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स्कूल छोड़कर धरने पर रहे शिक्षक
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बीएसए कार्यालय में शिक्षक महासंघ के धरना प्रदर्शन को संबोधित करते प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्म?
- फोटो : HARDOI
हरदोई। सरकार बड़ी चालाकी से शिक्षकों के कार्यों में कमी निकाल समाज को गुमराह कर रही है। शिक्षकों के बुढ़ापे की लाठी पेंशन भी छीन रही है। बीएसए कार्यालय में मंगलवार को शिक्षक महासभा के धरने में मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने ये बात कही।
उन्होंने पदाधिकारियों व शिक्षकों से कहा कि शिक्षकों में तो कमियां निकाली जा रही हैं लेकिन सरकार अपनी खामियों को छिपा रही है। शिक्षकों के लिए पेंशन बुढ़ापे का सहारा है। सरकार को चाहिए कि अंतिम वेतन की 50 प्रतिशत धनराशि और अनुमन्य महंगाई भत्ता मासिक पेंशन के रूप में भुगतान करने की गारंटी दे। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बड़े दु:ख की बात है कि सूबे में एक सीएम के अलावा दो डिप्टी सीएम हैं लेकिन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त किए जा रहे हैं।
जब कोई विभाग बिना मुखिया के नहीं चल सकता तो स्कूल बिना मुखिया के कैसे चल सकते हैं। प्रदेश में लगातार शिक्षकों के पद समाप्त होते चले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं। जिलाध्यक्ष शिवशंकर पांडे ने कहा कि जिले का शिक्षक अपने अधिकार की खातिर कार्रवाइयों से डरने वाला नहीं है।
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माध्यमिक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव कुमार मिश्रा ने शिक्षा सेवा चयन आयोग की धारा 18 समाप्त करने की मांग की। धरने को अक्षत पांडे, सुबोध मिश्रा, अंतर्यामी बाजपेई, अंतराम पांडे आदि ने भी संबोधित किया। इसके बाद जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट जंगबहादुर यादव को सौंपा। इस मौके पर हरिशंकर पांडे, किसान चौरसिया, विपिन सिंह, गजेंद्र प्रताप सिंह, केबी अवस्थी, ललित शुक्ला, ब्रजेश अवस्थी, लक्ष्मी देवी, भानु प्रताप सिंह, अखिलेंद्र पांडे, अमित पांडे, रूपेश अवस्थी, पंकज त्रिपाठी, अनुराग अवस्थी, संदीप पटेल, हिमांशु श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
करीब एक लाख प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त
जिला उपाध्यक्ष अक्षत पांडे का कहना है कि जनपद ही नहीं पूरे प्रदेश में एक लाख 27 हजार प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त कर दिए गए हैं। इससे स्कूलों में जो स्टाफ शेष है, उसे समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पुरानी पेंशन बहाली प्रमुख मुद्दा
शिक्षक रूपेश अग्निहोत्री का कहना है कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग प्रमुख है। जो काफी समय से लंबित है। इसको लेकर शिक्षक आंदोलित हैं। उनका कहना है कि बिना पेंशन के शिक्षकों का भविष्य खतरे में है।
छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर मांगा
शिक्षक करुणेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि महासंघ की मांगों में छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर की भी मांग की गई है। लेकिन सरकार अभी तक शत प्रतिशत बच्चों को फर्नीचर नहीं दे सकी है।
ये हैं महासभा की मांगें
पारस्परिक स्थानांतरण में निर्धारित तीन वर्ष की अवधि को कम करने की मांग
अंतर्जनपदीय स्थानांतरण में नीतियों में बदलाव करने की मांग
प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक व प्रत्येक कक्षा में एक अध्यापक की नियुक्ति
प्रत्येक विद्यालय में सफाईकर्मी, चतुर्थश्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति
नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा व एसीपी का लाभ दिलाएं
प्रेरणा एप को वापस लें
सामूहिक बीमा की बीमित धनराशि 10 लाख रुपये करने की मांग
शासन सख्त, नहीं हो सकी तालाबंदी
महासभा के स्कूलों में तालाबंदी को लेकर शासन सख्त हो गया। सोमवार देर शाम डीएम को पत्र भेजकर निर्देशित किया गया था कि धरने के कारण स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो। ऐसा न होने पर खंड शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदार समझा जाएगा। इसको लेकर प्रशासन पूरी तरह से मंगलवार को अलर्ट रहा। जिसके चलते स्कूल खुले रहे।
शत प्रतिशत स्कूल खुले : बीएसए
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया था। जिसके कारण शत प्रतिशत स्कूल खुले। कहीं पढ़ाई बाधित नहीं हुई।
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उन्होंने पदाधिकारियों व शिक्षकों से कहा कि शिक्षकों में तो कमियां निकाली जा रही हैं लेकिन सरकार अपनी खामियों को छिपा रही है। शिक्षकों के लिए पेंशन बुढ़ापे का सहारा है। सरकार को चाहिए कि अंतिम वेतन की 50 प्रतिशत धनराशि और अनुमन्य महंगाई भत्ता मासिक पेंशन के रूप में भुगतान करने की गारंटी दे। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बड़े दु:ख की बात है कि सूबे में एक सीएम के अलावा दो डिप्टी सीएम हैं लेकिन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त किए जा रहे हैं।
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जब कोई विभाग बिना मुखिया के नहीं चल सकता तो स्कूल बिना मुखिया के कैसे चल सकते हैं। प्रदेश में लगातार शिक्षकों के पद समाप्त होते चले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं। जिलाध्यक्ष शिवशंकर पांडे ने कहा कि जिले का शिक्षक अपने अधिकार की खातिर कार्रवाइयों से डरने वाला नहीं है।
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माध्यमिक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव कुमार मिश्रा ने शिक्षा सेवा चयन आयोग की धारा 18 समाप्त करने की मांग की। धरने को अक्षत पांडे, सुबोध मिश्रा, अंतर्यामी बाजपेई, अंतराम पांडे आदि ने भी संबोधित किया। इसके बाद जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट जंगबहादुर यादव को सौंपा। इस मौके पर हरिशंकर पांडे, किसान चौरसिया, विपिन सिंह, गजेंद्र प्रताप सिंह, केबी अवस्थी, ललित शुक्ला, ब्रजेश अवस्थी, लक्ष्मी देवी, भानु प्रताप सिंह, अखिलेंद्र पांडे, अमित पांडे, रूपेश अवस्थी, पंकज त्रिपाठी, अनुराग अवस्थी, संदीप पटेल, हिमांशु श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
करीब एक लाख प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त
जिला उपाध्यक्ष अक्षत पांडे का कहना है कि जनपद ही नहीं पूरे प्रदेश में एक लाख 27 हजार प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त कर दिए गए हैं। इससे स्कूलों में जो स्टाफ शेष है, उसे समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पुरानी पेंशन बहाली प्रमुख मुद्दा
शिक्षक रूपेश अग्निहोत्री का कहना है कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग प्रमुख है। जो काफी समय से लंबित है। इसको लेकर शिक्षक आंदोलित हैं। उनका कहना है कि बिना पेंशन के शिक्षकों का भविष्य खतरे में है।
छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर मांगा
शिक्षक करुणेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि महासंघ की मांगों में छात्र-छात्राओं के लिए फर्नीचर की भी मांग की गई है। लेकिन सरकार अभी तक शत प्रतिशत बच्चों को फर्नीचर नहीं दे सकी है।
ये हैं महासभा की मांगें
पारस्परिक स्थानांतरण में निर्धारित तीन वर्ष की अवधि को कम करने की मांग
अंतर्जनपदीय स्थानांतरण में नीतियों में बदलाव करने की मांग
प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक व प्रत्येक कक्षा में एक अध्यापक की नियुक्ति
प्रत्येक विद्यालय में सफाईकर्मी, चतुर्थश्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति
नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा व एसीपी का लाभ दिलाएं
प्रेरणा एप को वापस लें
सामूहिक बीमा की बीमित धनराशि 10 लाख रुपये करने की मांग
शासन सख्त, नहीं हो सकी तालाबंदी
महासभा के स्कूलों में तालाबंदी को लेकर शासन सख्त हो गया। सोमवार देर शाम डीएम को पत्र भेजकर निर्देशित किया गया था कि धरने के कारण स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित न हो। ऐसा न होने पर खंड शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदार समझा जाएगा। इसको लेकर प्रशासन पूरी तरह से मंगलवार को अलर्ट रहा। जिसके चलते स्कूल खुले रहे।
शत प्रतिशत स्कूल खुले : बीएसए
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया था। जिसके कारण शत प्रतिशत स्कूल खुले। कहीं पढ़ाई बाधित नहीं हुई।