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पत्नी के हत्यारे को आजीवन कारावास की सजा
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हरदोई। पत्नी की हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) हेमेंद्र कुमार सिंह ने दोषी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 37 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अमलेंद्र सिंह ने बताया कि 18 फरवरी 2014 को पिहानी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम इटारा निवासी मायादेवी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसका पुत्र सीताराम 18 फरवरी की सुबह पत्नी ऊषा को गन्ने के खेत में ले गया था। इसके बाद ऊषा नहीं लौटी। 21 फरवरी को गांव के ही एक व्यक्ति को गन्ने के खेत में ऊषा का शव पड़ा मिला। विवेचना के दौरान मायादेवी ने पुलिस को बताया कि ऊषा का चाल चलन ठीक नहीं था। इसको लेकर ऊषा का विवाद पति सीताराम से आए दिन होता था।
उसने आशंका जताई थी कि सीताराम ने ही ऊषा की हत्या कर दी है। पुलिस ने सीताराम को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल तमंचा भी बरामद किया था। न्यायालय में चली सुनवाई के बाद साक्ष्यों के आधार पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमेंद्र कुमार सिंह ने सीताराम को हत्या का दोषी करार दिया। उसे आजीवन कारावास और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अवैध शस्त्र रखने के आरोप में दो वर्ष की कैद और दो हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माने की 80 फीसदी रकम मृतका के बच्चों को देने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अमलेंद्र सिंह ने बताया कि 18 फरवरी 2014 को पिहानी कोतवाली क्षेत्र के ग्राम इटारा निवासी मायादेवी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसका पुत्र सीताराम 18 फरवरी की सुबह पत्नी ऊषा को गन्ने के खेत में ले गया था। इसके बाद ऊषा नहीं लौटी। 21 फरवरी को गांव के ही एक व्यक्ति को गन्ने के खेत में ऊषा का शव पड़ा मिला। विवेचना के दौरान मायादेवी ने पुलिस को बताया कि ऊषा का चाल चलन ठीक नहीं था। इसको लेकर ऊषा का विवाद पति सीताराम से आए दिन होता था।
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उसने आशंका जताई थी कि सीताराम ने ही ऊषा की हत्या कर दी है। पुलिस ने सीताराम को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल तमंचा भी बरामद किया था। न्यायालय में चली सुनवाई के बाद साक्ष्यों के आधार पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमेंद्र कुमार सिंह ने सीताराम को हत्या का दोषी करार दिया। उसे आजीवन कारावास और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अवैध शस्त्र रखने के आरोप में दो वर्ष की कैद और दो हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माने की 80 फीसदी रकम मृतका के बच्चों को देने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है।
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