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Hardoi News: एंबुलेंस का रोगियों तक पहुंचने का समय आठ मिनट, 20 मिनट बाद भी नहीं पहुंच रहीं

Wed, 06 Aug 2025 10:28 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 06 Aug 2025 10:28 PM IST
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The time taken by ambulances to reach patients is 8 minutes, but they are not reaching even after 20 minutesThe time taken by ambulances to reach patients is 8 minutes, but they are not reaching even after 20 minutes
हरदोई। सरकार ने मरीजों को अस्पताल तक लाने के लिए एंबुलेंस सेवा निशुल्क तो दी है, साथ ही कम समय में पहुंचने के निर्देश भी दिए हैं।
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जिले में मरीजों को एंबुलेंस की सेवा तो मिलती है लेकिन अपेक्षित समय में बहुत कम मरीजों तक ही एंबुलेंस पहुंच पाती है। रिकॉर्ड में आठ मिनट से कम समय में रोगी तक पहुंचने का दावा किया जाता है लेकिन मरीजों तक 20 मिनट में भी एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती है। कई मरीजों को निजी वाहनों से पहुंचाना पड़ता है।
दुर्घटना या गंभीर बीमारी में मरीजों की असामयिक मौत कई बार समय से इलाज न मिलने के कारण भी हो जाती है। समय से अस्पताल पहुंचाने में सबसे बड़ा रोल एंबुलेंस का होता है। सरकार ने निशुल्क एंबुलेंस की सेवा दी है और मरीजों को समय से पहुंचाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके बावजूद अक्सर मरीजों तक एंबुलेंस पहुंचने में काफी समय लग जाता है। जिले में गंभीर मरीजों को अस्पताल तक लाने के लिए 108 नंबर की 47 एंबुलेंस संचालित हो रही हैं।
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यह एंबुलेंस स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय सहित जिले के सीएचसी और पीएचसी पर तैनात हैं। अधिकारियों को भेजे जाने वाले रिकॉर्ड की माने तो एंबुलेंस मरीज के पास आठ मिनट से कम समय में पहुंच रही हैं। तीन-तीन माह का औसत समय का रिकॉर्ड देखे तो एंबुलेंस सात मिनट 42 सेंकेंड से लेकर सात मिनट 53 सेकेंड में मरीज तक पहुंच रही हैं। हकीकत यह है कि एंबुलेंस मरीज के पास 20 मिनट तक भी नहीं पहुंच रही हैं।
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केस-1- हरपालपुर के पलिया निवासी बृजकिशोर को जंगली सुअर ने घायल कर दिया। उन पर सुबह करीब साढ़े आठ बजे हमला हुआ था। गांव के एक व्यक्ति ने 108 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस बुलाई। उनके पास एंबुलेंस करीब 25 मिनट के बाद पहुंची। इसके बाद वह वहां से साढ़े नौ बजे के बाद निकले और करीब साढ़े 11 बजे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पहुंचे।

केस-2- बीती 26 जुलाई को पाली थाना क्षेत्र के अतर्जी मोड़ पर एक दुर्घटना हुई थी। इस हादसे में चाचा-भतीजा घायल हुए थे। लोगों ने एंबुलेंस को दो बार कॉल किया। पुलिस भी मौके पर पहुंची लेकिन 24 मिनट तक एंबुलेंस नहीं आई। पुलिस ने ऑटो से घायलों को सीएचसी पहुंचाया। वहां से रेफर होने के बाद एंबुलेंस उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज आई।



कई बार एंबुलेंस एक मरीज को छोड़ने जाती और उसी समय दोबारा कॉल आ जाती है। ऐसे में मरीज को छोड़कर वापस आने में थोड़ा समय लग जाता है लेकिन फिर भी अधिकांश एंबुलेंस अपने अपेक्षित समय तक पहुंच जाती हैं। कोई भी एंबुलेंस कर्मी अगर नियमों की अनदेखी करता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है। -राज कपूर, प्रोग्राम मैनेजर
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