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जान पर भारी अनफिट वाहनों से आवाजाही

Tue, 08 Mar 2022 11:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 11:36 PM IST
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Movement of heavy unfit vehicles on life
हरदोई। अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूली बच्चे अनफिट वाहनों से आवाजाही करने को विवश हैं, जबकि जिम्मेदार इस ओर पूरी तरह से बेखबर बने हुए हैं।
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इन वाहनों का करीब दो साथ से फिटनेस की जांच कराने की जहमत नहीं उठाई गई है। अभिभावक भी बच्चों को इन्हीं अनफिट वाहनों से स्कूल भेज रहे हैं।
करीब दो साल बाद कोरोना की तीसरी लहर भी थम गई, इसके साथ ही फरवरी से स्कूलों में ऑफलाइन पढ़ाई भी शुरू हो गई। कई निजी स्कूलों के बच्चों को वाहनों से भी लाने ले जाने का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
गंभीर बात यह है कि एआरटीओ विभाग के आंकड़ों में पंजीकृत करीब 450 स्कूली वाहनों की लगभग दो वर्ष से फिटनेस ही नहीं जांची गई है। ऐसे में इन्हीं अनफिट वाहनों में ही नौनिहाल आवाजाही कर रहे हैं।
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इसके बाद भी जिम्मेदार अफसर इस ओर से बेपरवाह बने हुए हैं, जो बच्चों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। कोरोना काल में पहली, दूसरी और तीसरी लहर में करीब दो वर्ष सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहे।
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थोड़े से हालात सुधरे तब भी ज्यादातर संस्थानों ने बच्चों को स्कूलों में बुलाने की बजाय ऑनलाइन कक्षाएं ही संचालित की। तीसरी लहर का असर कम होने पर इस वर्ष फरवरी से कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए ऑफलाइन कक्षाओं का संचालन शुरू किया गया है।
ऐसे में जिन निजी स्कूलों में बच्चे स्कूली वाहनों से आवाजाही करते हैं, उनके पहिये भी घूमने लगे हैं। गंभीर बात यह है कि करीब डेढ़ साल बाद चले इन स्कूली वाहनों का निजी शैक्षणिक संस्थानों के जिम्मेदारों ने फिटनेेस टेस्ट नहीं कराया है।
इससे बड़ी लापरवाही एआरटीओ और डीआईओएस कार्यालयों के जिम्मेदारों की तरफ से भी की जा रही है। उन्होंने भी इस ओर अब तक गौर नहीं किया है।
निजी स्कूलों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जब से स्कूल खुले हैं, स्कूली वाहनों की फिटनेस की जांच नहीं की गई है। एआरटीओ विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 450 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं।
इनमें मिनी बस, वैन और मैजिक ही शामिल हैं। फिलहाल लापरवाही किसी भी स्तर से की जा हो। इन अनफिट वाहनों में सफर करने वाले नौनिहालों के साथ अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ई-रिक्शों से ढो रहे स्कूली बच्चे
शहर के कई निजी स्कूलों में ई रिक्शों को भी बच्चों को लाने और ले जाने के लिए लगाया गया है। बड़ी बात यह है कि इन ई-रिक्शा का स्कूली बच्चों को लाने ले जाने के लिए एआरटीओ विभाग में पंजीयन ही नहीं है।
इसके बाद भी कई ई-रिक्शा पर छह से आठ की संख्या में स्कूली बच्चों को बिठाया जा रहा है। इस ओर जिम्मेदार गौर नहीं कर रहे हैं।
मेरी जानकारी में करीब दो वर्ष से निजी स्कूलों में चलाए जा रहे स्कूली वाहनों की फिटनेस की जांच नहीं की गई है। जल्द ही इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक और एआरटीओ को ज्ञापन सौंपकर सभी वाहनों की फिटनेस की जांच कराने की मांग की जाएगी।

- एसपी त्रिवेदी, संरक्षक, अभिभावक संघ, हरदोई
कोरोना की तीसरी लहर के बाद अब फिर से स्कूल-कॉलेज खुल चुके हैं। नियमानुसार वाहनों की फिटनेस कराने के बाद ही स्कूली वाहनों से बच्चों को लाया ले जाया जा सकता है।
अभियान चलाकर वाहनों की फिटनेस की जांच कराई जाएगी। बिना पंजीकरण के ई-रिक्शा से बच्चों को ले जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
- संजीव कुमार, एआरटीओ, हरदोई
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