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एमएलसी चुनाव : सपा और भाजपा के बीच टक्कर
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हरदोई। विधान परिषद सदस्य पद स्थानीय निकाय क्षेत्र चुनाव के लिए नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को भाजपा प्रत्याशी अशोक अग्रवाल ने चार सेट और सपा प्रत्याशी रजीउद्दीन ने एक सेट में नामांकनपत्र दाखिल किया।
इससे पहले भी सपा प्रत्याशी ने एक सेट में अपना नामांकनपत्र दाखिल कर चुके हैं। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया कि इस सीट पर अब भाजपा और सपा के बीच ही मुकाबला होगा।
किसके सिर ताज बंधेगा और कौन निराश होगा, इसका फैसला 11 अप्रैल को होने वाली मतगणना में ही साफ हो सकेगा। वैसे अमर उजाला ने पहले ही साफ कर दिया था कि भाजपा और सपा प्रत्याशियों के बीच ही एक पर एक मुकाबला होने के आसार हैं, जो सच साबित हुआ।
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अंतिम दिन केवल भाजपा और सपा के प्रत्याशियों ने ही नामांकन कराया। वहीं, नामांकन पत्र लेने की होड़ में शामिल रहे लोगों ने पत्र दाखिल नहीं किए। जिला सूचना अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि नामांकनपत्र करीब एक दर्जन से अधिक लोगों द्वारा लिए गए थे।
दाखिल करने वालों में दो ही लोग हैं। इनमें एक सपा प्रत्याशी रजीउद्दीन तो दूसरे भाजपा के प्रत्याशी अशोक अग्रवाल हैं। नामांकन पत्रों की जांच 22 और नाम वापसी 24 मार्च तक हो सकेगी, जबकि मतदान नौ अप्रैल को और मतगणना 11 अप्रैल को होगी।
अवकाश के चलते निर्वाचन आयोग ने नामांकन कराने की अंतिम तिथि 21 मार्च निर्धारित की थी, जबकि पूर्व में एक सेट में बिना किसी भीड़भाड़ के आकर नामांकन करा चुके पूर्व जिला पंचायत सदस्य रजीउद्दीन ने सोमवार को पिता एमएलसी मिस्बाहुद्दीन, सपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र वर्मा उर्फ जीतू पटेल एवं एमएलसी डॉ. राजपाल कश्यप सहित सपा नेताओं के साथ आकर नामांकनपत्र का दूसरा सेट दाखिल किया।
भाजपा द्वारा प्रत्याशी घोषित किए गए पूर्व ब्लाक प्रमुख अशोक अग्रवाल ने पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा, सदर विधायक नितिन अग्रवाल, विधायक सवायजपुर माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष राम प्रकाश शुक्ला आदि के साथ आकर नामांकनपत्र दाखिल किया।
इस दौरान नामांकन कक्ष के बाहर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहा।
सपा प्रत्याशी की पत्नी डॉक्टर, खुद करते वकालत
सपा प्रत्याशी पूर्व जिला पंचायत सदस्य रजीउद्दीन के पास लग्जरी गाड़ियां हैं। गांव में जमीन जायदाद भी खूब है। खुद की वार्षिक आय करीब 4,15,800 रुपये है।
उनकी पत्नी रूही मेराज सरकारी डाक्टर हैं। लखपति सपा प्रत्याशी मूल रूप से ग्राम मलैया तहसील संडीला के रहने वाले हैं। उनके पिता मिस्बाहुउद्दीन वर्तमान में इसी सीट से एमएलसी हैं।
सपा प्रत्याशी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। उनके द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के अनुसार, पांच साल पहले उनकी वार्षिक आमदनी 2,93,170 रुपये थी जो बढ़कर अब 4,15,800 रुपये हो गई है। उनका मुख्य व्यवसाय वकालत एवं कृषि है।
करोड़पति हैं भाजपा प्रत्याशी अशोक अग्रवाल
करोड़पति भाजपा प्रत्याशी अशोक अग्रवाल के पास ढेर सारी संपत्तियां हैं। उनका कई कंपनियों मेें निवेश हैै। उनके पास वाहन और संसाधनों की भी कमी नहीं है।
हलफनामे के अनुसार, उनकी वार्षिक आय 12,78,615 रुपये है, जबकि पांच साल पहले उनकी आय 4,53,145 रुपये थी। कछौना के ब्लाक प्रमुख रह चुके भाजपा प्रत्याशी ग्राम बरौली के मूल निवासी हैं। उनके बड़े भाई राजकुमार अग्रवाल इसी सीट से एमएलसी रह चुके हैं।
राजकुमार रूठे, नहीं मना पाये छोटे भाई
एमएलसी चुनाव स्थानीय निकाय हरदोई सीट से एमएलसी रह चुके राजकुमार अग्रवाल विधायक रहते हुए टिकट काटे जाने के बाद टूट गए थे। जब उन्हें एमएलसी का भी टिकट भाजपा ने नहीं दिया तो वो रूठ गए हैं।
उनको किनारे कर भाजपा ने उनके छोटे भाई अशोक अग्रवाल को टिकट दिया है। उम्मीद की जा रही थी रिश्तों के बीच खड़ी हुई सियासी दीवार टूटेगी और राजकुमार अपने छोटे भाई के नामांकन में आएंगे।
छोटे भाई अशोक अग्रवाल ने कहा भी था कि वो आशीर्वाद लेने जाएंगे, मगर नामांकन के दौरान तमाम निगाहें राजकुमार को ढूंढती रहीं, पर वो नहीं दिखे। बताया कि छोटे भाई का फोन आया था, तो आशीर्वाद दे दिया।
स्वास्थ्य ठीक नहीं है, घर पर हूं। भाजपा ने 2017 में जिले में चुनाव जीतने वाले विधायकों में सिर्फ एक टिकट राजकुमार अग्रवाल का संडीला सीट से काट दिया था। जिसके बाद से वह एमएलसी के टिकट के लिए दौड़ लगा रहे थे।
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इससे पहले भी सपा प्रत्याशी ने एक सेट में अपना नामांकनपत्र दाखिल कर चुके हैं। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया कि इस सीट पर अब भाजपा और सपा के बीच ही मुकाबला होगा।
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किसके सिर ताज बंधेगा और कौन निराश होगा, इसका फैसला 11 अप्रैल को होने वाली मतगणना में ही साफ हो सकेगा। वैसे अमर उजाला ने पहले ही साफ कर दिया था कि भाजपा और सपा प्रत्याशियों के बीच ही एक पर एक मुकाबला होने के आसार हैं, जो सच साबित हुआ।
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अंतिम दिन केवल भाजपा और सपा के प्रत्याशियों ने ही नामांकन कराया। वहीं, नामांकन पत्र लेने की होड़ में शामिल रहे लोगों ने पत्र दाखिल नहीं किए। जिला सूचना अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि नामांकनपत्र करीब एक दर्जन से अधिक लोगों द्वारा लिए गए थे।
दाखिल करने वालों में दो ही लोग हैं। इनमें एक सपा प्रत्याशी रजीउद्दीन तो दूसरे भाजपा के प्रत्याशी अशोक अग्रवाल हैं। नामांकन पत्रों की जांच 22 और नाम वापसी 24 मार्च तक हो सकेगी, जबकि मतदान नौ अप्रैल को और मतगणना 11 अप्रैल को होगी।
अवकाश के चलते निर्वाचन आयोग ने नामांकन कराने की अंतिम तिथि 21 मार्च निर्धारित की थी, जबकि पूर्व में एक सेट में बिना किसी भीड़भाड़ के आकर नामांकन करा चुके पूर्व जिला पंचायत सदस्य रजीउद्दीन ने सोमवार को पिता एमएलसी मिस्बाहुद्दीन, सपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र वर्मा उर्फ जीतू पटेल एवं एमएलसी डॉ. राजपाल कश्यप सहित सपा नेताओं के साथ आकर नामांकनपत्र का दूसरा सेट दाखिल किया।
भाजपा द्वारा प्रत्याशी घोषित किए गए पूर्व ब्लाक प्रमुख अशोक अग्रवाल ने पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा, सदर विधायक नितिन अग्रवाल, विधायक सवायजपुर माधवेंद्र प्रताप सिंह रानू, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष राम प्रकाश शुक्ला आदि के साथ आकर नामांकनपत्र दाखिल किया।
इस दौरान नामांकन कक्ष के बाहर भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहा।
सपा प्रत्याशी की पत्नी डॉक्टर, खुद करते वकालत
सपा प्रत्याशी पूर्व जिला पंचायत सदस्य रजीउद्दीन के पास लग्जरी गाड़ियां हैं। गांव में जमीन जायदाद भी खूब है। खुद की वार्षिक आय करीब 4,15,800 रुपये है।
उनकी पत्नी रूही मेराज सरकारी डाक्टर हैं। लखपति सपा प्रत्याशी मूल रूप से ग्राम मलैया तहसील संडीला के रहने वाले हैं। उनके पिता मिस्बाहुउद्दीन वर्तमान में इसी सीट से एमएलसी हैं।
सपा प्रत्याशी सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। उनके द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के अनुसार, पांच साल पहले उनकी वार्षिक आमदनी 2,93,170 रुपये थी जो बढ़कर अब 4,15,800 रुपये हो गई है। उनका मुख्य व्यवसाय वकालत एवं कृषि है।
करोड़पति हैं भाजपा प्रत्याशी अशोक अग्रवाल
करोड़पति भाजपा प्रत्याशी अशोक अग्रवाल के पास ढेर सारी संपत्तियां हैं। उनका कई कंपनियों मेें निवेश हैै। उनके पास वाहन और संसाधनों की भी कमी नहीं है।
हलफनामे के अनुसार, उनकी वार्षिक आय 12,78,615 रुपये है, जबकि पांच साल पहले उनकी आय 4,53,145 रुपये थी। कछौना के ब्लाक प्रमुख रह चुके भाजपा प्रत्याशी ग्राम बरौली के मूल निवासी हैं। उनके बड़े भाई राजकुमार अग्रवाल इसी सीट से एमएलसी रह चुके हैं।
राजकुमार रूठे, नहीं मना पाये छोटे भाई
एमएलसी चुनाव स्थानीय निकाय हरदोई सीट से एमएलसी रह चुके राजकुमार अग्रवाल विधायक रहते हुए टिकट काटे जाने के बाद टूट गए थे। जब उन्हें एमएलसी का भी टिकट भाजपा ने नहीं दिया तो वो रूठ गए हैं।
उनको किनारे कर भाजपा ने उनके छोटे भाई अशोक अग्रवाल को टिकट दिया है। उम्मीद की जा रही थी रिश्तों के बीच खड़ी हुई सियासी दीवार टूटेगी और राजकुमार अपने छोटे भाई के नामांकन में आएंगे।
छोटे भाई अशोक अग्रवाल ने कहा भी था कि वो आशीर्वाद लेने जाएंगे, मगर नामांकन के दौरान तमाम निगाहें राजकुमार को ढूंढती रहीं, पर वो नहीं दिखे। बताया कि छोटे भाई का फोन आया था, तो आशीर्वाद दे दिया।
स्वास्थ्य ठीक नहीं है, घर पर हूं। भाजपा ने 2017 में जिले में चुनाव जीतने वाले विधायकों में सिर्फ एक टिकट राजकुमार अग्रवाल का संडीला सीट से काट दिया था। जिसके बाद से वह एमएलसी के टिकट के लिए दौड़ लगा रहे थे।