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पत्थर से मिट गया शहीद आबिद का नाम

Mon, 25 Jul 2016 11:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई Updated Mon, 25 Jul 2016 11:54 PM IST
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Shaheed Abid name erased from stone
शहीद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

पाली (हरदोई)। कारगिल युद्ध में शहीद हुए नगर के लाल आबिद का नाम पत्थर से मिट गया है। कब्र के आसपास झाड़ियां उगी हैं और गंदगी भी पसरी है। 26 जुलाई को देश कारगिल विजय दिवस मनाएगा। ये विजय हमें आबिद जैसे जांबाजों की वजह से मिली थी लेकिन हमारे प्रशासन को उस वीर की कब्र की सफाई की भी फुरसत नहीं है।

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पाली के मोहल्ला काजी सराय निवासी गफ्फार खान का बेटा आबिद एक जुलाई 1999 में कारगिल युद्ध में शहीद हुआ था। 12 जुलाई 1999 को शहीद का शव नगर आने पर अंतिम दर्शन के लिए लोग जुटे थे। काजी सराय मोहल्ले में शव दफन किया गया। बाद में इस मोहल्ले का नाम भी आबिद नगर कर दिया गया। कब्र के पास शहीद आबिद नाम का पत्थर का बोर्ड भी लगवाया गया था। नगर पालिका की लापरवाही के कारण कब्र के पास लगे पत्थर से शहीद आबिद का नाम मिट गया है और कब्र के आसपास गंदगी पसरी है।
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नगर पालिका के चेयरमैन रिजवान खान वैसे तो आबिद को अपना बचपन का दोस्त होने का दावा करते हैं, लेकिन उन्हें दोस्त की कब्र तक देखने की फुरसत नहीं है।

उग्रवादियों से मोर्चा लेने में मिला था मेडल
1988 को आबिद जबलपुर में 22 ग्रिनेडियर में भर्ती हुए थे। पहली पोस्टिंग डलहौजी में हुई। दो साल बाद आबिद का फिरदौस बेगम से निकाह हो गया। कई उग्रवादियों को मारने पर 1995 में मेडल भी दिया गया था। 1999 में बकरीद पर आबिद छुट्टी लेकर घर आए थे। इस बार वह 19 दिन परिवार के साथ रहे। इसी बीच बुलावा आ गया और देश की शान में जान दे दी। पत्नी फिरदौस से जाते समय आबिद कह गए थे कि अपना और बच्चों का ख्याल रखना। अगर मैं न आऊं तो शहीद की बीवी बनकर समाज में सिर ऊंचा रखना। पति के वो अंतिम शब्द फिरदौस की धरोहर हैं।
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बेटे में भी है जोश
आबिद के बेटे में भी देश के प्रति जोश है। कश्मीर के हालात पर शहीद आबिद का बेटा आदिल सरकार के नरम रुख से खफा है। आदिल का कहना है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। मेज पर वार्ता नहीं अब सीमा पर बंदूकों की भाषा में बात होनी चाहिए। शहीद की पत्नी फिरदौस ने कहा कि कश्मीरियों को सोचना चाहिए उनका हित भारत में ही सुरक्षित है। पाक सिर्फ कश्मीरियों का इस्तेमाल कर रहा है। पिता गफ्फार खां ने कहा कि भारत के मुसलमान देश के प्रति वफादार हैं। वह समय आने पर मुल्क के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं।


वर्जन
मुझे पाली के शहीद और कब्र की जानकारी नहीं है। अब आपने बताया है। अभी मीटिंग में जा रहा हूं। अधिकारियों से इसकी जानकारी लूंगा। कब्र के पास अगर गंदगी है तो उसे साफ करवाया जाएगा और पत्थर पर शहीद का नाम भी स्पष्ट अक्षरों में लिखवाया जाएगा। - अशोक शुक्ला, एसडीएम और प्रभारी ईओ

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