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मां की दुआ जिंदगी बना देगी, खुद रोयेगी पर तुझे हंसा देगी...

Sat, 09 May 2020 11:48 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2020 11:48 PM IST
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mother
फोटो-31-बेटी अदरिजा के साथ डॉ. सुरूचि गुप्ता। संवाद - फोटो : HARDOI
हरदोई। सबका ध्यान रखने और निस्वार्थ प्यार उड़ेलने वाला यदि कोई है तो वह है मां। लॉकडाउन ने इस बार ये भी सिद्ध कर दिया कि मां को अपने शहर व दायित्वों की ज्यादा चिंता है। शायद इसलिए पिछले 45 दिन से लगातार कुछ डॉक्टर मां अपने कलेजे के टुकड़ों से दूर कड़ी धूप में भी दायित्व निभातीं नजर आ रहीं हैं। मदर्स डे पर हम ऐसी माताओं को नमन करते हैं।
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बच्चों से है दूरी पर परीक्षा की ये घड़ी
हरियावां में राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम चिकित्साधिकारी डॉ. अर्चना अहिरवार का कहना है कि इन दिनों ड्यूटी कठिन है, लेकिन परीक्षा की भी यही घड़ी है। घर में बेटी सुहानी व बेटा तेजस है। पति राम निवास भी डॉक्टर हैं। दोनों ही देर शाम तक फील्ड पर ही रहते हैं।
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वापस आते हैं तभी वह अपने बच्चों की देखभाल कर पाती है। इन दिनों दिन भर फील्ड में रहने के बाद घर और बच्चों के नजदीक जाने में भी डर लगता है।
शाहाबाद में आरबीएसके में नेत्र सहायक के पद पर तैनात अरबाब नशी का कहना है कि जिम्मेदारी क्या होती है, एक मां ही समझ सकती है। उनका ढाई माह का बेटा अब्राहम खान है। जो उनकी जान है लेकिन उसको छोड़कर वह रोज दिन भर के लिए ड्यूटी पर जातीं हैं। भय सभी के समान उनके दिल में भी रहता है पर दायित्व हैं, तो मां के साथ-साथ चिकित्सक होने का भी धर्म निभाना है।
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मल्लावां में तैनात मेडिकल आफीसर डॉ. दीपांजलि यादव का कहना है कि उनकी तीन वर्षीय बेटी रिद्धिमा है। उसको इन दिनों वह साथ भी नहीं ले जा सकतीं। घर पर छोड़कर जातीं हैं। इस दौर में मां की ड्यूटी काफी कठिन है पर दायित्व जितने अच्छे से एक मां निभा सकती और कोई नहीं। उन्हें पता है कि मां होने से ज्यादा इन दिनों चिकित्सक होने का दायित्व निभाना है।
टड़ियावां की चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरुचि गुप्ता का कहना है कि अब तो उनकी चार वर्षीय बेटी अदरिजा कहने लगी है कि मां आप तो सबकी मां हो। आज कल सबका ख्याल रख रही हो। जिसको सुनकर आंसू छलक जाते हैं।
कोथावंा ब्लाक में आरबीएसके मेडिकल आफीसर का दायित्व निभा रहीं डॉ. नीतू सिंह का कहना है कि इन दिनों वह दौर है, जब चिकित्सकों के साथ खतरा बना रहता है। घर में उनके तीन साल की बेटी अदिति है। देर शाम घर पहुंचने के बाद भी उसको गले नहीं लगा सकती। एहतियात बरतनी पड़ती है। मां के लिए इससे बड़ा दर्द क्या हो सकता है।
पिहानी की चिकित्सक डॉ. हिना मुमताज का कहना है कि गर्व है कि मैं एक डॉक्टर हूं और पूरे समाज के काम आ रहीं हूं। हां इन दिनों मां होने का फर्ज कम निभा रहीं हूं पर जो निभा रहीं हूं वह एक मां ही निभा सकती है। मुझे अपने बेटे फहाद खान व फराज खान पर भी गर्व है, जो मां को परेशान नहीं करते।
टोडरपुर के आरबीएसके टीम की एएनएम अर्चना राठौर का कहना है कि इन दिनों कोरोना से बचाव को ड्यूटी काफी सख्त है। ऐसे में अपने बच्चों से दूरी काफी सताती है।
पिहानी आरबीएसके मेडिकल आफीसर डॉ. बिंदु का कहना है कि आज कल पिता मां का रोल निभा रहे हैं। मां अपने दायित्वों को पूरा करने में लगी हैं। पति ही नहीं बल्कि बच्चे भी मां के साथ जितनी देर भी होते हैं, उन्हें संभालते नजर आते हैं।

अहिरोरी में तैनता एएनएम रेनू ने बताया कि उनकी 15 साल की बेटी अनु वर्मा व बेटा आर्यन है। दोनों बहुत समझदार हैं। ड्यूटी पर सुबह ही निकलना होता है और घर देर से वापसी होती है। लेकिन बच्चे भी जानते हैं इन दिनों मां की जरूरत समाज को ज्यादा है। इसलिए देर शाम गेट पर इंतजार करते ही मिलते हैं।
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