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विधायक जी के वोट भी चट कर गए मवेशी
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हरदोई। अन्नदाता को मवेशियों की वजह से अपनी फसलों की जितनी चिंता रहती है, उससे कहीं ज्यादा इस विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपने वोटों के लिए इनसे डर था।
यह डर जितना लाजमी था उतना ही नतीजों में असरदार भी रहा। छुट्टा मवेशी जिले भर में भाजपा के एक लाख से ज्यादा वोट चट कर गए। यह बात खुद विधायकों ने अपनी जुबान से स्वीकारी है।
उनका कहना है कि इस बार उन्हें वोटों का काफी नुकसान मवेशियों की वजह से हुआ है। वरना और भी ज्यादा अंतर से विजयी होते। इस बार तीन विधायकों ने अपनी नई पारी में इन मवेशियों पर नियंत्रण को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है।
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विधानसभा चुनाव के नतीजों ने भले ही जिले की आठों विधानसभा सीटें भाजपा के खाते में जोड़ दी हों, लेकिन इस चुनावी समर में पार्टी प्रत्याशियों को सबसे ज्यादा मवेशियों के मुद्दे ने छकाया।
हर गांव-घर में प्रत्याशियों को मवेशियों की आफत का उलाहना दिया गया। खेत पर खड़ी फसलों को खो रहे किसानों का प्रदर्शन भी उनकी चिंता बढ़ाता रहा।
इसी माहौल में उन्हें किसानों की इस परेशानी का सबसे ज्यादा अहसास हुआ। चुनाव के लगभग सभी फैक्टर पर खुद को कामयाब मान रहे भाजपाइयों को सिर्फ इसी एक मसले की काट नहीं मिली।
परिणाम के दिन तक उनमें यह शक और दुविधा बनी रही कि मवेशी उनकी जीत का रास्ता न रोक लें। फिर 10 मार्च को ईवीएम से परिणाम निकले तो भाजपाइयों ने राहत की सांस ली।
कहा, अंत भला तो सब भला, लेकिन किसानों की इस समस्या का समाधान अब उनकी प्राथमिकता होगी।
कुछ विधायक ने दबी जुबान तो कुछ ने खुलकर भी अपनी जीत का अंतर कम होने का कारण इन मवेशियों को बताया। कहा कि यदि मवेशियों का मसला हल हो पाता तो ज्यादा वोट मिलते।
इनकी भी प्राथमिकता है मवेशी नियंत्रण
गोपामऊ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश, सदर से भाजपा विधायक नितिन अग्रवाल, शाहाबाद से भाजपा विधायिका रजनी तिवारी ने आवारा मवेशियों पर नियंत्रण को अपनी प्राथमिकता में गिनाया है।
उनका कहना है कि मवेशियों से किसानों की फसल बचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। इसके अलावा गौशाला व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाने पर काम होगा।
मवेशियों ने विधानसभा चुनाव में हमारे लगभग 20 हजार वोट कम किए हैं। इस फैक्टर की वजह से जीत का अंतर कम रहा है। वरना, कम से कम 30 हजार वोटों के अंतर से जीत होती।
- श्याम प्रकाश, विधायक, गोपामऊ
जिले में 12 लाख से ज्यादा छुट्टा मवेशी
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, लगभग साढ़े 12 लाख मवेशी जिले में हैं, जबकि करीब 26 हजार आवारा मवेशी हैं। इनमें से 24 हजार आश्रय स्थलों में हैं।
इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए 109 अस्थायी आश्रय स्थलों, चार वृहद गो संरक्षण केंद्रों और शहरी क्षेत्र के 11 अस्थायी आश्रय स्थलों में रखा गया है।
अन्ना मवेशियों की समस्या को नकारा नहीं जा सकता। हालांकि, विपक्ष ने जिस तरह से इस फैक्टर को प्रस्तुत किया जनपद में उतनी भी समस्या नहीं है।
भाजपा के मतदाताओं को इस मसले ने मामूली रूप से प्रभावित किया है। जिलेभर में संभवतया सवा लाख वोट भाजपा प्रत्याशियों के जनता की इस शिकायत की वजह से कम हुए होंगे।
- गंगेश पाठक, मीडिया प्रभारी, भाजपा
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यह डर जितना लाजमी था उतना ही नतीजों में असरदार भी रहा। छुट्टा मवेशी जिले भर में भाजपा के एक लाख से ज्यादा वोट चट कर गए। यह बात खुद विधायकों ने अपनी जुबान से स्वीकारी है।
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उनका कहना है कि इस बार उन्हें वोटों का काफी नुकसान मवेशियों की वजह से हुआ है। वरना और भी ज्यादा अंतर से विजयी होते। इस बार तीन विधायकों ने अपनी नई पारी में इन मवेशियों पर नियंत्रण को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है।
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विधानसभा चुनाव के नतीजों ने भले ही जिले की आठों विधानसभा सीटें भाजपा के खाते में जोड़ दी हों, लेकिन इस चुनावी समर में पार्टी प्रत्याशियों को सबसे ज्यादा मवेशियों के मुद्दे ने छकाया।
हर गांव-घर में प्रत्याशियों को मवेशियों की आफत का उलाहना दिया गया। खेत पर खड़ी फसलों को खो रहे किसानों का प्रदर्शन भी उनकी चिंता बढ़ाता रहा।
इसी माहौल में उन्हें किसानों की इस परेशानी का सबसे ज्यादा अहसास हुआ। चुनाव के लगभग सभी फैक्टर पर खुद को कामयाब मान रहे भाजपाइयों को सिर्फ इसी एक मसले की काट नहीं मिली।
परिणाम के दिन तक उनमें यह शक और दुविधा बनी रही कि मवेशी उनकी जीत का रास्ता न रोक लें। फिर 10 मार्च को ईवीएम से परिणाम निकले तो भाजपाइयों ने राहत की सांस ली।
कहा, अंत भला तो सब भला, लेकिन किसानों की इस समस्या का समाधान अब उनकी प्राथमिकता होगी।
कुछ विधायक ने दबी जुबान तो कुछ ने खुलकर भी अपनी जीत का अंतर कम होने का कारण इन मवेशियों को बताया। कहा कि यदि मवेशियों का मसला हल हो पाता तो ज्यादा वोट मिलते।
इनकी भी प्राथमिकता है मवेशी नियंत्रण
गोपामऊ विधानसभा सीट से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश, सदर से भाजपा विधायक नितिन अग्रवाल, शाहाबाद से भाजपा विधायिका रजनी तिवारी ने आवारा मवेशियों पर नियंत्रण को अपनी प्राथमिकता में गिनाया है।
उनका कहना है कि मवेशियों से किसानों की फसल बचाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। इसके अलावा गौशाला व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाने पर काम होगा।
मवेशियों ने विधानसभा चुनाव में हमारे लगभग 20 हजार वोट कम किए हैं। इस फैक्टर की वजह से जीत का अंतर कम रहा है। वरना, कम से कम 30 हजार वोटों के अंतर से जीत होती।
- श्याम प्रकाश, विधायक, गोपामऊ
जिले में 12 लाख से ज्यादा छुट्टा मवेशी
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, लगभग साढ़े 12 लाख मवेशी जिले में हैं, जबकि करीब 26 हजार आवारा मवेशी हैं। इनमें से 24 हजार आश्रय स्थलों में हैं।
इन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए 109 अस्थायी आश्रय स्थलों, चार वृहद गो संरक्षण केंद्रों और शहरी क्षेत्र के 11 अस्थायी आश्रय स्थलों में रखा गया है।
अन्ना मवेशियों की समस्या को नकारा नहीं जा सकता। हालांकि, विपक्ष ने जिस तरह से इस फैक्टर को प्रस्तुत किया जनपद में उतनी भी समस्या नहीं है।
भाजपा के मतदाताओं को इस मसले ने मामूली रूप से प्रभावित किया है। जिलेभर में संभवतया सवा लाख वोट भाजपा प्रत्याशियों के जनता की इस शिकायत की वजह से कम हुए होंगे।
- गंगेश पाठक, मीडिया प्रभारी, भाजपा