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भुगतान अटका तो पंचायत भवनों का निर्माण भी भटका
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हरदोई। जिले में ब्लाक अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते 340 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों के निर्माण अधूरे पड़े हैं। इन अधूरे भवनों में इस्तेमाल की गई सामग्री का लगभग 22 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हुआ है। जिसके चलते निर्माण रुका पड़ा है।
सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन/मिनी सचिवालय स्थापित कर ग्राम पंचायतों को आधुनिक बनाने की कवायद चल रही है। ग्रामीणों को गांव से जुड़े जरूरी कार्यों के लिए ब्लाक और जिला मुख्यालय की दौड़ न लगानी पड़े, इसलिए पंचायत भवनों का निर्माण कर ग्राम सचिवों की मौजूदगी का रोस्टर भी जारी किया गया। सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक पंचायत सहायक भी तैनात कर दिया गया है, लेकिन जिले में अभी तक सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। इनका निर्माण राज्य वित्त व मनरेगा के संयुक्त बजट से होने के निर्देश हैं।
निर्माण कार्य तो तेजी से शुरू हुए, लेकिन सामग्री अंश का जो भुगतान मनरेगा से होना था, वह लंबित होता चला गया। इसके कारण प्रधान और सचिव भी अब इस कार्य में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक 340 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन अधूरे हैं और इनमें 21 करोड़ 99 लाख छह हजार रुपये का भुगतान मनरेगा से नहीं हो पा रहा है। बाकी 966 पंचायतों में निर्माण हो चुका है।
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डीएम अविनाश कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। बावन, बेेंहदर, भरावन, बिलग्राम, हरियावां, हरपालपुर, कोथावां, माधौगंज, सांडी, शाहाबाद, सुरसा और टड़ियावां के खंड विकास अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दिसंबर तक पंचायत भवनों का निर्माण हर हाल में पूरा करने के निर्देश भी दिए हैं। यह भी पूछा है कि पंचायत भवनों के निर्माण से जुड़े भुगतान को लंबित क्यों रखा गया।
ब्लाक बकाया भुगतान (लाख रुपये में)
अहिरोरी 14.22
बावन 30.33
बेंहदर 41.61
भरावन 385.25
भरखनी 74.97
बिलग्राम 126.23
हरियावां 27.32
हरपालपुर 187.01
कोथावां 103.61
माधौगंज 244.5
मल्लावां 93.27
पिहानी 52.47
सांडी 203.01
संडीला 190.02
शाहाबाद 157.09
सुरसा 28.26
टडिय़ावां 164.68
टोडरपुर 40.15
पूरे जनपद में 340 पंचायत भवन अधूरे पड़े हैं। इसमें सबसे ज्यादा 42 पंचायत भवन भरावन विकास खंड में अधूरे हैं। इसी तरह माधौगंज में 35, भरखनी में 33, संडीला में 28, शाहाबाद और सांडी में 27-27, बिलग्राम में 20, अहिरोरी में 04, बावन में 11, बेंहदर 10, हरियावां में छह, हरपालपुर में 16, कोथावां में 18, मल्लावां में 9, पिहानी में 15, सुरसा में 7, टडिय़ावां में 21, टोडरपुर में 11 पंचायत भवन अधूरे पड़े हैं।
मनरेगा के तहत सामग्री अंश का भुगतान अटकाने की वजह लगभग सभी जिम्मेदारों को मालूम है। अधिकांश ग्राम प्रधान और सचिव के साथ ही मनरेगा के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी सबकुछ जानते हैं। दरअसल हकीकत यह है कि जो रेवड़ी अन्य भुगतानों में है वह पंचायत भवन के भुगतान में नहीं।
मनरेगा के तहत पंचायत भवनों की सामग्री अंश का भुगतान लंबित न रहे, इसको लेकर सीडीओ आकांक्षा राना खासी गंभीर थीं। सीडीओ ने 31 अगस्त और 28 अक्टूबर को सभी खंड विकास अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिए थे कि पंचायत भवनों के सामग्री अंश का भुगतान लंबित न रखा जाए। साथ ही पंचायत भवन का निर्माण 15 दिसंबर से पहले ही पूरे करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन खंड विकास अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीें लिया।
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सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन/मिनी सचिवालय स्थापित कर ग्राम पंचायतों को आधुनिक बनाने की कवायद चल रही है। ग्रामीणों को गांव से जुड़े जरूरी कार्यों के लिए ब्लाक और जिला मुख्यालय की दौड़ न लगानी पड़े, इसलिए पंचायत भवनों का निर्माण कर ग्राम सचिवों की मौजूदगी का रोस्टर भी जारी किया गया। सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक पंचायत सहायक भी तैनात कर दिया गया है, लेकिन जिले में अभी तक सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत भवनों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। इनका निर्माण राज्य वित्त व मनरेगा के संयुक्त बजट से होने के निर्देश हैं।
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निर्माण कार्य तो तेजी से शुरू हुए, लेकिन सामग्री अंश का जो भुगतान मनरेगा से होना था, वह लंबित होता चला गया। इसके कारण प्रधान और सचिव भी अब इस कार्य में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक 340 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन अधूरे हैं और इनमें 21 करोड़ 99 लाख छह हजार रुपये का भुगतान मनरेगा से नहीं हो पा रहा है। बाकी 966 पंचायतों में निर्माण हो चुका है।
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डीएम अविनाश कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। बावन, बेेंहदर, भरावन, बिलग्राम, हरियावां, हरपालपुर, कोथावां, माधौगंज, सांडी, शाहाबाद, सुरसा और टड़ियावां के खंड विकास अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दिसंबर तक पंचायत भवनों का निर्माण हर हाल में पूरा करने के निर्देश भी दिए हैं। यह भी पूछा है कि पंचायत भवनों के निर्माण से जुड़े भुगतान को लंबित क्यों रखा गया।
ब्लाक बकाया भुगतान (लाख रुपये में)
अहिरोरी 14.22
बावन 30.33
बेंहदर 41.61
भरावन 385.25
भरखनी 74.97
बिलग्राम 126.23
हरियावां 27.32
हरपालपुर 187.01
कोथावां 103.61
माधौगंज 244.5
मल्लावां 93.27
पिहानी 52.47
सांडी 203.01
संडीला 190.02
शाहाबाद 157.09
सुरसा 28.26
टडिय़ावां 164.68
टोडरपुर 40.15
पूरे जनपद में 340 पंचायत भवन अधूरे पड़े हैं। इसमें सबसे ज्यादा 42 पंचायत भवन भरावन विकास खंड में अधूरे हैं। इसी तरह माधौगंज में 35, भरखनी में 33, संडीला में 28, शाहाबाद और सांडी में 27-27, बिलग्राम में 20, अहिरोरी में 04, बावन में 11, बेंहदर 10, हरियावां में छह, हरपालपुर में 16, कोथावां में 18, मल्लावां में 9, पिहानी में 15, सुरसा में 7, टडिय़ावां में 21, टोडरपुर में 11 पंचायत भवन अधूरे पड़े हैं।
मनरेगा के तहत सामग्री अंश का भुगतान अटकाने की वजह लगभग सभी जिम्मेदारों को मालूम है। अधिकांश ग्राम प्रधान और सचिव के साथ ही मनरेगा के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी सबकुछ जानते हैं। दरअसल हकीकत यह है कि जो रेवड़ी अन्य भुगतानों में है वह पंचायत भवन के भुगतान में नहीं।
मनरेगा के तहत पंचायत भवनों की सामग्री अंश का भुगतान लंबित न रहे, इसको लेकर सीडीओ आकांक्षा राना खासी गंभीर थीं। सीडीओ ने 31 अगस्त और 28 अक्टूबर को सभी खंड विकास अधिकारियों को पत्र लिखकर निर्देश दिए थे कि पंचायत भवनों के सामग्री अंश का भुगतान लंबित न रखा जाए। साथ ही पंचायत भवन का निर्माण 15 दिसंबर से पहले ही पूरे करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन खंड विकास अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीें लिया।