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शिक्षकों ने 2005 से मांगी पुरानी पेंशन
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Sat, 06 Feb 2016 01:36 AM IST
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उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के बैनर तले पदाधिकारियों व शिक्षकों ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर वर्ष 2005 से पुरानी पेंशन लागू कराने की मांग की। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सिटी मजिस्ट्रेट जितेंद्र मोहन को सौंपा गया।
कलेक्ट्रेट परिसर में अध्यक्ष सुनीता त्यागी ने कहा कि प्रदेश के बेसिक शिक्षकों के बुढ़ापे का सहारा पेंशन अप्रैल 2005 से तत्कालीन सरकार में वर्ष 2003 में समाप्त कर दी गई थी। फंड और पेंशन बंद हो जाने के कारण सेवानिवृत्त के उपरांत शिक्षकों की रोजी रोटी का कोई भी सहारा नहीं रहा। इसलिए पुरानी पेंशन शिक्षकों को वर्ष 2005 से फिर से प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सदस्य विधान परिषद के निर्वाचन में माध्यमिक विद्यालयों के सहायता प्राप्त शिक्षकों को व वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को चुनाव लड़ने व मत देने का अधिकार निर्वाचन आयोग से प्रदत्त है। जबकि उपरोक्त शिक्षकों की योग्यता स्नातक है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि बेसिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को वेतन का भुगतान राजकोष से किया जाता है इसे समानता के आधार पर दिया जाए। दोहरे मापदंड के कारण प्रदेश के लाखों बेसिक शिक्षक आक्रोशित है। महामंत्री संतोष अगिभनहोत्री ने कहा कि मृतक शिक्षकों के आश्रितों को योग्यतानुसार अप्रशिक्षित शिक्षक के पद पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की जाए।
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नियुक्ति के उपरांत विभागीय आधार पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। साथ ही बीएड प्रशिक्षण प्राप्त व शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके, मृतक आश्रितों के भारत सरकार से प्रदेश सरकार को शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए निर्देशित किया जाए। दिए गए ज्ञापन में उक्त के अलावा 26 फरवरी को जंतर मंतर नई दिल्ली पर विशाल धरना प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी गई। इस मौके पर कोषाध्यक्ष उदय शंकर मिश्र सहित काफी संख्या में पदाधिकारी व शिक्षक मौजूद रहे।
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कलेक्ट्रेट परिसर में अध्यक्ष सुनीता त्यागी ने कहा कि प्रदेश के बेसिक शिक्षकों के बुढ़ापे का सहारा पेंशन अप्रैल 2005 से तत्कालीन सरकार में वर्ष 2003 में समाप्त कर दी गई थी। फंड और पेंशन बंद हो जाने के कारण सेवानिवृत्त के उपरांत शिक्षकों की रोजी रोटी का कोई भी सहारा नहीं रहा। इसलिए पुरानी पेंशन शिक्षकों को वर्ष 2005 से फिर से प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सदस्य विधान परिषद के निर्वाचन में माध्यमिक विद्यालयों के सहायता प्राप्त शिक्षकों को व वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को चुनाव लड़ने व मत देने का अधिकार निर्वाचन आयोग से प्रदत्त है। जबकि उपरोक्त शिक्षकों की योग्यता स्नातक है।
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जिलाध्यक्ष ने कहा कि बेसिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को वेतन का भुगतान राजकोष से किया जाता है इसे समानता के आधार पर दिया जाए। दोहरे मापदंड के कारण प्रदेश के लाखों बेसिक शिक्षक आक्रोशित है। महामंत्री संतोष अगिभनहोत्री ने कहा कि मृतक शिक्षकों के आश्रितों को योग्यतानुसार अप्रशिक्षित शिक्षक के पद पर अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति की जाए।
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नियुक्ति के उपरांत विभागीय आधार पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। साथ ही बीएड प्रशिक्षण प्राप्त व शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके, मृतक आश्रितों के भारत सरकार से प्रदेश सरकार को शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए निर्देशित किया जाए। दिए गए ज्ञापन में उक्त के अलावा 26 फरवरी को जंतर मंतर नई दिल्ली पर विशाल धरना प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी गई। इस मौके पर कोषाध्यक्ष उदय शंकर मिश्र सहित काफी संख्या में पदाधिकारी व शिक्षक मौजूद रहे।