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Hardoi News: साइबर ठगी में इस्तेमाल 2,300 से ज्यादा मोबाइल ब्लॉक, 1,600 नंबर भी किए बंद
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हरदोई। जनपद में 24 घंटे के अंदर साइबर ठगी के 25 आरोपियों की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया कि अलग-अलग प्रदेशों के साइबर ठगों के तार जनपद से जुड़े हैं। गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान भले ही अब चला हो लेकिन पिछले लगभग एक साल से साइबर ठगों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। जनपद से जुड़े तकरीबन 1,600 संदिग्ध सिमों को ब्लॉक कराया जा चुका है और 2,300 से ज्यादा मोबाइलों के आईएमईआई नंबर भी ब्लॉक कर दिए गए हैं।
नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल समेत विभिन्न पोर्टलों पर साइबर ठगी के मामले दर्ज होने पर अपलोड कर दिए जाते हैं। घटनाओं में इस्तेमाल किए गए नंबरों और बैंक खातों का ब्योरा संबंधित क्षेत्र की पुलिस जुटाती है। इसके बाद संबंधित जनपदों को यह ब्योरा भेज दिया जाता है। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा खुद इसकी निगरानी करते हैं। पिछले कुछ माह की बात करें तो जिले में बड़ी संख्या में ऐसे लोग चिह्नित किए गए हैं जिनके सिम साइबर ठगी में इस्तेमाल हुए।
पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने लगभग 2,700 मोबाइल नंबरों का सत्यापन कराया। इनमें से संदिग्ध मिले 1,600 से ज्यादा मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिए गए। इन मोबाइल नंबरों को इस्तेमाल करने के लिए 2,300 से ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल हुए। जांच में इसका पता चलने पर इन सभी को भी ब्लॉक कर दिया गया।
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500 रुपये से लेकर 5000 तक में होता सौदा
सिम कार्ड जारी कराने के लिए आधार की जरूरत पड़ती है। इसके लिए लोगों को राजी करने का प्रलोभन दिया जाता है। आमतौर पर पहली बार आधार कार्ड देने पर दो हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके बाद इनसे संबंधित साइबर ठगी की रकम का बंटवारा भी होता है। कन्हारी और अमिरता में ऐसे बड़े मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा टड़ियावां थाना क्षेत्र में फर्जी अभिलेखों पर सिम जारी किए जाने का खुलासा भी पुलिस पूर्व में कर चुकी है। म्यूल अकाउंट के लिए जो खाते इस्तेमाल होते हैं उसके संचालक को अधिकतम पांच हजार रुपये दिए जाते हैं।
तीन चार साल में ही हो गए ठाठ-बाट
सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र के कई गांव साइबर ठगी के लिए अब बदनाम होते जा रहे हैं। न कोई रोजगार न खेती लेकिन ठाठ-बाट ऐसे कि बड़े-बड़े अफसर भी मात खा जाएं। कई गांवों में रहने वाले लोगों के पास पक्के मकान तक नहीं थे लेकिन महज तीन से चार साल में ही न सिर्फ पक्के मकान बन गए बल्कि इनमें सुख सुविधा के सारे साधन भी उपलब्ध हो गए। अब पुलिस की धरपकड़ के दौरान सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र के सवायजपुर थाने, पाली और पचदेवरा थाने से जुड़े गांवों से लोगों की गिरफ्तारी हुई तो मामले खुलने लगे। सिर्फ आधार कार्ड देकर ही यहां साइबर ठगी के हिस्सेदार तैयार हो गए हैं।
केस-1
सवायजपुर कोतवाली पुलिस ने बृहस्पतिवार को दंपती समेत पांच लोगों को साइबर ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया। इन लोगों के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल फर्जी ट्रांसपोर्ट कंपनी चलाने में किया जा रहा था। गिरफ्तार लोगों में शामिल कन्हारी निवासी कृष्ण मुरारी उर्फ मुरारी को पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है। तब उसे पांच लोगाें के साथ 30 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था। पहले और अब गिरफ्तार किए गए लोगों ने पुलिस को बताया कि वह लोग विभिन्न लोगों के अभिलेख इस्तेमाल कर सिम निकलवा लेते हैं। इन नंबरों को सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं। ट्रांसपोर्ट कंपनी के नाम पर लोग इनसे संपर्क करते हैं और यह लोग एडवांस में रुपये लेकर ठगी कर लेते हैं।
केस-2
अलीगढ़ के शांति सदन निवासी अमन ने बीते 11 मार्च को शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने बताया कि किराये पर गाड़ी उपलब्ध कराने के नाम पर उनसे तीन हजार रुपये की ठगी ऑनलाइन हुई। शिकायत में उस मोबाइल नंबर का भी उल्लेख था जिससे संपर्क किया गया था। जांच हुई तो यह मोबाइल नंबर बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के बेटे अरविंद दिवाकर का निकला। इन लोगों ने अलग-अलग जगहों के लोगों से ठगी की थी।
अपराध किसी भी तरह का हो1 उस पर रोक सख्ती से ही लगाई जाती है। साइबर ठगी के मामलों में जो लोग भी शामिल हैं इन सबके खिलाफ आगे भी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहेगा। अलग-अलग ढंग से साइबर ठग लोगों को शिकार बना रहे हैं। इसलिए जनता को भी सावधानी से रहना होगा। -अशोक कुमार मीणा, एसपी
दुर्गेश को मास्टरमाइंड मान रही पुलिस
साइबर ठगों का सबसे बड़ा केंद्र सवायजपुर कोतवाली क्षेत्र में ही निकला, महकमे से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इन सब का मास्टरमाइंड अमिरता निवासी दुर्गेश चौहान है हालांकि उसके खिलाफ अलग-अलग बिंदुओं पर जांच की जा रही है। पूर्व में हुए एक खुलासे में कन्हैया नाम के शख्स की भूमिका भी गैंग लीडर के तौर पर सामने आई थी।
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नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल समेत विभिन्न पोर्टलों पर साइबर ठगी के मामले दर्ज होने पर अपलोड कर दिए जाते हैं। घटनाओं में इस्तेमाल किए गए नंबरों और बैंक खातों का ब्योरा संबंधित क्षेत्र की पुलिस जुटाती है। इसके बाद संबंधित जनपदों को यह ब्योरा भेज दिया जाता है। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा खुद इसकी निगरानी करते हैं। पिछले कुछ माह की बात करें तो जिले में बड़ी संख्या में ऐसे लोग चिह्नित किए गए हैं जिनके सिम साइबर ठगी में इस्तेमाल हुए।
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पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने लगभग 2,700 मोबाइल नंबरों का सत्यापन कराया। इनमें से संदिग्ध मिले 1,600 से ज्यादा मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिए गए। इन मोबाइल नंबरों को इस्तेमाल करने के लिए 2,300 से ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल हुए। जांच में इसका पता चलने पर इन सभी को भी ब्लॉक कर दिया गया।
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500 रुपये से लेकर 5000 तक में होता सौदा
सिम कार्ड जारी कराने के लिए आधार की जरूरत पड़ती है। इसके लिए लोगों को राजी करने का प्रलोभन दिया जाता है। आमतौर पर पहली बार आधार कार्ड देने पर दो हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके बाद इनसे संबंधित साइबर ठगी की रकम का बंटवारा भी होता है। कन्हारी और अमिरता में ऐसे बड़े मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा टड़ियावां थाना क्षेत्र में फर्जी अभिलेखों पर सिम जारी किए जाने का खुलासा भी पुलिस पूर्व में कर चुकी है। म्यूल अकाउंट के लिए जो खाते इस्तेमाल होते हैं उसके संचालक को अधिकतम पांच हजार रुपये दिए जाते हैं।
तीन चार साल में ही हो गए ठाठ-बाट
सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र के कई गांव साइबर ठगी के लिए अब बदनाम होते जा रहे हैं। न कोई रोजगार न खेती लेकिन ठाठ-बाट ऐसे कि बड़े-बड़े अफसर भी मात खा जाएं। कई गांवों में रहने वाले लोगों के पास पक्के मकान तक नहीं थे लेकिन महज तीन से चार साल में ही न सिर्फ पक्के मकान बन गए बल्कि इनमें सुख सुविधा के सारे साधन भी उपलब्ध हो गए। अब पुलिस की धरपकड़ के दौरान सवायजपुर विधानसभा क्षेत्र के सवायजपुर थाने, पाली और पचदेवरा थाने से जुड़े गांवों से लोगों की गिरफ्तारी हुई तो मामले खुलने लगे। सिर्फ आधार कार्ड देकर ही यहां साइबर ठगी के हिस्सेदार तैयार हो गए हैं।
केस-1
सवायजपुर कोतवाली पुलिस ने बृहस्पतिवार को दंपती समेत पांच लोगों को साइबर ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया। इन लोगों के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल फर्जी ट्रांसपोर्ट कंपनी चलाने में किया जा रहा था। गिरफ्तार लोगों में शामिल कन्हारी निवासी कृष्ण मुरारी उर्फ मुरारी को पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है। तब उसे पांच लोगाें के साथ 30 जून 2025 को गिरफ्तार किया गया था। पहले और अब गिरफ्तार किए गए लोगों ने पुलिस को बताया कि वह लोग विभिन्न लोगों के अभिलेख इस्तेमाल कर सिम निकलवा लेते हैं। इन नंबरों को सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं। ट्रांसपोर्ट कंपनी के नाम पर लोग इनसे संपर्क करते हैं और यह लोग एडवांस में रुपये लेकर ठगी कर लेते हैं।
केस-2
अलीगढ़ के शांति सदन निवासी अमन ने बीते 11 मार्च को शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने बताया कि किराये पर गाड़ी उपलब्ध कराने के नाम पर उनसे तीन हजार रुपये की ठगी ऑनलाइन हुई। शिकायत में उस मोबाइल नंबर का भी उल्लेख था जिससे संपर्क किया गया था। जांच हुई तो यह मोबाइल नंबर बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के बेटे अरविंद दिवाकर का निकला। इन लोगों ने अलग-अलग जगहों के लोगों से ठगी की थी।
अपराध किसी भी तरह का हो1 उस पर रोक सख्ती से ही लगाई जाती है। साइबर ठगी के मामलों में जो लोग भी शामिल हैं इन सबके खिलाफ आगे भी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहेगा। अलग-अलग ढंग से साइबर ठग लोगों को शिकार बना रहे हैं। इसलिए जनता को भी सावधानी से रहना होगा। -अशोक कुमार मीणा, एसपी
दुर्गेश को मास्टरमाइंड मान रही पुलिस
साइबर ठगों का सबसे बड़ा केंद्र सवायजपुर कोतवाली क्षेत्र में ही निकला, महकमे से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि इन सब का मास्टरमाइंड अमिरता निवासी दुर्गेश चौहान है हालांकि उसके खिलाफ अलग-अलग बिंदुओं पर जांच की जा रही है। पूर्व में हुए एक खुलासे में कन्हैया नाम के शख्स की भूमिका भी गैंग लीडर के तौर पर सामने आई थी।