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Hardoi News: कहीं पर पैर,तो कहीं पड़ा हुआ था हाथ
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हरदोई/बघौली। हरदोई-लखनऊ मार्ग पर जयपुरिया स्कूल के पास मंगलवार की दोपहर में पलक झपकते ही दर्दनाक हादसा हो गया। दोनों वाहनों के बीच टक्कर इतनी तेज थी कि शवों के टुकड़े 100-100 मीटर की दूरी पर जा गिरे। कहीं किसी का हाथ गिरा तो कहीं पैर। पुलिस ने टुकड़े एकत्रित किए।
लखनऊ रोड पर हुए हादसे की खबर ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शहर की तरफ से जा रही कार और सामने से आ रहे ऑटो में हुई भिड़ंत की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास से गुजर रहे लोग सहम गए। जयपुरिया स्कूल के पास हादसे के बाद लोगों के शव इधर-उधर 100 मीटर की दूरी तक जाकर गिरे। कहीं पर किसी का पैर पड़ा हुआ था तो कहीं पर किसी का हाथ।
ऑटो तो करीब डेढ़ से 200 मीटर की दूरी पर जा गिरा। कार के आगे का हिस्सा पूरी तक गायब हो गया। हाईवे पर बिखरे हुए शव और वहां चीखने-चिल्लाने की आवाज से आम लोग भी कराह उठे। शवों के बिखरे हुए टुकड़ों को उठाने में पुलिस तक के हाथ कांप गए।
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करीब डेढ़ घंटे हाईवे पर रही अफरा-तफरी
हरदोई-लखनऊ हाईवे पर हुए दर्दनाक हादसे से वहां करीब डेढ़ घंटे तक अफरा-तफरी रही। हादसे से इधर-उधर से आने-जाने वाली गाड़ियों के पहिये थम गए। वहां जाम जैसे हालात पैदा हो गए। इस बीच वहां पहुंची पुलिस ने पहले तो सड़क पर बिखरे हुए शवों को किसी तरह अपने कब्जे में लिया और उसके बाद इकट्ठा हुई भीड़ को हटा कर वहां चक्का जाम किए खड़ी गाड़ियों को रास्ता खुलवाया। उसके बाद यातायात बहाल हो सका।
हादसे ने हरे कर दिए 1998 के जख्म
लखनऊ रोड पर हुए दर्दनाक हादसे ने 1998 में हुए उस ट्रेन हादसे के जख्म को हरा कर दिया, जिसमें हादसे के बाद इसी तरह शव के दूर-दूर तक टुकड़ों में बिखरे हुए थे। 1998 में करना-मसीत रेलवे स्टेशन के पास काशी-विश्वनाथ एक्सप्रेस और मालगाड़ी में आमने-सामने टक्कर होने से सैकड़ों लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। वहां भी कुछ इसी तरह शव इधर-उधर बिखरे हुए पड़े हुए थे।
चला गया घर का खेवनहार
बघौली थाना के अंड़गापुर निवासी राजबहादुर ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा था। उसके 20 वर्षीय पुत्री साक्षी है, जिसकी अभी शादी भी नहीं हुई थी। एक पुत्र था, जिसकी चार वर्ष पहले ही मौत हो चुकी थी। घर में सिर्फ राजबहादुर ही परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। अब हादसे में राजबहादुर की मौत से घर का खेवनहार चला गया।
मां-बेटी ने साथ-साथ तोड़ा दम
हरिशंकर की पत्नी रामदुलारी (38) मंगलवार की सुबह ऑटो रिक्शा से तीन वर्षीय पुत्री हर्षिता व सात वर्षीय पुत्र अनुराग को लेकर दवा लेने के लिए हरदोई जा रही थी। रास्ते में कार की टक्कर लगने से रामदुलारी वह हर्षिता की मौत हो गई। रामदुलारी का शव कई टुकड़ों में बंट गया। रामदुलारी के दो पुत्र अनुराग व अनमोल व पुत्री अनन्या हैं। हादसे में अनुराग घायल हुआ है और हर्षिता की मौत हो चुकी है।
मजदूरी करके परिवार का पोषण करता था श्याम
सुरसा थाना के भटपुरवा निवासी श्याम सिंह (40) का एक पुत्र शिवा, पुत्री रागनी व मानवी हैं। मजदूरी करके परिवार की परवरिश करता था। श्याम सिंह की मौत से परिजनों के आगे मुसीबत खड़ी हो गई है कि अब छोटे-छोटे बच्चों की परवरिश कैसे होगी।
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लखनऊ रोड पर हुए हादसे की खबर ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शहर की तरफ से जा रही कार और सामने से आ रहे ऑटो में हुई भिड़ंत की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास से गुजर रहे लोग सहम गए। जयपुरिया स्कूल के पास हादसे के बाद लोगों के शव इधर-उधर 100 मीटर की दूरी तक जाकर गिरे। कहीं पर किसी का पैर पड़ा हुआ था तो कहीं पर किसी का हाथ।
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ऑटो तो करीब डेढ़ से 200 मीटर की दूरी पर जा गिरा। कार के आगे का हिस्सा पूरी तक गायब हो गया। हाईवे पर बिखरे हुए शव और वहां चीखने-चिल्लाने की आवाज से आम लोग भी कराह उठे। शवों के बिखरे हुए टुकड़ों को उठाने में पुलिस तक के हाथ कांप गए।
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करीब डेढ़ घंटे हाईवे पर रही अफरा-तफरी
हरदोई-लखनऊ हाईवे पर हुए दर्दनाक हादसे से वहां करीब डेढ़ घंटे तक अफरा-तफरी रही। हादसे से इधर-उधर से आने-जाने वाली गाड़ियों के पहिये थम गए। वहां जाम जैसे हालात पैदा हो गए। इस बीच वहां पहुंची पुलिस ने पहले तो सड़क पर बिखरे हुए शवों को किसी तरह अपने कब्जे में लिया और उसके बाद इकट्ठा हुई भीड़ को हटा कर वहां चक्का जाम किए खड़ी गाड़ियों को रास्ता खुलवाया। उसके बाद यातायात बहाल हो सका।
हादसे ने हरे कर दिए 1998 के जख्म
लखनऊ रोड पर हुए दर्दनाक हादसे ने 1998 में हुए उस ट्रेन हादसे के जख्म को हरा कर दिया, जिसमें हादसे के बाद इसी तरह शव के दूर-दूर तक टुकड़ों में बिखरे हुए थे। 1998 में करना-मसीत रेलवे स्टेशन के पास काशी-विश्वनाथ एक्सप्रेस और मालगाड़ी में आमने-सामने टक्कर होने से सैकड़ों लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। वहां भी कुछ इसी तरह शव इधर-उधर बिखरे हुए पड़े हुए थे।
चला गया घर का खेवनहार
बघौली थाना के अंड़गापुर निवासी राजबहादुर ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा था। उसके 20 वर्षीय पुत्री साक्षी है, जिसकी अभी शादी भी नहीं हुई थी। एक पुत्र था, जिसकी चार वर्ष पहले ही मौत हो चुकी थी। घर में सिर्फ राजबहादुर ही परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। अब हादसे में राजबहादुर की मौत से घर का खेवनहार चला गया।
मां-बेटी ने साथ-साथ तोड़ा दम
हरिशंकर की पत्नी रामदुलारी (38) मंगलवार की सुबह ऑटो रिक्शा से तीन वर्षीय पुत्री हर्षिता व सात वर्षीय पुत्र अनुराग को लेकर दवा लेने के लिए हरदोई जा रही थी। रास्ते में कार की टक्कर लगने से रामदुलारी वह हर्षिता की मौत हो गई। रामदुलारी का शव कई टुकड़ों में बंट गया। रामदुलारी के दो पुत्र अनुराग व अनमोल व पुत्री अनन्या हैं। हादसे में अनुराग घायल हुआ है और हर्षिता की मौत हो चुकी है।
मजदूरी करके परिवार का पोषण करता था श्याम
सुरसा थाना के भटपुरवा निवासी श्याम सिंह (40) का एक पुत्र शिवा, पुत्री रागनी व मानवी हैं। मजदूरी करके परिवार की परवरिश करता था। श्याम सिंह की मौत से परिजनों के आगे मुसीबत खड़ी हो गई है कि अब छोटे-छोटे बच्चों की परवरिश कैसे होगी।