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छठे स्वरूप कात्यायनी देवी की पूजा, देवी मंदिरों में दिन भर उमड़ते रहे श्रद्धालु
ब्यूरो/ अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 19 Oct 2015 11:19 PM IST
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शारदीय नवरात्र के सातवें दिन सोमवार को देवी के छठे स्वरूप मां कात्यायनी
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की पूजा की गई। घरों से लेकर मंदिरों तक पूजन-कीर्तन का दौर जारी रहा।
मंदिरों में जहां पूजन को लेकर श्रद्धालुओं की कतारें सुबह से लेकर देर शाम
तक लगी रहीं तो वहीं ढोलक ों की थाप पर जयकारे भी चहुंओर गूंज रहे हैं।
बहरहाल मंदिर हो या घर अब हर जगह सिर्फ मां और
मां के ही गगनभेदी जयकारे सुनने को मिल रहे हैं। शास्त्र के जानकारों के मुताबिक एक बार कात्यायन ऋषि ने तप करके देवी से वरदान मांगा कि मेरे कुल में पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी को अजन्मा माना गया है। ऋषि कात्यायन की प्रसन्नता के लिए देवी ने अजन्मा रूप त्याग कर ऋषि कुल में पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसी कारण माता का नाम
कात्यायनी पड़ा। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि सामान्य रूप से पुत्री का गोत्र पिता से अधिक पति के गोत्र से चलता है लेकिन यहां तो देवी सदा सर्वदा के लिए पिता के गोत्र कात्यायन से जुड़ गई। उन्होंने बताया कि इस रात जागरण और जप करने से साधक को सहज ही माता कात्यायनी की कृपा का लाभ मिलता है।
इधर, मां संतोषी माता मंदिर, फूलमती मंदिर, श्रवण देवी मंदिर सहित समस्त शहर के मंदिरों में मां का पूजन बड़े ही श्रद्धापूर्वक किया गया। देर शाम तक घंटे घड़ियालों के बीच मां के जयकारे वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे। त्रिनेत्र फाउंडेशन समिति के तत्वावधान मेें नई बस्ती पंजाबी कालोनी में लगे मां के पंडाल में षष्ठी देवी का पूजन विधि विधान
से किया गया। उसके बाद भव्य आरती की गई। इस मौके पर आनंद दीक्षित, अमृत गुप्ता , महेश मिश्रा, अभिषेक मल्होत्रा, आकाश गुप्ता आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में ग्राम चचरापुर में मूर्ति स्थापित होने के बाद पूजन किया गया।
मां के ही गगनभेदी जयकारे सुनने को मिल रहे हैं। शास्त्र के जानकारों के मुताबिक एक बार कात्यायन ऋषि ने तप करके देवी से वरदान मांगा कि मेरे कुल में पुत्री के रूप में जन्म लें। देवी को अजन्मा माना गया है। ऋषि कात्यायन की प्रसन्नता के लिए देवी ने अजन्मा रूप त्याग कर ऋषि कुल में पुत्री के रूप में जन्म लिया। इसी कारण माता का नाम
कात्यायनी पड़ा। शास्त्री उमाकांत अवस्थी का कहना है कि सामान्य रूप से पुत्री का गोत्र पिता से अधिक पति के गोत्र से चलता है लेकिन यहां तो देवी सदा सर्वदा के लिए पिता के गोत्र कात्यायन से जुड़ गई। उन्होंने बताया कि इस रात जागरण और जप करने से साधक को सहज ही माता कात्यायनी की कृपा का लाभ मिलता है।
इधर, मां संतोषी माता मंदिर, फूलमती मंदिर, श्रवण देवी मंदिर सहित समस्त शहर के मंदिरों में मां का पूजन बड़े ही श्रद्धापूर्वक किया गया। देर शाम तक घंटे घड़ियालों के बीच मां के जयकारे वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे। त्रिनेत्र फाउंडेशन समिति के तत्वावधान मेें नई बस्ती पंजाबी कालोनी में लगे मां के पंडाल में षष्ठी देवी का पूजन विधि विधान
से किया गया। उसके बाद भव्य आरती की गई। इस मौके पर आनंद दीक्षित, अमृत गुप्ता , महेश मिश्रा, अभिषेक मल्होत्रा, आकाश गुप्ता आदि मौजूद रहे। इसी क्रम में ग्राम चचरापुर में मूर्ति स्थापित होने के बाद पूजन किया गया।