{"_id":"47c5e48912faa35993230d9b104b96f5","slug":"human-life-is-priceless-wisdom-of-the-gita-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘मानव जीवन के लिए अमूल्य है गीता का ज्ञान’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘मानव जीवन के लिए अमूल्य है गीता का ज्ञान’
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 19 May 2015 12:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गीता ज्ञान जीवन के लिए अमूूल्य है। गीता के माध्यम
विज्ञापन
से जीवन के सत्य को समझा जा सकता है। मोह माया रूपी इस नश्वर संसार में मन
लगाने की जगह हमें ईश्वर की भक्ति में मन लगाना चाहिए, तभी हमारा जीवन
सार्र्थक होगा।
राम जानकी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण के दूसरे दिन सोमवार को कथा व्यास रतिंद्र स्वरूप शास्त्री ने बताया कि जीवन में इच्छाओं का महत्व अहम होता है। मानव की तमाम इच्छाएं होती हैं, जिनकी पूर्र्ति के लिए वो दिन रात लगा रहता है, पर जब उसकी इच्छा सत्संग औैर भक्ति की हो जाती है तो वो कुछ ही समय में जीवन के सत्य की ओर बढ़ चलता है।
उन्होंने कहा कि आज चारो तरफ स्वार्थ परकता एवं भृष्टाचार है, इसे तभी समाप्त किया जा सकता है, जब लोग जीवन के सत्य को समझे और जीवन के सत्य को गीता सार के माध्यम से समझा जा सकता है। कहा कि हमें भरत के त्याग से एवं राम के चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए।
कहा कि श्रीराम ने आदर्श चरित्र के माध्यम से लोगों को उनके कर्तव्यों के बारे में समझाया है तो भरत ने राजपाठ ठुकराकर त्याग और प्रेम का आदर्र्श उदाहरण पेश किया था। कहा कि हमें बुराइयों को त्याग कर अच्छाइयों का अपनाकर धर्म मार्ग पर चलना चाहिए।
कहा कि धर्मों की गणना कभी नहीं की जा सकती। कहने को अनेक प्रकार के धर्म, अनेक कर्म, अनेक प्रकार की धर्म के प्रति भावनाएं, पर तुलसीदास ने रामचरित मानस में ऐसा धर्म लिखा कि जिससे समस्त धर्मों के व्यक्ति ईश्वर को पा सकते हैं। मुख्य यजमान के रूप में राजीव मिश्रा मौजूद थे।
राम जानकी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण के दूसरे दिन सोमवार को कथा व्यास रतिंद्र स्वरूप शास्त्री ने बताया कि जीवन में इच्छाओं का महत्व अहम होता है। मानव की तमाम इच्छाएं होती हैं, जिनकी पूर्र्ति के लिए वो दिन रात लगा रहता है, पर जब उसकी इच्छा सत्संग औैर भक्ति की हो जाती है तो वो कुछ ही समय में जीवन के सत्य की ओर बढ़ चलता है।
उन्होंने कहा कि आज चारो तरफ स्वार्थ परकता एवं भृष्टाचार है, इसे तभी समाप्त किया जा सकता है, जब लोग जीवन के सत्य को समझे और जीवन के सत्य को गीता सार के माध्यम से समझा जा सकता है। कहा कि हमें भरत के त्याग से एवं राम के चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए।
कहा कि श्रीराम ने आदर्श चरित्र के माध्यम से लोगों को उनके कर्तव्यों के बारे में समझाया है तो भरत ने राजपाठ ठुकराकर त्याग और प्रेम का आदर्र्श उदाहरण पेश किया था। कहा कि हमें बुराइयों को त्याग कर अच्छाइयों का अपनाकर धर्म मार्ग पर चलना चाहिए।
कहा कि धर्मों की गणना कभी नहीं की जा सकती। कहने को अनेक प्रकार के धर्म, अनेक कर्म, अनेक प्रकार की धर्म के प्रति भावनाएं, पर तुलसीदास ने रामचरित मानस में ऐसा धर्म लिखा कि जिससे समस्त धर्मों के व्यक्ति ईश्वर को पा सकते हैं। मुख्य यजमान के रूप में राजीव मिश्रा मौजूद थे।