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Hardoi News: 39 साल पुराने हत्याकांड में उम्रकैद बरकरार, सगे भाइयों को 15 दिन में करना होगा समर्पण

Sun, 19 Jul 2026 11:00 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jul 2026 11:00 PM IST
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Life sentence upheld in 39-year-old murder case; biological brothers must surrender within 15 days.
हरदोई। हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र में 39 साल पहले हुए हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दो सगे भाइयों की अपील खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने जिला अदालत से सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए जीवित दो अभियुक्तों की जमानत भी खारिज कर दी। 15 दिन के अंदर आत्म समर्पण करने का आदेश न्यायालय ने दिया है।
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हरपालपुर कोतवाली क्षेत्र के महसोलापुर गांव निवासी ओमप्रकाश ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि सात अप्रैल 1987 को पारिवारिक रंजिश के चलते गांव के ही रामलाल, अपने पुत्रों बटेश्वर, रामनरेश और पत्नी फुल्ला के साथ हथियारों से लैस होकर ओमप्रकाश के घर पहुंचे थे। यहां फायरिंग कर दी थी। घटना में ओम प्रकाश के भाई सूबेदार, ओम प्रकाश, मोतीलाल और मुरली घायल हो गए थे।
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आठ अप्रैल को इलाज के दौरान सूबेदार की मौत हो गई थी। घटना के दिन दर्ज की गई हत्या के प्रयास की प्राथमिकी में सूबेदार की मौत के बाद हत्या की धाराएं बढ़ाई गई थीं। तत्कालीन जिला जज ने आठ नवंबर 1989 को चारों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर कहा था कि उन्हें रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है। उनका तर्क था कि घटना अंधेरे में हुई थी। इसलिए पहचान संभव नहीं थी। एफआईआर को समय से पहले दर्ज बताया गया, मृतक के डाइंग डिक्लेरेशन को अविश्वसनीय बताया और स्वतंत्र गवाह पेश न किए जाने का भी तर्क दिया था।
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न्यायमूर्ति रजनीश कुमार और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा चिकित्सकीय प्रमाणन के बाद दर्ज मृत्यु पूर्व बयान पूरी तरह विश्वसनीय है। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की गवाही, चिकित्सकीय साक्ष्य और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य अभियोजन की कहानी की पुष्टि करते हैं। मामूली विरोधाभासों के आधार पर अभियोजन के पूरे मामले को खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने अपील खारिज करते हुए बटेश्वर और रामनरेश को 15 दिन के भीतर आत्मसमर्पण कर शेष सजा भुगतने का आदेश दिया।
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