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पेंशनरों पर गिरी नियमों की गाज
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 16 Feb 2015 12:18 AM IST
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सत्कार देने की बात तो करते हैं, पर वास्तव में बुजुर्ग व्यक्ति के लिए
सम्मान और हक के साथ जीने को कितना संघर्ष करना पड़ता है, इसकी नजीर बैंकों
में लगने वाली बुजुर्ग पेंशनरों की लाइन और हर साल जीवित होने का प्रमाण
पत्र देने के लिए कोषागार के काउंटरों पर जूझते बुजुर्ग की कहानी सब कुछ कह
देती है।
ज्ञात हो कि संचार क्रांति के इस युग सबसे ज्यादा तरक्की फोन एवं बैंकिंग सेक्टर में होने के साथ ही तकनीक मजबूत हुई है, जिससे कोर बैंकिंग सेवा के साथ ही इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग, ई-पासबुक, इलेक्ट्रानिक ट्रांजेक्शन के साथ सीबीएस चेकबुक, एटीएम आदि की सेवाएं शुरू हो चुकी हैं।
पर इसके बाद भी ज्यादातर पेंशनर को तकनीकी तरक्की के रूप में बैंकों में मुहैया इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उक्त सुविधाओं की बात तो दूर कुछ बैंकों ने पेंशनरों को चेकबुक तक की सुविधा नहीं दी, जिससे पेंशनर्स को पेंशन निकालने के लिए निकासी वाउचर को भरना पड़ता है और खुद ही लाइन लगानी पड़ती है।
चेकबुक की सुविधा न मिलने से तमाम पेंशनरों को बैंक की दूसरी शाखाओं से भुगतान प्राप्त करने एवं कई कार्यों के लिए पेमेंट कर पाने की सुविधा नहीं मिल पा रही। कहीं बैंक अफसर पेंशनर के हस्ताक्षरों को दोबारा स्कैन करने से तो कहीं ज्यादा बुजुर्ग होेने का नियम बता पेंशनरों को चेकबुक, एटीएम आदि की सुविधाएं देने को टरकाने का कार्य कर रहे है।
बैंकों के यह नियम बुजुर्गों के लिए गाज बने हुए हैं। उधर, वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के महामंत्री शिवकुमार मिश्रा कहते है कि पेंशनरों को लेकर तमाम बैंकों का रवैया ठीक नहीं है। बैंकों को पेंशनरों को सम्मान के साथ पैसा जमा एवं निकासी की सुविधाएं देनी चाहिए।
शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके पेंशनरों को लाइन मुक्त बैंकिंग मुहैया कराई जानी चाहिए। उध्ार, जिला कोषाधिकारी दीपांकर शुक्ला ने कहा कि जिले में पेंशनरों की मृत्यु होने के बाद परिजनों एवं बैंक द्वारा कोषागार को सूचना न देने एवं एटीएम से पैसा निकालने से बैंकों को कड़ी एहतियात बरतने एवं एटीएम जारी करने में गौर करने के निर्देश दिए गए थे।
चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग को लेकर कहीं कोई निर्देश कोषागार स्तर से नहीं दिए गए है। पेंशनरों को चेकबुक जारी करने पर रोक नहीं है। उध्ार, स्टेट बैंक, मुख्य शाखा के मुख्य प्रबंधक एचआर पांडेय ने कहा कि हमारे यहां बैंकिंग सुविधा देने संबंधी कोई समस्या नहीं हैं, पर सुविधाएं देने से पूर्व यदि कहीं उसके दुरुपयोग की संभावना दिखती है, तो सुविधाएं देने से मना कर दिया जाता है।
ज्ञात हो कि संचार क्रांति के इस युग सबसे ज्यादा तरक्की फोन एवं बैंकिंग सेक्टर में होने के साथ ही तकनीक मजबूत हुई है, जिससे कोर बैंकिंग सेवा के साथ ही इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग, ई-पासबुक, इलेक्ट्रानिक ट्रांजेक्शन के साथ सीबीएस चेकबुक, एटीएम आदि की सेवाएं शुरू हो चुकी हैं।
पर इसके बाद भी ज्यादातर पेंशनर को तकनीकी तरक्की के रूप में बैंकों में मुहैया इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उक्त सुविधाओं की बात तो दूर कुछ बैंकों ने पेंशनरों को चेकबुक तक की सुविधा नहीं दी, जिससे पेंशनर्स को पेंशन निकालने के लिए निकासी वाउचर को भरना पड़ता है और खुद ही लाइन लगानी पड़ती है।
चेकबुक की सुविधा न मिलने से तमाम पेंशनरों को बैंक की दूसरी शाखाओं से भुगतान प्राप्त करने एवं कई कार्यों के लिए पेमेंट कर पाने की सुविधा नहीं मिल पा रही। कहीं बैंक अफसर पेंशनर के हस्ताक्षरों को दोबारा स्कैन करने से तो कहीं ज्यादा बुजुर्ग होेने का नियम बता पेंशनरों को चेकबुक, एटीएम आदि की सुविधाएं देने को टरकाने का कार्य कर रहे है।
बैंकों के यह नियम बुजुर्गों के लिए गाज बने हुए हैं। उधर, वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के महामंत्री शिवकुमार मिश्रा कहते है कि पेंशनरों को लेकर तमाम बैंकों का रवैया ठीक नहीं है। बैंकों को पेंशनरों को सम्मान के साथ पैसा जमा एवं निकासी की सुविधाएं देनी चाहिए।
शारीरिक रूप से कमजोर हो चुके पेंशनरों को लाइन मुक्त बैंकिंग मुहैया कराई जानी चाहिए। उध्ार, जिला कोषाधिकारी दीपांकर शुक्ला ने कहा कि जिले में पेंशनरों की मृत्यु होने के बाद परिजनों एवं बैंक द्वारा कोषागार को सूचना न देने एवं एटीएम से पैसा निकालने से बैंकों को कड़ी एहतियात बरतने एवं एटीएम जारी करने में गौर करने के निर्देश दिए गए थे।
चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग को लेकर कहीं कोई निर्देश कोषागार स्तर से नहीं दिए गए है। पेंशनरों को चेकबुक जारी करने पर रोक नहीं है। उध्ार, स्टेट बैंक, मुख्य शाखा के मुख्य प्रबंधक एचआर पांडेय ने कहा कि हमारे यहां बैंकिंग सुविधा देने संबंधी कोई समस्या नहीं हैं, पर सुविधाएं देने से पूर्व यदि कहीं उसके दुरुपयोग की संभावना दिखती है, तो सुविधाएं देने से मना कर दिया जाता है।