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अवैध खनन के खेल से गुल तीन चिराग

Tue, 20 Jan 2015 12:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Tue, 20 Jan 2015 12:30 AM IST
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Three of the game Gul mining lamp

बालू के अवैध खनन के खेल ने कुल्लही गांव में तीन

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घरों के चिराग गुल कर दिए हैं। कुल्लही गांव बालू के अवैध खनन में सबसे आगे है। पुलिस की नजर से बचने को खनन माफिया रात को बालू निकालते हैं और इसके लिए वह नई उम्र के लड़कों को लालच के बदले मजदूरी पर ले जाते हैं।

हरियावां क्षेत्र के उचवल गांव के पास रविवार को बालू से भरी ट्राली पलटने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसे लेकर पुलिस-पब्लिक के बीच संघर्ष भी हुआ था। मृतकों मेें दो नई उम्र के लड़के हैं, जबकि एक युवक शामिल है। सभी कोतवाली पिहानी के कुल्लही गांव के निवासी हैं।

कुल्लही गांव बालू के अवैध खनन का केंद्र बन गया है। जिम्मेदारों की नजरअंदाजी से यह कारोबार यहां इतना फला फूला कि जिस गांव में पांच साल पहले चंद्र गाड़ियां थीं, आज वहां अकेले ट्रैक्टर-ट्रालियाें की संख्या ही लगभग दो दर्जन है। यहां के कई लोग अवैध खनन का कारोबार कर रहे हैं। कार्रवाई की डर से रात को होने वाले खनन के लिए मजदूर ढूंढने के बजाय कारोबार से जुड़े लोगों ने नया तरीका निकाला है।

वह गांव के नई उम्र के लड़कों को पचास रुपये प्रति ट्राली के हिसाब से उन्हें देते हैं और एक ट्रैक्टर रात में कम से कम पांच बार खनन की गई बालू सप्लाई कर लेती है। दुकानों पर एक ट्राली बालू की कीमत के सापेक्ष इस तरह आने वाली बालू लोगोें को काफी सस्ती पड़ती है।

प्रति ट्रैक्टर-ट्राली सप्लायर को डेढ़ हजार रुपये तक की बचत हो जाती है और एक रात में पांच ट्राली खनन कर यह लोग 7500 रुपये तक की बचत हो जाती है। अपने ट्रैक्टर ट्राली पर केवल डीजल का खर्च है, जबकि नई उम्र के मजदूर प्रति ट्राली पचास रुपये में ही मयस्सर हो जाते हैं।

इस तरह से खनन माफिया ने यहां नई उम्र के मजदूरों की एक लम्बी फौज तैयार कर दी है जो खनन के काम में माहिर हो चुके हैं। उध्ार, सड़क हादसे में मारे गए मजदूरों के शव पहुंचते ही कुल्लही गांव परिजनों के करूण क्रंदन से दहल उठा। सोमवार को शवों के अंतिम संस्कार कराने को पुलिस मौजूद रही।

दोपहर में तीनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक रघुनाथ की पत्नी बच्चों का रो रोकर बुरा हाल है। वहीं देवेंद्र और ललित के कम उम्र में ही यह अंजाम याद कर घर वाले सिसक रहे हैं।

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