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Hardoi News: गला रेतकर पति की हत्या करने में पत्नी को उम्रकैद
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हरदोई। गला रेतकर पति की हत्या करने के करीब साढ़े पांच साल पुराने मामले में जिला जज राजकुमार सिंह ने पत्नी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सूरज पाल सिंह ने बताया कि मझिला थानाक्षेत्र के रेउरी गांंव के मजरा टीकमपुरवा निवासी बालादीन ने 10 जून 2018 को मझिला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उसका बड़ा पुत्र कमलेश (42) गांव में ही अपनी पत्नी गीता के साथ अलग मकान में रहता था। 10 जून 2018 को दिन में करीब डेढ़ बजे गीता ने घरेलू विवाद के चलते कमलेश की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद गीता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जिला जज राज कुमार सिंह ने मामले की सुनवाई पूरी कर गीता को पति की हत्या में दोषी करार दिया। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई और जुर्माना लगाया।
82 तारीखों में सुनवाई के बाद आया फैसला
पति की हत्या करने वाली गीता को पुलिस ने घटना के बाद ही गिरफ्तार कर लिया था। गीता को सजा दिलाने के लिए जहां सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने मजबूती से तथ्य रखे, वहीं पुलिस ने भी पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध कराकर केस को मजबूत किया। 82 तारीखों में सुनवाई के साथ ही मामले में फैसला आ गया। इस दौरान शासकीय अधिवक्ता की ओर से आठ गवाह पेश किए गए थे। पुलिस ने वर्ष 2018 में घटना में आरोप पत्र दाखिल किया था।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सूरज पाल सिंह ने बताया कि मझिला थानाक्षेत्र के रेउरी गांंव के मजरा टीकमपुरवा निवासी बालादीन ने 10 जून 2018 को मझिला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि उसका बड़ा पुत्र कमलेश (42) गांव में ही अपनी पत्नी गीता के साथ अलग मकान में रहता था। 10 जून 2018 को दिन में करीब डेढ़ बजे गीता ने घरेलू विवाद के चलते कमलेश की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद गीता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जिला जज राज कुमार सिंह ने मामले की सुनवाई पूरी कर गीता को पति की हत्या में दोषी करार दिया। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई और जुर्माना लगाया।
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82 तारीखों में सुनवाई के बाद आया फैसला
पति की हत्या करने वाली गीता को पुलिस ने घटना के बाद ही गिरफ्तार कर लिया था। गीता को सजा दिलाने के लिए जहां सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने मजबूती से तथ्य रखे, वहीं पुलिस ने भी पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध कराकर केस को मजबूत किया। 82 तारीखों में सुनवाई के साथ ही मामले में फैसला आ गया। इस दौरान शासकीय अधिवक्ता की ओर से आठ गवाह पेश किए गए थे। पुलिस ने वर्ष 2018 में घटना में आरोप पत्र दाखिल किया था।
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