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Hardoi News: रन आउट देने पर अंपायर की हत्या कर खान ने जरायम की दुनिया में रखा था कदम

Tue, 13 Jun 2023 12:02 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Tue, 13 Jun 2023 12:02 AM IST
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Khan entered the world of zarayam by killing the umpire after giving run out
फोटो 19 इमरजेंसी कक्ष के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी। संवाद
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फोटो 20 इमरजेंसी कक्ष में जानकारी लेते एसपी राजेश द्विवेदी। संवाद

फोटो 21 खान मुबारक की मौत की जानकारी देते डिप्टी सीएमओ डॉ. पंकज मिश्रा। संवाद
- इसके बाद लूट हत्या व डकैती उसका पेशा बन गया
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। खान मुबारक का शुरुआती जीवन सामान्य रहा, लेकिन जब वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने पहुंचा तो वह जुर्म की दुनिया में आ गया। खान मुबारक ने क्रिकेट मैच के दौरान रन आउट देने पर अंपायर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लूट, हत्या और डकैती पेशा बन गया।
इसके बाद साल 2006 में खान मुबारक का नाम कथित तौर पर एक डाकखाने की डकैती में सामने आया। फिर खान मुबारक की अदावत मुन्ना बजरंगी के साथ बढ़ी। हालांकि, खान मुबारक उन दिनों अपने बड़े भाई जफर सुपारी के साथ जुड़ चुका था। खान मुबारक का नाम तब तेजी से सामने आया जब मुंबई में 2006 में काला घोड़ा हत्याकांड हुआ। छोटा राजन गिरोह ने दिनदहाड़े इस पूरे हत्याकांड को अंजाम दिया था। इसमें खान मुबारक ने कई साथियों के साथ मिलकर एक पुलिस वैन में बंद दो आरोपियों को गोलियों से भून दिया था। इस मामले के बाद साल 2007 में एक कैश वैन लूटकांड में एसटीएफ ने खान मुबारक को गिरफ्तार किया था। इसी मामले में पूछताछ के दौरान खान मुबारक ने काला घोड़ा हत्याकांड का खुलासा किया था।
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इनसेट
पांच साल नैनी जेल में भी रहा था खान मुबारक
साल 2007 में कैश वैन लूट कांड में खान मुबारक पांच साल नैनी जेल में बंद रहा। जब 2012 में बाहर आया तो फिर से आंबेडकर नगर में रंगदारी और वसूली का काम शुरू किया। वहीं शूटर ओसामा की हत्या में नाम सामने आया। इसके बाद खान मुबारक ने जिले के भट्ठा कारोबारी ऐनुद्दीन की मौत हो गई। इस मामले सहित कई अन्य केस में भी खान मुबारक जेल गया लेकिन सबूत और गवाह न मिलने पर 2016 में बाहर आ गया। साल 2017 में बसपा नेता जुरगाम मेहंदी पर जानलेवा हमला कराया, इसमें मेहंदी को आधा दर्जन गोली लगी पर किस्मत से वह बच गए। इसके बाद उसे लखनऊ से यूपी एसटीएफ ने खान मुबारक को अरेस्ट कर लिया गया। फिर एक साल बाद 2018 में जुरगाम मेंहदी पर फिर हमला हो गया और मेहंदी की मौत हो गई। कथित तौर पर खान मुबारक को इस हत्या का जिम्मेदार माना गया था।
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