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भविष्य में मिलेंगे बेहतर चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवाएं भी होंगी बेहतर
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औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। गौराडांडा में निर्मित मेडिकल कॉलेज का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सिद्धार्थनगर से वर्चुअली लोकार्पण किया। मेडिकल कॉलेज परिसर में इसका सीधा प्रसारण किया गया। परिसर में हुए कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिले के प्रभारी मंत्री सतीश महाना ने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण है, जब एक साथ नौ मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण हो रहा है। इससे भविष्य में बेहतर चिकित्सक मिलेंगे और स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर होंगी।
मेडिकल कॉलेज के लोकार्पण समारोह में प्रभारी मंत्री ने कहा कि किसी भी समाज के लिए चिकित्सा और शिक्षा महत्वपूर्ण बिंदु होते हैं। मोदी सरकार चिकित्सा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ रही है।
सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चिंता जता विमर्श किया, तो सामने आया कि संसाधन तो जुटाए जा सकते हैं, लेकिन चिकित्सक भी तैयार करने होंगे। इसके बाद हर जनपद में एक मेडिकल कॉलेज खोले जाने की मंशा प्रधानमंत्री और सीएम ने जताई थी। अब 63 जनपदों में मेडिकल कॉलेज हो गए हैं। सभी में एमबीबीएस की न्यूनतम सौ सीटें रखी गई हैं। कार्यक्रम को विधानसभा उपाध्यक्ष नितिन अग्रवाल, मिश्रिख सांसद अशोक रावत, सदर सांसद जय प्रकाश, गोपामऊ विधायक श्याम प्रकाश ने भी संबोधित किया।
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इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती, चिकित्सा स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग, भाजपा जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा, शाहाबाद विधायक रजनी तिवारी, सवायजपुर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह, बिलग्राम-मल्लावां विधायक आशीष सिंह आशू, बालामऊ विधायक रामपाल वर्मा, सांडी विधायक प्रभाष कुमार, एमएलसी अवनीश सिंह, भी मौजूद रहे। डीएम अविनाश कुमार ने लोकार्पण समारोह में आए अतिथियों का स्वागत किया। मेडिकल कालेज की प्राचार्या डॉ. वाणी गुप्ता ने आभार जताया।
पीएम ने नहीं दिया कोई नाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिद्धार्थ नगर में भाषण के दौरान सोमवार को लोकार्पित नौ मेडिकल कॉलेजों में से आठ के नाम लिए। जिन लोगों के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नाम रखा गया, उनके बारे में भी जानकारी दी, लेकिन हरदोई मेडिकल कॉलेज को कोई नाम नहीं दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरदोई में भी मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण हो रहा है। यहां बता दें कि पूर्व से निर्मित जिला चिकित्सालय का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राम दयाल त्रिवेदी जिला चिकित्सालय है। कुछ माह पूर्व शहीद हुए मेजर पंकज पांडेय के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नाम किए जाने की मांग तेजी से उठी थी और कई जनप्रतिनिधियों ने इसके लिए मुख्यमंत्री और शासन को पत्र भी भेजे। बावजूद इसके कोई नाम मेडिकल कॉलेज को नहीं दिया गया। उधर सोमवार से जनपद के दिग्गज नेता रहे गंगाभक्त सिंह के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नाम किए जाने की मांग सोशल मीडिया पर उठाई गई। गंगाभक्त सिंह जनसंघ के प्रदेश अध्यक्ष रहने के साथ ही कई बार प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और एक बार सांसद भी रहे।
अभी 65 फीसदी निर्माण ही पूरा
मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास फरवरी 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्कालीन केंद्रीय चिकित्सा शिक्षा मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की मौजूदगी में किया था। निर्माण कार्य फरवरी 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण कार्य प्रभावित हुआ। मेडिकल कॉलेज का निर्माण दो हिस्सों में कराया जा रहा है। एकेडमिक और प्रशासनिक ब्लॉक के साथ ही हॉस्टल, प्रोफेसर आवास समेत पढ़ाई संबंधी व्यवस्थाएं गौराडांडा स्थित परिसर में हैं। दूसरा हिस्सा जिला चिकित्सालय में है। यहां पुराने अस्पताल को तोड़कर नए सिरे से ओपीडी, आईपीडी आदि का निर्माण किया जा रहा है। यहां पुराने भवन जमींदोज करने में हुई लापरवाही के कारण कार्य पिछड़ा हुआ है। दोनों ही जगहों पर निर्माण कार्य औसत 65 फीसदी ही पूरा हुआ है।
बढ़ गई निर्माण की लागत
जब मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास हुआ था, तो इसकी लागत दो अरब सात करोड़ रुपये थी। इसी हिसाब से शासन से बजट भी जारी हो रहा था। कोरोना संक्रमण समेत अन्य वजहों से निर्माण कार्य में देरी हुई, तो इसकी लागत भी बढ़ गई। अब इसके निर्माण पर दो अरब, 13 करोड़ 51 लाख रुपये खर्च होंगे। इसके लिए पुनरीक्षित आगणन भी शासन को भेजा जा चुका है।
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मेडिकल कॉलेज के लोकार्पण समारोह में प्रभारी मंत्री ने कहा कि किसी भी समाज के लिए चिकित्सा और शिक्षा महत्वपूर्ण बिंदु होते हैं। मोदी सरकार चिकित्सा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ रही है।
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सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चिंता जता विमर्श किया, तो सामने आया कि संसाधन तो जुटाए जा सकते हैं, लेकिन चिकित्सक भी तैयार करने होंगे। इसके बाद हर जनपद में एक मेडिकल कॉलेज खोले जाने की मंशा प्रधानमंत्री और सीएम ने जताई थी। अब 63 जनपदों में मेडिकल कॉलेज हो गए हैं। सभी में एमबीबीएस की न्यूनतम सौ सीटें रखी गई हैं। कार्यक्रम को विधानसभा उपाध्यक्ष नितिन अग्रवाल, मिश्रिख सांसद अशोक रावत, सदर सांसद जय प्रकाश, गोपामऊ विधायक श्याम प्रकाश ने भी संबोधित किया।
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इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती, चिकित्सा स्वास्थ्य राज्यमंत्री अतुल गर्ग, भाजपा जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा, शाहाबाद विधायक रजनी तिवारी, सवायजपुर विधायक माधवेंद्र प्रताप सिंह, बिलग्राम-मल्लावां विधायक आशीष सिंह आशू, बालामऊ विधायक रामपाल वर्मा, सांडी विधायक प्रभाष कुमार, एमएलसी अवनीश सिंह, भी मौजूद रहे। डीएम अविनाश कुमार ने लोकार्पण समारोह में आए अतिथियों का स्वागत किया। मेडिकल कालेज की प्राचार्या डॉ. वाणी गुप्ता ने आभार जताया।
पीएम ने नहीं दिया कोई नाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिद्धार्थ नगर में भाषण के दौरान सोमवार को लोकार्पित नौ मेडिकल कॉलेजों में से आठ के नाम लिए। जिन लोगों के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नाम रखा गया, उनके बारे में भी जानकारी दी, लेकिन हरदोई मेडिकल कॉलेज को कोई नाम नहीं दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरदोई में भी मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण हो रहा है। यहां बता दें कि पूर्व से निर्मित जिला चिकित्सालय का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित राम दयाल त्रिवेदी जिला चिकित्सालय है। कुछ माह पूर्व शहीद हुए मेजर पंकज पांडेय के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नाम किए जाने की मांग तेजी से उठी थी और कई जनप्रतिनिधियों ने इसके लिए मुख्यमंत्री और शासन को पत्र भी भेजे। बावजूद इसके कोई नाम मेडिकल कॉलेज को नहीं दिया गया। उधर सोमवार से जनपद के दिग्गज नेता रहे गंगाभक्त सिंह के नाम पर मेडिकल कॉलेज का नाम किए जाने की मांग सोशल मीडिया पर उठाई गई। गंगाभक्त सिंह जनसंघ के प्रदेश अध्यक्ष रहने के साथ ही कई बार प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और एक बार सांसद भी रहे।
अभी 65 फीसदी निर्माण ही पूरा
मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास फरवरी 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्कालीन केंद्रीय चिकित्सा शिक्षा मंत्री जगत प्रकाश नड्डा की मौजूदगी में किया था। निर्माण कार्य फरवरी 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण कार्य प्रभावित हुआ। मेडिकल कॉलेज का निर्माण दो हिस्सों में कराया जा रहा है। एकेडमिक और प्रशासनिक ब्लॉक के साथ ही हॉस्टल, प्रोफेसर आवास समेत पढ़ाई संबंधी व्यवस्थाएं गौराडांडा स्थित परिसर में हैं। दूसरा हिस्सा जिला चिकित्सालय में है। यहां पुराने अस्पताल को तोड़कर नए सिरे से ओपीडी, आईपीडी आदि का निर्माण किया जा रहा है। यहां पुराने भवन जमींदोज करने में हुई लापरवाही के कारण कार्य पिछड़ा हुआ है। दोनों ही जगहों पर निर्माण कार्य औसत 65 फीसदी ही पूरा हुआ है।
बढ़ गई निर्माण की लागत
जब मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास हुआ था, तो इसकी लागत दो अरब सात करोड़ रुपये थी। इसी हिसाब से शासन से बजट भी जारी हो रहा था। कोरोना संक्रमण समेत अन्य वजहों से निर्माण कार्य में देरी हुई, तो इसकी लागत भी बढ़ गई। अब इसके निर्माण पर दो अरब, 13 करोड़ 51 लाख रुपये खर्च होंगे। इसके लिए पुनरीक्षित आगणन भी शासन को भेजा जा चुका है।