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करोड़ों खर्च फिर भी सड़कें बदहाल

Mon, 16 Feb 2015 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Mon, 16 Feb 2015 12:08 AM IST
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Spending millions of impoverished even roads

करोड़ों का बजट खर्च होने के बाद भी जिले में सड़कों

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की बदहाल स्थिति है। कहीं सड़क में गड्ढा तो कहीं गड्ढे में सड़क नजर आ रही है। नगर क्षेत्र की सड़कों पर भी मरम्मत के नाम पर खेल किया गया, जिससे जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं।
बड़े अफसरों की नजर पड़ने के बाद भी इस ओर कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिसके चलते निर्माण एजेंसियों से काम कर रहे ठेकेदारों के हौसले बुलंद है। जिले में राजमार्गों एवं जिला स्तरीय मार्गों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क बनाने का काम प्रमुख रूप से जहां पीडब्ल्यूडी द्वारा किया जा रहा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में सीसी रोड बनाने का काम आरईएस द्वारा किया जा रहा है।

इसके आवास विकास, मंडी परिषद आदि द्वारा सड़कों का निर्माण कराया जाता है। इन एजेंसियों को पिछले दो वर्षो में 200 करोड़ से अधिक की धनराशि सड़कों आदि के निर्माण एवं मरम्मत तथा नवीनीकरण को मिली, जिसमें सबसे ज्यादा रकम पीडब्ल्यूडी को मिली है।

पीडब्ल्यूडी के यहां तीन स्थायी खंडोें के अलावा दो खंड प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में कार्य कर रहे हैं। इतने बडे़ पैमाने पर रकम खर्च करने के बाद भी जिले में सड़कों की बदहाल हालत जिम्मेदारों को आईना दिखाने का काम कर रही है।

सड़कों की गुणवत्ता को लेकर पिछले वर्षोें में उच्च स्तर से हुई जांचों में निकाली गई अभियंताओं एवं ठेकेदारों पर रिकवरी के मामले भी ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं और जिन पर रिकवरी निकाली गई, वे लगातार नए काम भी कर रहे है। इसको लेकर कोर्ट से स्टे होने की बात कहकर जिम्मेदार पल्ला झाड़ लेेते हैं।

उधर, सड़कों की मरम्मत एवं नवीनीकरण को हर साल आने वाले लाखों रुपये में निर्माण एजेंसियां खेल कर देती है। एक लाख तक के कार्य टेंडर मुक्त बताकर छोटे-छोटे बांड बिना टेंडर के बनाकर काम दे दिया जाता और बाद में उसी बांड पर लगातार काम बढ़ाकर लाखों का खेल कर दिया जाता है।

सूत्रों की माने तो निर्माण एजेंसियों द्वारा कई सामग्री एवं तारकोल के सप्लाई आर्डरों में भी खेल कर तारकोल को बेंच दिया जाता है। इससे ठेकेदारों को निर्धारित मात्रा से कम तारकोल दिया जाता, जिससे राजस्व गबन के साथ ही तारकोल कम होने से गुणवत्ता प्रभावित होती है।

निर्माण एजेंसियों से जुडे़ सूत्रों की माने तो जिले में कार्यरत निर्माण एजेंसियों को पिछले दो वर्षों में मिली रकम एवं कराए कार्यों की गुणवत्ता की जांच के साथ ही सड़कों की आन स्पाट मानीटरिंग कराई जाए तो पूरे खेल की पोल खुलकर सामने आ सकती है।

यह मामले तो वे है जिन पर रविवार को कैमरे की नजर में कैद हो गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की स्थित तो इससे भी ज्यादा बदहाल है। हरपालपुर से-चौंसार-अरबल जाने वाली सड़क पर पिछले दो सालों से पुनर्निर्माण का कार्य चल रहा, पर न तो निर्माण पूरा हो रहा और नहीं इस ओर कोई कार्रवाई हो रही है।

इसी तरह से पिछले दो सालों से हरदोई-सीतापुर रोड पर कोतवाली देहात के आगे और सिकरोहरी पुल के आगे करीब कुल 2 किमी की सड़क आधी-अधूरी छोड़ दी गई। इसको लेकर कई बार शिकायतें हुई, अफसरों ने कार्रवाई का आश्वासन भी दिया, पर न तो सड़क पूरी हुई और न ही इसके लिए जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई।

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