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27 दिन में पांच केंद्रों पर नहीं हुई मक्के की खरीद
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फोटो-23- माधौगंज मंडी स्थित मक्का क्रय केंद्र। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। पिछले वर्ष 65 सौ मीट्रिक टन से अधिक मक्का की खरीद करने वाले जिले में इस बार क्रय केंद्र खुलने के 25 दिन बाद भी खरीद का खाता नहीं खुल सका है। अधिकारियों के मुताबिक मक्का का बाजार भाव अधिक होने के कारण किसान केंद्र पर बेचने से कतरा रहे हैं।
जिले में बड़े पैमाने पर मक्का की खेती की जाती है, इस बार भी एक अनुमान के मुताबिक जनपद में लगभग 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का की खेती की गई है। फसल तैयार होने के बाद उपज बाजार में आने लगी है। किसानों को मक्का के अच्छे रेट मिल सकें, इसके लिए चार वर्ष से सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मक्के की खरीद करा रही है। इस बार पांच क्रय केंद्र खोले हैं।
इनमें से दो क्रय केंद्र माधौगंज मंडी, हरदोई व सांडी मंडी में एक-एक व सवायजपुर के मिरगावां में एक क्रय केंद्र खोला गया है। जिले में मक्का की खरीद 15 अक्तूबर से शुरू है, लेकिन 25 दिन गुजरने के बाद भी अब तक किसी भी केंद्र पर खरीद की शुरुआत नहीं की जा सकी है। सभी केंद्रों पर खरीद का आंकड़ा निल है।
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किसानों का कहना है कि खुले बाजार में मक्के का भाव 17 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक है। खुले बाजार में मानकों की भी कोई बाध्यता नहीं है। बताया कि केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 1870 प्रति क्विंटल है, लेकिन केंद्रों पर मानक का सख्त हैं। कई किसान नमूने लेकर केंद्र पर गए भी, लेकिन उपज मानक पर खरी न उतर पाने के कारण खरीद नहीं की गई। डिप्टी आरएमओ अनुराग पांडेय ने बताया कि सभी क्रय केंद्र क्रियाशील हैं। प्रयास है कि केंद्रों पर मक्के की खरीद शुरू हो जाए।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में लगभग 35 से 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का की फसल बोई गई है। मल्लावां, माधौगंज व बिलग्राम समेत भरखनी के आंशिक क्षेत्र में मक्का बोया जाता है। हाईब्रिड मक्के की खेती की जाती है। पैदावार भी प्रति हेक्टेयर 50-60 क्विंटल अनुमानित है। इस हिसाब से जिले में करीब 22 लाख क्विंटल मक्का की पैदावार की उम्मीद है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार अक्तूबर में हुई बेमौसम बारिश ने मक्का की पैदावार को प्रभावित किया है। इससे इतर उपज की गुणवत्ता पर काफी प्रभाव पड़ा है। कृषि वैज्ञानिक दीपक मिश्रा ने बताया कि बारिश के दौरान ज्यादा नुकसान उस फसल को हुआ है जो तैयार थी। पानी अंदर जाने पर दाना सड़ गया। उसमें फंगस लग गया या फिर व काला हो गया है।
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जिले में बड़े पैमाने पर मक्का की खेती की जाती है, इस बार भी एक अनुमान के मुताबिक जनपद में लगभग 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का की खेती की गई है। फसल तैयार होने के बाद उपज बाजार में आने लगी है। किसानों को मक्का के अच्छे रेट मिल सकें, इसके लिए चार वर्ष से सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मक्के की खरीद करा रही है। इस बार पांच क्रय केंद्र खोले हैं।
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इनमें से दो क्रय केंद्र माधौगंज मंडी, हरदोई व सांडी मंडी में एक-एक व सवायजपुर के मिरगावां में एक क्रय केंद्र खोला गया है। जिले में मक्का की खरीद 15 अक्तूबर से शुरू है, लेकिन 25 दिन गुजरने के बाद भी अब तक किसी भी केंद्र पर खरीद की शुरुआत नहीं की जा सकी है। सभी केंद्रों पर खरीद का आंकड़ा निल है।
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किसानों का कहना है कि खुले बाजार में मक्के का भाव 17 सौ रुपये प्रति क्विंटल तक है। खुले बाजार में मानकों की भी कोई बाध्यता नहीं है। बताया कि केंद्रों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य 1870 प्रति क्विंटल है, लेकिन केंद्रों पर मानक का सख्त हैं। कई किसान नमूने लेकर केंद्र पर गए भी, लेकिन उपज मानक पर खरी न उतर पाने के कारण खरीद नहीं की गई। डिप्टी आरएमओ अनुराग पांडेय ने बताया कि सभी क्रय केंद्र क्रियाशील हैं। प्रयास है कि केंद्रों पर मक्के की खरीद शुरू हो जाए।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में लगभग 35 से 38 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का की फसल बोई गई है। मल्लावां, माधौगंज व बिलग्राम समेत भरखनी के आंशिक क्षेत्र में मक्का बोया जाता है। हाईब्रिड मक्के की खेती की जाती है। पैदावार भी प्रति हेक्टेयर 50-60 क्विंटल अनुमानित है। इस हिसाब से जिले में करीब 22 लाख क्विंटल मक्का की पैदावार की उम्मीद है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार अक्तूबर में हुई बेमौसम बारिश ने मक्का की पैदावार को प्रभावित किया है। इससे इतर उपज की गुणवत्ता पर काफी प्रभाव पड़ा है। कृषि वैज्ञानिक दीपक मिश्रा ने बताया कि बारिश के दौरान ज्यादा नुकसान उस फसल को हुआ है जो तैयार थी। पानी अंदर जाने पर दाना सड़ गया। उसमें फंगस लग गया या फिर व काला हो गया है।