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फटी रजाई में सिकुड़ रहीं कस्तूरबा की छात्राएं
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Sat, 20 Dec 2014 12:04 AM IST
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संडीला तहसील क्षेत्र के पांच ब्लाकों में स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में बदहाल स्थिति से जूझ रही छात्राएं अब आजिज आ चुकी हैं। आलम यह है कि कहीं बिस्तर का टोटा है, तो कहीं फटी रजाइयों से काम चलाना पड़ा रहा है। टूटी खिड़कियों से आने वाली सर्द हवाओें के चलते छात्राएं रात में ठंड से ठिठुर जाती हैं।
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बेहंदर में तो खाने के बर्तनों की कमी से छात्राएं जूझ रहीं है। हैरत की बात है कि इस स्कूल में शौचालय के दरवाजे भी टूटे पड़े, ऐसे में छात्राओं को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा। महकमे के अफसरों को जानकारी होने के बावजूद कोई सुधार होता नजर नहीं आ रहा। संडीला स्थित स्कूल में बिजली न आने पर छात्राओं को अंधेरे में जूझना पड़ता है। यहां लगे जनरेटर को डेढ़ घंटे ही चलाने की इजाजत है, ऐसे में बाकी वक्त छात्राओें को अंधेरे मेें गुजारना पड़ता। स्कूल में फटी रजाई और बदहाल गद्दे से काम चलाया जा रहा है।
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ऐसे मेें तख्त टूटे होने से कुछ छात्राओं को जमीन पर भी लेटना पड़ता है। अफसरों के खौफ से स्कूल में शुक्रवार को इस विद्यालय में प्रतिनिधि को अंदर जाने नहीं दिया गया। कुछ बालिकाओं ने बताया कि जिस कमरे में सोते हैं, वहां की खिड़कियां टूटी है। रात मेें सर्द हवाओं से कंपकंपी छूट जाती। हैरत की बात है कि छात्राओं की समस्या पर कोई ध्यान नहीं देना चाह रहा। उधर, वार्डन अनुजा दीक्षित ने कहा कि रजाई गद्दों की डिमांड भेजी गई है।
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उधर, बेहंदर के स्कूल के किचन में बर्तनों का टोटा है। यहां बने शौचालय के दरवाजे टूट रहे हैं, ऐसे में पर्दा डालकर किसी तरह काम चलाया जाता। यहां भी रजाई गद्दे पुराने हैं, जो जीर्णशीर्ण हालत में पहुुंच गए, पर टूटी खिड़कियों से आ ही सर्द हवाएं छात्राओं को तंग कर रही है। अतरौली के स्कूल की छात्राएं बिजली, पानी और बिस्तर की समस्याओं से जूझ रही हैं।
इन छात्राओं को न तो अभी तक स्वेटर, इनर व स्कार्फ मिले न ही यहां पर रजाई गद्दों का इंतजाम हुआ। आज भी फटेहाल बिस्तर से छात्राएं गुजारा कर रही है। खिड़कियों के शीशे टूटे होने से सर्द हवाएं यहां भी छात्राओें को परेशान कर रहीं, जबकि कछौना के स्कूल में कड़ाके की ठंड के बावजूद यहां की छात्राएं के लिए बिस्तर का इंतजाम ठीक नहीं किया गया। फटे गद्दे व रजाई से वह किसी तरह काम चला रही हैं।
खिड़की में लगे शीशे टूटे होने से उन पर गत्ता लगा व कपड़े डालकर सर्द हवाओं को रोेकने की कोशिश की गई है, पर उनके हटते ही वह ठंड से सिहर जाती है। वार्डन कीर्ति द्विवेदी ने बताया कि ऊनी कपड़े व रजाई गद्दे के लिए डिमांड भेजी गई है। आते ही मुहैया कराए जाएंगे। उधर, बेनीगंज के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूल में रजाई गद्दे और तकिया तक बदहाल है। जिसके लिए विभागीय अफसरों को डिमांड भेजी गई, पर सर्दी शुरू होने के बावजूद रजाई गद्दे नहीं आए और न ही छात्राओं को ऊनी वस्त्र अभी तक दिए गए हैं।
वार्डन अर्चना त्रिपाठी ने बताया कि इस संबंध में पत्र भेजा गया है, आते ही छात्राओं को मुहैया कराए जाएंगे।
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जान जोखिम में डालकर रह रहीं छात्राएं
अतरौली। कुछ समय पहले बनकर तैयार हुआ कस्तूरबा गांधी स्कूल की अतिरिक्त कक्षाओं की छतों में दरार आ गई और बीम भी चटक गई। यह बिल्डिंग की गुणवत्ता का स्तर बताने को काफी है। वहीं एक अतिरिक्त कक्ष की छत पर चटकी है, जिसके नीचे छात्राओं को बैठना पड़ता।
इधर, बेहंदर स्थिति स्कूल की बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है। सहायक अभियंता ने निरीक्षण कर इसकी रिपोर्ट भी भेज दी, पर बदलवाने की व्यवस्था नहीं की गई। आलम यह है कि बारिश होने पर यहां पानी टपकता है, जिससे छात्राओं व स्टाफ को दिक्कत का सामना करना पड़ता।
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पेयजल को लगे हैंडपंप भी खराब पड़े
अतरौली/कछौना। दोनों ही क्षेत्रों में स्थित कस्तूरबा स्कूलों में पेयजल के लिए लगाए गए हैंडपंप व सोलर लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे जहां पेयजल के लिए छात्राओें को परेशान होना पड़ता है, वहीं रात में परिसर में अंधेरा होने से वह दहशत में रहती है। जिम्मेदारों ने बताया कि इस समस्या से अफसरों को अवगत कराया गया है।
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‘कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में बिस्तरों की समस्या को देखते हुए डीएम के माध्यम से शासन को डिमांड भेजी गई थी। जिनमें 13 स्कूलों की धनराशि स्वीकृ त हुई है। शेष 7 स्कूलों के लिए पुन: रिमांइडर भेजा जा रहा है। जल्द ही स्कूलों को रजाई गद्दे मुहैया कराए जाएंगे। ऊनी वस्त्रों को वितरण करने के निर्देश दिए हैं।’ डा. बृजेश मिश्रा, बीएसए
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‘कस्तूरबा गांधी स्कूलों में पढ़ रही छात्राओं को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करने दिया जाएगा। वह स्वयं क्षेत्र के स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगी। खामियां मिलने पर उसकी रिपोर्ट प्रदेश व केंद्र सरकार को भेजेंगी। जिससे व्यवस्था में सुधार हो।’ डा. अंजू बाला, सांसद