरण और अन्य सुविधाओं के साथ शुरू किया गया था। कोविड के दौरान सेंटर को क्वारंटिन होम बना दिया और जब तक स्थिति सामान्य हुई तब तक ट्रॉमा सेंटर न तो स्टाफ रह गया और न ही उपकरण।
विज्ञापन

इसी बीच जिले में मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हो गया तो अब ट्रॉमा सेंटर कौन संचालित करे इसको लेकर खींचतान बनी रही। ट्रॉमा सेंटर को न तो स्वास्थ्य विभाग चलाना चाह रहा है और न ही मेडिकल कॉलेज प्रबंधन। आबकारी मंत्री के हस्तक्षेप के बाद आठ साल बाद स्वास्थ्य विभाग ने ट्रॉमा सेंटर शुरू किया लेकिन वह व्यवस्थाएं ही नहीं करा पाए। पर्याप्त स्टाफ भी नहीं रखा। कुछ चिकित्सक और कर्मचारियों को संबद्ध किया गया लेकिन वह सिर्फ खानापूर्ति तक रहे। कागजों पर ड्यूटियां होती रहीं और ओपीडी में इक्का दुक्का मरीज देखे गए। अब स्थिति यह है कि न तो मरीज आते हैं और चिकित्सक भी आधा एक घंटा रुक कर चले जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



ट्रॉमा सेंटर में स्टाफ भी किया गया था तैनात

गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर में आर्थोपैडिक सर्जन, एनेस्थेटिक, हृदयरोग विशेषज्ञ, सर्जन, तीन जूनियर डॉक्टर, नौ एमटी डब्लू, नौ नर्सिंग स्टॉफ, दो लैब टेक्नीशियन, चार एक्सरे टेक्नीशियन, दो सफाई कर्मी, एक चौकीदार की तैनाती की गई थी। इसके अलावा सेंटर में 20 बेड के साथ 6 वेंटीलेटर, एक्सरे मशीन, ऑपरेशन कक्ष और पैथालॉजी की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई लेकिन समय के साथ अब न तो स्टाफ है और न ही उपकरण।




दोनों विभाग नहीं लेना चाह रहे जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ट्रॉमा सेंटर की जिम्मेदारी नहीं लेना चाह रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जेबी गोगोई का कहना है कि ट्रॉमा सेंटर अब स्वास्थ्य विभाग का है। मेडिकल कॉलेज परिसर में दूसरा ट्रॉमा सेंटर बन रहा है। वहीं सीएमओ डॉ. भवनाथ पांडेय के अनुसार ट्रॉमा सेंटर के लिए स्टाफ और अन्य आवश्यकताएं मेडिकल कॉलेज को करनी थी। दोनों विभागों की खींचतान में मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। आज भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए हॉयर सेंटर लखनऊ ही जाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed