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मां के जयकारों से गूंजे देवी मंदिर
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
Updated Sat, 01 Oct 2016 11:55 PM IST
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राम जानकी मंदिर में पूजन करते पुजारी।
- फोटो : अमर उजाला
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हरदोई। शारदीय नवरात्र के पहले शनिवार को घर हो या मंदिर सुबह से ही श्रद्धा में डूबे भक्तों ने मां का पूजन-अर्चन शुरू कर दिया। पहले दिन शैलपुत्री की अराधना की गई।
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शहर के देवी मंदिरों में सुबह से लेकर देर शाम तक मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। पहले दिन मां दुर्गा देवी मंदिर, माता फूलमती देवी मंदिर, मां श्रवण देवी मंदिर, बाबा सिद्वेश्वरनाथ मंदिर, बाबा शिव भोले मंदिर आदि मंदिरों में दिनभर पूजन-अर्चन जारी रहा।
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पंजाबी कॉलोनी में भी त्रिनेत्र फाउंडेशन के तत्वावधान में भक्तों ने मिलकर मां दुर्गा का पंडाल सजाया। जिसमें मां दुर्गा की मूर्ति के साथ श्री गणेश एवं रिद्धि सिद्धि की मूर्तियों को भी सजाया गया है।
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समिति अध्यक्ष आनंद दीक्षित, अमृत गुप्ता, महेश मिश्र, अभिषेक मल्होत्रा, आकाश गुप्ता आदि पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने शनिवार को पंडाल में मां की प्रतिमा को स्थापित कर उनकी विधि विधान से पूजा अर्चना शुरू की।
उधर, ऊंचाथोक मोहल्ले में भी प्रथम श्री दुर्गा पूजन समारोह का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं ने धूमधाम से शोभायात्रा निकाली। इस मौके पर महिला श्रद्धालुओं ने कलश यात्रा भीनिकाली।
इस मौके पर गोपेश दीक्षित, मदन गुप्ता आदि ने बताया कि 10 अक्तूबर तक पंडाल में विधि-विधान से पूजन अर्चन का कार्यक्रम जारी रहेगा। 11 अक्तूबर को विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी। शास्त्री उमाकांत अवस्थी ने बताया कि पूर्व जन्म में शैलपुत्री के पिता राजा दक्ष थे।
उन्हाेंने एक बार यज्ञ किया। जिसमें शिव को निमंत्रण नहीं भेजा। सती भगवान शंकर के मना करने पर भी पिता के यहां यज्ञ में भाग लेनी गईं। यज्ञ मंडप में शिव का आसन भी न था। देवी को शिव का अपमान सहन नहीं हुआ और वह यज्ञ में सती हो गईं। सती शैलराज की पुत्री पार्वती के रूप में दूसरा जन्म लेकर शिवांगी बनी। प्रतिपदा में माता के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा घटस्थापन के साथ करना मंगलकारी होता है।