फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   So will the black market in fertilizer breakup !

तो कालाबाजारी कर करेंगे खाद में गोलमाल!

Mon, 19 Oct 2015 11:04 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरदोई Updated Mon, 19 Oct 2015 11:04 PM IST
विज्ञापन
So will the black market in fertilizer breakup !
पंचायत चुनावों में जुटी सरकारी मशीनरी को खबर ही नहीं है कि रबी का सीजन
विज्ञापन
शुरू हो चुका है और खाद की मांग तेजी पकड़ेगी। खास तौर से जब गेहूं की बुवाई शुरू होगी तो एक साथ बड़ी तादाद में किसान सरकारी से लेकर निजी दुकानों पर लाइन लगाए दिखाई पड़ेेंगे । बीते वर्षों में डीएपी खाद की किल्लत से परेशान होकर किसानों को रात-रात

भर लाइन में लगना पड़ा है। इससे अगर सबक न लिया गया तो फिर अव्यवस्थाओं का जाल हट नहीं पाएगा और कालाबाजारी करने वाले गोलमाल करेंगेे । बताते चलें कि रबी की फसलों का रकबा हर साल करीब 3 लाख 60 हजार हेक्टेयर के आसपास रहता है।  इसमें करीब तीन लाख हेक्टेयर में गेहूं होता है। शेष क्षेत्रफल में आलू, गन्ना, सरसों,

लाही, दलहन आदि फसलें होती है। इनके लिए उर्वरक में यूरिया 67000 एमटी, डीएपी 32000 एमटी व अन्य 11000 एमटी की मांग रहती है। सबसे ज्यादा परेशानी एवं किल्लत डीएपी की रहती है। समस्या तब बढ़ती है जब गेहूं की बुवाई शुरू होती है। अभी गेहूं की बुवाई शुरू तो नहीं है मगर इसके लिए तैयारी के साथ किसानों ने खाद, बीज के लिए

पैसों का इंतजाम शुरू कर दिया है। किसान तो रबी फसल की तैयारी में जुट गए हैं लेकिन संबंधित जिम्मेदार खाद की उपलब्धता की निरंतरता बनाए रखने के लिए तैयारियां नहीं कर रहे हैं।  

प्रमुख खाद सेंटरों पर व्यवस्थाएं
एग्रो खाद सेंटर : यूरिया खाद 50 एमटी, डीएपी 150 एमटी उपलब्ध  
एग्रो प्रभारी रमेश कुमार कहते है कि खाद की उपलब्धता आवंटन एवं पैसे की उपलब्धता पर निर्भर है। जिसके लिए लखनऊ रीजनल आफिस से निर्णय लिया जाता है। उनके सहित कर्मचारी पंचायत चुनाव ड्यूटी में हैं। वे कार्यालय आकर खाद वितरण की व्यवस्थाएं करा रहे हैं।

क्रय विक्रय समिति : यूरिया खाद 1511 बोरी, एनपीके 191 बोरी, डीएपी 229 बोरी उपलब्ध । समिति के विक्रय कर्मचारी केके मिश्रा ने बताया कि खाद की उपलब्धता अभी ठीक है। इसी समिति के पड़ोस में एक अन्य सहकारी समिति का भी कार्यालय है मगर वहां पर ताला लटका हुआ है। इस तरह से तमाम समितियों में ताला लटक रहा है। ऐसे में खाद उपलब्धता एवं वितरण पर सवालिया निशान है।

पचास फीसदी से अधिक समितियों पर ताले
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 230 खाद विक्रय सेंटर सरकारी और सहकारी हैं। परंतु इन सेंटरों में से 50 फीसदी से ज्यादा स्थानों पर ताले लटक रहे हैं। करीब 90 समितियां कार्यरत हैं, वहां भी अभी ताले हैं। अभी पता ही नहीं है कि

किसानों को कहां-कहां किन-किन समितियों से खाद उपलब्ध हो सकेगी। खास बात यह है कि जिले में 250 से अधिक खाद की दुकानें निजी क्षेत्र की हैं। निजी क्षेत्र में खाद वितरण को लेकर भी पारदर्शिता के दावों के बीच खाद उपलब्धता के विवरण सार्वजनिक नहीं है।

वर्जन
यह सही है कि रबी की फसलों का सीजन शुरू हो चुका है मगर मुख्य रूप से मांग में रहने वाली डीएपी की खाद की मांग नवंबर माह में गेहूं की बुवाई के तेज होने के साथ बढ़ेगी। इसके लिए कार्ययोजना बना कर कार्य किया जा रहा है। खाद की कालाबाजारी नहीं होने दी जाएगी। किसानों को आसानी से खाद उपलब्ध हो इसके लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई जाएगी ।  -बृजेश चंद्रा, डीडी कृषि 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed