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रिश्तों में तकरार बहुत है, पर...
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Fri, 06 Feb 2015 12:07 AM IST
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सीएसएन कालेज के स्वर्ण जयंती समारोह में बीती रात
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अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा में दूर दराज से आए कवि व शायरों ने
रचनाओं से लोगों को खूब गुदगुदाया। इस मौके पर डीएम रमेश मिश्र ने कवियों
को अंगवस्त्र और प्राचार्य डा. नरेश चंद्र शुक्ल ने स्मृति चिन्ह देकर
सम्मानित किया।
इसी के साथ दो दिवसीय समारोह का समापन हो गया। उद्घाटन डीएम रमेश मिश्र ने किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत कवियित्री योगिता चौहान ने सरस्वती वंदना से की। राष्ट्रीय कवि डा. शिव ओम अंबर ने पंक्तियां पेश की ‘लफ्जों में टंकार बिठा लहजे में खुद्दारी रख, जीने की ख्वाहिश है तो मरने की तैयारी रख।
बाराबंकी के रामकिशोर तिवारी ने ‘राणा प्रताप का यह दर्शन भारत की उज्जवल परिपाटी, दुनिया के तीर्थों से बढ़कर है महातीर्थ हल्दीघाटी’। इलाहाबाद के शायर शकील फूलपुरी ने ‘हर एक दिल से नफरत मिटा दीजिएगा, चरागे मोहब्बत जला दीजिएगा, अगर कोई पूछे हो हिंदू कि मुसलिम तो हिंदुस्तानी बता दीजिएगा’।
सर्वेश अस्थाना ने ‘रिश्तों में तकरार बहुत है, पर इनमें प्यार बहुत है’, रामिश जौनपुरी ने ‘हर तरफ दुश्मनों के हमले है बेसहारों पे अपनी रहमत कर। गौरव चौहान ने ‘ना ही किसी मजहब ना खुदाओं पे टिका है, ना तो ये सियासत की खताओं मेें टिका है, संसद के लुटेरों में नहीं दम जो हमें हिला दें, ये मुल्क शहीदों की चिताओं पर टिका है’।
एटा की योगिता चौहान ने ‘मुस्कराकर आग दिल में क्यों लगा दी आपने, सोई हुई थी चाहतें अब क्यों जगा दीं आपने, आप समझेंगे भला क्या बीतती है आजकल चैन मन की नींद आंखों की भगा दी आपने’। सीतापुर के जगजीवन मिश्र ने ‘तमन्ना मरू तो वतन के लिए, मरने पर कफन बस तिरंगा मिले’।
बाराबंकी के अनिल बांझड़ ने भी खूब गुदगुदाया। गीतकार नवल सुधांशु ने ‘मानसरोवर तट पर मैंने मंदिर एक सजाया है आकर देखो मंदिर का तुमको भगवान बनाया है’। कालेज के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. महेंद्र वर्मा की रचना ‘नीति शतक’ का विमोचन किया गया।
अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य डा. बीडी शुक्ल ने और आभार डा. संदीप सिन्हा ने जताया। इस मौके पर डा. जगदीश सिंह कुशवाहा, डा. अनिल सिंह, डा. दयाशंकर सिंह यादव, डा. महेंद्र त्रिपाठी, डा. पुष्पारानी गंगवार, डा. आभा सिंह, डा. एसके सिंह, अरुणेश बाजपेई, प्रोफेसर अखिलेश बाजपेई, अनिल पांडेय, देशदीपक शुक्ल आदि थे।
इसी के साथ दो दिवसीय समारोह का समापन हो गया। उद्घाटन डीएम रमेश मिश्र ने किया। कवि सम्मेलन की शुरुआत कवियित्री योगिता चौहान ने सरस्वती वंदना से की। राष्ट्रीय कवि डा. शिव ओम अंबर ने पंक्तियां पेश की ‘लफ्जों में टंकार बिठा लहजे में खुद्दारी रख, जीने की ख्वाहिश है तो मरने की तैयारी रख।
बाराबंकी के रामकिशोर तिवारी ने ‘राणा प्रताप का यह दर्शन भारत की उज्जवल परिपाटी, दुनिया के तीर्थों से बढ़कर है महातीर्थ हल्दीघाटी’। इलाहाबाद के शायर शकील फूलपुरी ने ‘हर एक दिल से नफरत मिटा दीजिएगा, चरागे मोहब्बत जला दीजिएगा, अगर कोई पूछे हो हिंदू कि मुसलिम तो हिंदुस्तानी बता दीजिएगा’।
सर्वेश अस्थाना ने ‘रिश्तों में तकरार बहुत है, पर इनमें प्यार बहुत है’, रामिश जौनपुरी ने ‘हर तरफ दुश्मनों के हमले है बेसहारों पे अपनी रहमत कर। गौरव चौहान ने ‘ना ही किसी मजहब ना खुदाओं पे टिका है, ना तो ये सियासत की खताओं मेें टिका है, संसद के लुटेरों में नहीं दम जो हमें हिला दें, ये मुल्क शहीदों की चिताओं पर टिका है’।
एटा की योगिता चौहान ने ‘मुस्कराकर आग दिल में क्यों लगा दी आपने, सोई हुई थी चाहतें अब क्यों जगा दीं आपने, आप समझेंगे भला क्या बीतती है आजकल चैन मन की नींद आंखों की भगा दी आपने’। सीतापुर के जगजीवन मिश्र ने ‘तमन्ना मरू तो वतन के लिए, मरने पर कफन बस तिरंगा मिले’।
बाराबंकी के अनिल बांझड़ ने भी खूब गुदगुदाया। गीतकार नवल सुधांशु ने ‘मानसरोवर तट पर मैंने मंदिर एक सजाया है आकर देखो मंदिर का तुमको भगवान बनाया है’। कालेज के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. महेंद्र वर्मा की रचना ‘नीति शतक’ का विमोचन किया गया।
अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य डा. बीडी शुक्ल ने और आभार डा. संदीप सिन्हा ने जताया। इस मौके पर डा. जगदीश सिंह कुशवाहा, डा. अनिल सिंह, डा. दयाशंकर सिंह यादव, डा. महेंद्र त्रिपाठी, डा. पुष्पारानी गंगवार, डा. आभा सिंह, डा. एसके सिंह, अरुणेश बाजपेई, प्रोफेसर अखिलेश बाजपेई, अनिल पांडेय, देशदीपक शुक्ल आदि थे।