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Hardoi News: आबादी 45 लाख, डेंगू का एलाइजा जांच सिर्फ एक जगह

Mon, 18 Sep 2023 11:17 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 18 Sep 2023 11:17 PM IST
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Population is 45 lakh, dengue's ELISA test is done only at one place
संवाद न्यूज एजेंसी
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हरदोई। कहने को हरदोई में मेडिकल काॅलेज खुल गया। सभी ब्लाक मुख्यालयों पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी संचालित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में संसाधनों की कमी न होने देने की बात भी बराबर कही जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि जिले में डेंगू की जांच की व्यवस्था महज मेडिकल काॅलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल की पैथालॉजी में ही है। मतलब यह कि लगभग 45 लाख की आबादी वाले जिले में डेंगू का एलाइजा टेस्ट महज एक जगह ही होता है।
आमतौर पर अगस्त के दूसरे पखवारे से मच्छरजनित रोगों का फैलना शुरू हो जाता है। मलेरिया से लेकर डेंगू और चिकनगुनिया तक पांव पसारने लगते हैं। लगभग हर साल अगस्त से अक्तूबर तक मच्छरजनित रोग कहर बरपाते हैं, लेकिन इसके बावजूद सतर्कता सिर्फ कागजों में बरती जाती है।
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साल 2011 में हुई जनगणना में जिले की आबादी लगभग 42 लाख थी। पिछले 12 साल में कम से कम यह आबाद बढ़कर 45 लाख के आसपास हो चुकी है। 45 लाख की आबादी वाले जिले में डेंगू का एलाइजा टेस्ट सिर्फ एक ही जगह पर होता है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर संसाधनों का अभाव न होने का दावा किया जाता है, लेकिन जिले की 20 सीएचसी में से किसी में भी एलाइजा टेस्ट की व्यवस्था नहीं है। सीएचसी पर किट से डेंगू का टेस्ट होता है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर संबंधित मरीज का नमूना लेकर जांच के लिए जिला अस्पताल की पैथालॉजी भेजा जाता है। यहां एलाइजा टेस्ट में रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मरीज को डेंगू पीड़ित माना जाता है।

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हर रोज औसतन 115 की हो रही डेंगू जांच
सिर्फ जिला अस्पताल की पैथालॉजी में ही डेंगू की जांच की व्यवस्था होने के कारण यहां लोड बढ़ जाता है। मलेरिया वायरल जैसी जांचों के साथ ही डेंंगू की जांच भी होती है। औसतन हर रोज 115 लोगों की डेंगू की जांच जिला अस्पताल की पैथालॉजी में की जाती है। मरीजों की भीड़ अधिक होने और सैंपल ज्यादा होने के कारण जांच रिपोर्ट में भी 72 घंटे तक का समय लग रहा है।

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एलाइजा टेस्ट आए पॉजिटिव तभी मानेंगे डेंगू
स्वास्थ्य महकमे के नियम के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को डेंगू पीड़ित तभी माना जाएगा जब वह जिला अस्पताल की पैथालॉजी के एलाइजा टेस्ट में पॉजिटिव आ जाए। किसी भी प्राइवेट पैथालॉजी में एलाइजा टेस्ट में पॉजिटिव होने पर उसकी जांच फिर से जिला अस्पताल की पैथालॉजी में कराई जाती है। यहां रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर ही मरीज को डेंगू पीड़ित के रूप में दर्ज किया जाता है।
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जनप्रतिनिधि चाहें तो निधि से दे सकते मशीन
जनपद में भाजपा के आठ विधायक हैं। इनमें से एक स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री हैं, तो दूसरी राज्यमंत्री भी हैं। स्नातक क्षेत्र के एमएलसी, शिक्षक क्षेत्र के एमएलसी और निकाय क्षेत्र के एमएलसी भी हैं। दो सांसद हैं, एक राज्यसभा सदस्य हैं। यह जनप्रतिनिधि चाहें तो एलाइजा रीडर की व्यवस्था अपनी निधि से अपने अपने क्षेत्रों में करा सकते हैं। यह बात और है कि लंबे समय से इन जनप्रतिनिधियों ने इस तरफ ध्यान ही नहीं दिया।


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अरे, अभी तो कई जिलो में भी जांच नहीं
सीएमओ डा. रोहताश कुमार से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि सीएचसी पर डेंगू के एलाइजा टेस्ट की व्यवस्था कराना काफी मंहगा है। अभी तो कई जिलों में एलाइजा टेस्ट की ही व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्नाव पास ही है, लेकिन वहां एलाइजा टेस्ट की व्यवस्था नहीं है। सधे शब्दों में सीएमओ ने कहा कि जो है वही बहुत है।
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