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खून के खेल में बवाल, नाली में बहाया
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हरदोई। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में खून के खेल में कर्मचारियों के बीच पिछले दिनों बवाल हो गया। गुस्से में आपा खोए कर्मचारियों ने जिंदगी बचाने वाले खून को नाली में बहा दिया। मामले को लेकर अस्पताल के कर्मी दबी जुबान तमाम तरह की चर्चा कर रहे हैं।
गंभीर बात यह है कि ब्लड बैंक के जिम्मेदार दोषियों को बचाने के लिए मामले को लगातार दबा रहे हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता ने मामला संज्ञान में होने की व जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
जिला अस्पताल मेें ब्लड बैंक है। इससे जिला अस्पताल से लेकर सभी निजी अस्पतालों में मरीजों की खून की आपूर्ति की जाती है, लेकिन ब्लड बैंक कर्मचारियों के खेल का शिकार हो रही है।
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अस्पताल सूत्रों का कहना है कि पिछले शुक्रवार को सुबह करीब 11 बजे ब्लड बैंक में रुपये के लेनदेन को लेकर दो कर्मचारियों में विवाद हो गया। ब्लड बैंक के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों ने आपसी विवाद में चार यूनिट खून नाली में बहा दिया।
मामला अचानक सुर्खियों में आने के बाद ब्लड बैंक में अफरातफरी मची है, लेकिन अभी तक जिम्मेदारों ने संज्ञान नहीं लिया है, जिससे नाली में बहाए खून के दागों को जिम्मेदार धुलाकर पर्दा डालने के प्रयास में जुटे हैं।
अभी तक कर्मचारियों पर कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा है। जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में जरूरतमंदों के खून से खेल किया जाता है। खून के बदले खून दिए जाने के नियम बने हैं।
सूत्रों के मुताबिक ब्लड बैंक में खून के बदले खून लेने आने वाले जरूरतमंदों से ब्लड डोनेट करते समय नियमानुसार दो सौ एमएल की बजाय तीन सौ एमएल ब्लड निकाला जाता है।
इसकेे बाद उससे दो यूनिट तैयार किया जाता है, जिससे साफ है कि जरूरतमंद को आधा ही ब्लड दिया जा रहा है। उधर, ब्लड बैंक में जरूरतमंदों के खून से कर्मचारी जेबें भर रहे हैं।
यहां पर जरूरतमंदों को खुद का खून बिना रुपये के नहीं मिल पा रहा है। लोगों के मुुताबिक, जरूरतमंदों को कर्मचारी 8000 से 10,000 रुपये लेकर एक यूनिट ब्लड दे रहे हैं। यहां के जिम्मेदार भी जानते हुए भी मामले से अनजान बने हुए हैं।
ब्लड बैंक में इस तरह की घटना होने का मामला संज्ञान में आया है, लेकिन सीएमएस की तरफ से अभी तक सूचना नहीं दी गई है। अगर इस तरह की घटना हुई है, तो जांच कराकर दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कालेज
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गंभीर बात यह है कि ब्लड बैंक के जिम्मेदार दोषियों को बचाने के लिए मामले को लगातार दबा रहे हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. वाणी गुप्ता ने मामला संज्ञान में होने की व जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
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जिला अस्पताल मेें ब्लड बैंक है। इससे जिला अस्पताल से लेकर सभी निजी अस्पतालों में मरीजों की खून की आपूर्ति की जाती है, लेकिन ब्लड बैंक कर्मचारियों के खेल का शिकार हो रही है।
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अस्पताल सूत्रों का कहना है कि पिछले शुक्रवार को सुबह करीब 11 बजे ब्लड बैंक में रुपये के लेनदेन को लेकर दो कर्मचारियों में विवाद हो गया। ब्लड बैंक के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों ने आपसी विवाद में चार यूनिट खून नाली में बहा दिया।
मामला अचानक सुर्खियों में आने के बाद ब्लड बैंक में अफरातफरी मची है, लेकिन अभी तक जिम्मेदारों ने संज्ञान नहीं लिया है, जिससे नाली में बहाए खून के दागों को जिम्मेदार धुलाकर पर्दा डालने के प्रयास में जुटे हैं।
अभी तक कर्मचारियों पर कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा है। जिला अस्पताल की ब्लड बैंक में जरूरतमंदों के खून से खेल किया जाता है। खून के बदले खून दिए जाने के नियम बने हैं।
सूत्रों के मुताबिक ब्लड बैंक में खून के बदले खून लेने आने वाले जरूरतमंदों से ब्लड डोनेट करते समय नियमानुसार दो सौ एमएल की बजाय तीन सौ एमएल ब्लड निकाला जाता है।
इसकेे बाद उससे दो यूनिट तैयार किया जाता है, जिससे साफ है कि जरूरतमंद को आधा ही ब्लड दिया जा रहा है। उधर, ब्लड बैंक में जरूरतमंदों के खून से कर्मचारी जेबें भर रहे हैं।
यहां पर जरूरतमंदों को खुद का खून बिना रुपये के नहीं मिल पा रहा है। लोगों के मुुताबिक, जरूरतमंदों को कर्मचारी 8000 से 10,000 रुपये लेकर एक यूनिट ब्लड दे रहे हैं। यहां के जिम्मेदार भी जानते हुए भी मामले से अनजान बने हुए हैं।
ब्लड बैंक में इस तरह की घटना होने का मामला संज्ञान में आया है, लेकिन सीएमएस की तरफ से अभी तक सूचना नहीं दी गई है। अगर इस तरह की घटना हुई है, तो जांच कराकर दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कालेज