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Hardoi News: बजट है और भूमि भी है, वृहद गो सरंक्षण केंद्र का काम नहीं हो पाया शुरू
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हरदोई। भूमि भी पर्याप्त मात्रा में है और काम कराने के लिए शासन ने पहली किस्त में 80,00,000 रुपये भी दे दिए हैं, लेकिन अभी तक शासन की शीर्ष प्राथमिकता में से एक वृहद गो संरक्षण केंद्र बनवाए जाने का काम शुरू नहीं हो पाया है। कार्यदायी संस्था ने भूमि की श्रेणी का हवाला देते हुए काम कराने की प्रक्रिया तक शुरू नहीं कराई गई है।
मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता में से एक निराश्रित मवेशियों के संरक्षण अभियान में मवेशियों को संरक्षित किए जाने के लिए स्थायी ठिकाना देने के लिए वृहद गो संरक्षण केंद्र बनवाए जा रहे हैं। विकास खंड कोथावां में पशुपालन विभाग के प्रस्ताव पर राजस्व विभाग की ओर से भूमि प्रबंधन समिति की ओर से भूमि भी उपलब्ध करा दी गई है। पिपरी उक्त भूमि पर 1,60,12,000 रुपये की लागत वाले वृहद गो संरक्षण केंद्र की स्थापना को मंजूरी भी शासन ने दे दी है। विभाग ने काम कराने के लिए कार्यदायी संस्था के तौर पर यूपीसीएलडीएफ को जिम्मेदारी दी है। इसी के साथ काम कराने के लिए 80,00,000 रुपये भी पहली किस्त में दे दिए हैं।
रुपये मिलने के बाद भी कार्यदायी संस्था की ओर से अभी तक काम कराए जाने के लिए प्रक्रिया तक शुरू नहीं की गई है। कार्यदायी संस्था ने पिपरी में गोमती नदी के किनारे बलुई भूमि का हवाला देकर काम कराए जाने में निर्माण की मजबूती को लेकर आशंका जाहिर की है। इससे अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। यूपीसीएलडीएफ के कार्यप्रभारी अभिनव सिंह ने बताया कि मॉडल एस्टीमेट पर स्वीकृति मिली है। पिपरी में बलुई भूमि है, जिससे काम कराना संभव नहीं हो पा रहा है।
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गोमती नदी के किनारे की सरकारी भूमि पर है माफिया की नजर
मुख्यमंत्री की ओर से नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र घोषित किए जाने के साथ ही कॉरीडोर बनवाए जाने से चौरासी कोसी क्षेत्र का विकास प्रस्तावित है। तीर्थ क्षेत्र में चयन के बाद से ही लोगों ने नैमिष क्षेत्र में भूमि की खरीद-फरोख्त में तेजी से रुचि दिखाई है। ऐसे में गोमती नदी के किनारे बड़ी मात्रा में मौजूद सरकारी भूमि पर माफिया की भी नजर है। निजी क्षेत्र की कम भूमि को बेचकर बड़े भू-भाग पर कब्जा कराया जा रहा है। सरकारी भूमि पर खड़े शीशम आदि के कीमती वृक्षों का कटान भी कराया गया है।
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मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता में से एक निराश्रित मवेशियों के संरक्षण अभियान में मवेशियों को संरक्षित किए जाने के लिए स्थायी ठिकाना देने के लिए वृहद गो संरक्षण केंद्र बनवाए जा रहे हैं। विकास खंड कोथावां में पशुपालन विभाग के प्रस्ताव पर राजस्व विभाग की ओर से भूमि प्रबंधन समिति की ओर से भूमि भी उपलब्ध करा दी गई है। पिपरी उक्त भूमि पर 1,60,12,000 रुपये की लागत वाले वृहद गो संरक्षण केंद्र की स्थापना को मंजूरी भी शासन ने दे दी है। विभाग ने काम कराने के लिए कार्यदायी संस्था के तौर पर यूपीसीएलडीएफ को जिम्मेदारी दी है। इसी के साथ काम कराने के लिए 80,00,000 रुपये भी पहली किस्त में दे दिए हैं।
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रुपये मिलने के बाद भी कार्यदायी संस्था की ओर से अभी तक काम कराए जाने के लिए प्रक्रिया तक शुरू नहीं की गई है। कार्यदायी संस्था ने पिपरी में गोमती नदी के किनारे बलुई भूमि का हवाला देकर काम कराए जाने में निर्माण की मजबूती को लेकर आशंका जाहिर की है। इससे अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। यूपीसीएलडीएफ के कार्यप्रभारी अभिनव सिंह ने बताया कि मॉडल एस्टीमेट पर स्वीकृति मिली है। पिपरी में बलुई भूमि है, जिससे काम कराना संभव नहीं हो पा रहा है।
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गोमती नदी के किनारे की सरकारी भूमि पर है माफिया की नजर
मुख्यमंत्री की ओर से नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र घोषित किए जाने के साथ ही कॉरीडोर बनवाए जाने से चौरासी कोसी क्षेत्र का विकास प्रस्तावित है। तीर्थ क्षेत्र में चयन के बाद से ही लोगों ने नैमिष क्षेत्र में भूमि की खरीद-फरोख्त में तेजी से रुचि दिखाई है। ऐसे में गोमती नदी के किनारे बड़ी मात्रा में मौजूद सरकारी भूमि पर माफिया की भी नजर है। निजी क्षेत्र की कम भूमि को बेचकर बड़े भू-भाग पर कब्जा कराया जा रहा है। सरकारी भूमि पर खड़े शीशम आदि के कीमती वृक्षों का कटान भी कराया गया है।