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पहली बार सहकारी बैंक फायदे में
अमर उजाला ब्यूरो/हरदोई
Updated Wed, 01 Jun 2016 12:33 AM IST
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एचसी भार्गव
- फोटो : अमर उजाला
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हरदोई। 23 साल से घाटे में चल रही जिला सहकारी बैंक ने वित्तीय वर्ष 2015- 2016 में 10 लाख का लाभ कमाकर इतिहास रच दिया है। 1991 के बाद पहली बार फायदे में आई बैंक को अब भारतीय रिजर्व बैंक से लाइसेंस मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है। बैंक के सूत्रों की माने तो चंद दिनों में ही बैंक को लाइसेंस मिल जाएगा। इसके लिए निर्धारित शर्तों को पूरा किया जा चुका है।
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1991 से लगातार घाटे का दंश झेलकर गुमनामी के अंधेरों में डूबने की डगर देख चुकी सहकारी बैंक के गत वित्तीय वर्ष में फायदे में आने से बैंक स्टाफ से लेकर प्रबंधन में उत्साह है। बैंक प्रबंधन ने चालू वित्तीय वर्ष में एक करोड़ तथा अगले तीन सालों में प्रदेश में सबसे ज्यादा लाभांश कमाने वाली बैंक बनाने को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है।
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सहकारी समितियों के माध्यम से बांटे गए कर्ज की रिकवरी न होने से 1991 से लगातार घाटे में चल बैंक के एनपीए एवं घाटे को देखते हुए चार साल पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने नए खाते खोलने पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद बैंक के भविष्य को लेकर तरह तरह की अटकलें लगाई जा रही थी।
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वर्ष 2014 में यहां बैंक के मुख्य कार्यपालक के रूप में तैनात होने वाले एचसी भार्गव ने बैंक प्रबंधन एवं चेयरमैन राम प्रकाश शुक्ला के साथ मिलकर बैंक को घाटे से उबारने एवं नाबार्ड तथा राज्य व केंद्र सरकार की गाइड लाइन अनुसार जिले की सभी 20 शाखाओं को पटरी पर लाने के लिए काम शुरू किया तो सकारात्मक परिणाम सामने आए।
जिसके बाद वर्ष 2015 में बैंक का आरबीआई से लाइसेंस के लिए आवेदन भेजा गया और निर्धारित शर्तों को पूरा करने के लिए केंद्र, राज्य, नाबार्ड से मिली सहायता राशि लगभग 95 करोड़ को बतौर सिक्योरिटी जमा करने के साथ समझौता पत्र के अनुसार 10 साल से अधिक पुराने बैंक के निदेशकाें का इस्तीफा दिए जाने की कार्रवाई 6 मई 2016 को पूर्ण हो गई। जिसके बाद बैंक को लाइसेंस मिलना लगभग तय माना जा रहा है।