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स्कूल में छात्रा को बंद कर घर चले गए शिक्षक
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छात्रा अनामिका, जिसको स्कूल के कमरे में बंद कर चले गए शिक्षक। अमर उजाला
- फोटो : HARDOI
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हरियावां में जूनियर हाईस्कूल के अध्यापक घर जल्दी जाने की जद्दोजहद में विद्यालय के कक्ष में सोई 12 वर्षीय छात्रा को बंद कर चले गए। नींद खुलने पर छात्रा ने खुद को कमरे में बंद पाया तो उसने मदद के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया।
शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौकेे पर पहुंच गए और ताला तोड़कर छात्रा को बाहर निकाला। बीईओ फूलचंद्र ने कहा कि पूरे मामले की जांच करा दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हरियावां स्थित कन्या जूनियर स्कूल के प्रधानाध्यापक विनोद पाल गुरुवार को अवकाश पर थे। उनकी गैर मौजूदगी में सहायक अध्यापक प्रशांत शुक्ला के पास विद्यालय का प्रभार था।
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गुरुवार को दोपहर में विद्यालय में अध्ययनरत छात्रा अनामिका (12) पुत्री सर्वेश कुमार निवासी कोरिगवां की कक्षा में ही आंख लग गई। दोपहर लगभग एक बजे प्रशांत शुक्ला व अन्य शिक्षकों ने बिना स्कूल चेक किए ही कक्षाओं व मेन गेट में ताला डाल दिया और घर चले गए।
इधर, विद्यालय के बंद होने के पौन घंटे बाद जब अनामिका की आंख खुली तो उसने खुद को कमरे में अकेला बंद पाया। परेशान अनामिका ने मदद के लिए शोर मचाना व रोना शुरू कर दिया। विद्यालय के आस पास मौजूद लोगों ने बच्ची की रोने की आवाज सुनी तो मौके पर पहुंच गए और कक्ष का ताला तोड़कर बालिका को बाहर निकाला।
बाहर आते ही बालिका बेसुध हो गई, हालांकि कुछ ही देर बाद उसे होश आ गया। इधर बालिका के कक्ष में बंद होने की जानकारी मिलने पर मां शीला मौके पर पहुंच गई। बताया कि स्कूल बंद होने के बाद भी जब अनामिका घर नहीं पहुंची तो वह ढूंढने आई थी, लेकिन स्कूल के गेट पर ताला लगा देख वह वापस लौट गई थी।
नाराज ग्रामीणों ने पूरे मामले की शिकायत बीईओ हरियावां फूलचंद्र से की है। बीईओ फूलचंद्र ने बताया कि ग्रामीणों से इसकी जानकारी मिली है। पूरे मामले की जांच करा दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बीएसए हेमंत राव का कहना है कि अगर छात्रा को कमरे में सोते हुए शिक्षक स्कूल में ताला डालकर चले गए तो यह घोर लापरवाही है। जांच कराकर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
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शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौकेे पर पहुंच गए और ताला तोड़कर छात्रा को बाहर निकाला। बीईओ फूलचंद्र ने कहा कि पूरे मामले की जांच करा दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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हरियावां स्थित कन्या जूनियर स्कूल के प्रधानाध्यापक विनोद पाल गुरुवार को अवकाश पर थे। उनकी गैर मौजूदगी में सहायक अध्यापक प्रशांत शुक्ला के पास विद्यालय का प्रभार था।
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गुरुवार को दोपहर में विद्यालय में अध्ययनरत छात्रा अनामिका (12) पुत्री सर्वेश कुमार निवासी कोरिगवां की कक्षा में ही आंख लग गई। दोपहर लगभग एक बजे प्रशांत शुक्ला व अन्य शिक्षकों ने बिना स्कूल चेक किए ही कक्षाओं व मेन गेट में ताला डाल दिया और घर चले गए।
इधर, विद्यालय के बंद होने के पौन घंटे बाद जब अनामिका की आंख खुली तो उसने खुद को कमरे में अकेला बंद पाया। परेशान अनामिका ने मदद के लिए शोर मचाना व रोना शुरू कर दिया। विद्यालय के आस पास मौजूद लोगों ने बच्ची की रोने की आवाज सुनी तो मौके पर पहुंच गए और कक्ष का ताला तोड़कर बालिका को बाहर निकाला।
बाहर आते ही बालिका बेसुध हो गई, हालांकि कुछ ही देर बाद उसे होश आ गया। इधर बालिका के कक्ष में बंद होने की जानकारी मिलने पर मां शीला मौके पर पहुंच गई। बताया कि स्कूल बंद होने के बाद भी जब अनामिका घर नहीं पहुंची तो वह ढूंढने आई थी, लेकिन स्कूल के गेट पर ताला लगा देख वह वापस लौट गई थी।
नाराज ग्रामीणों ने पूरे मामले की शिकायत बीईओ हरियावां फूलचंद्र से की है। बीईओ फूलचंद्र ने बताया कि ग्रामीणों से इसकी जानकारी मिली है। पूरे मामले की जांच करा दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बीएसए हेमंत राव का कहना है कि अगर छात्रा को कमरे में सोते हुए शिक्षक स्कूल में ताला डालकर चले गए तो यह घोर लापरवाही है। जांच कराकर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।