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हरदोई: ...यहां तो इलाज के नाम पर मासूमों को परोसा जा रहा इंफेक्शन
Wed, 15 Feb 2023 10:54 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
Updated Wed, 15 Feb 2023 10:54 PM IST
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यहां तो इलाज के नाम पर बच्चों को बांट रहे संक्रमण
- 11 बेड पर 16 बच्चों का हो रहा इलाज
- रेड यंत्र फार्मर पर एक साथ दो-दो बच्चे किए गए भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मौसम में आए बदलाव का असर बच्चों में दिख रहा है। बड़ी संख्या में वायरल और संक्रमण से ग्रसित बच्चे रोजाना जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें से कई गंभीर बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती किया गया है।
स्थिति यह हैं कि 11 रेड फार्मर बेड वाले इस वार्ड में 16 बच्चे भर्ती हैं। ऐसे में इलाज के नाम पर इन्हें संक्रमण बांटा जा रहा है।
मासूमों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला महिला चिकित्सालय में एक एसएनसीयू वार्ड की व्यवस्था है। यहां पर कम दिनों में जन्म लेने वाले मासूम बच्चों के इलाज की बेहतर सुविधा प्रदान की जाती है। मौसम में आए बदलाव के बाद अचानक अस्पताल में बच्चों की संख्या बढ़ गई है। इससे अस्पताल में बेड कम पड़ गए हैं।
यहां वार्ड में एक बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं। इससे मासूमों में संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। इसकी शिकायत करने पर भी डॉक्टर चेत नहीं रहे हैं।
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ऐसे फैलता संक्रमण
डॉक्टर की मानें तो अगर किसी को संक्रमण है और उसी बेड पर दूसरे बच्चे को शिफ्ट किया जाता है तो उसे संक्रमित होने से कोई नहीं बचा सकता है। कुछ इसी तरह की हकीकत एसएनसीयू वार्ड में देखने को मिल रही है। जहां एक ही बेड पर दो-दो का इलाज किया जा रहा है। 11 बेड पर 16 बच्चों को शिफ्ट किया गया है। इसी से आप स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के प्रति जिम्मेदार कितना सचेत हैं इसकी हकीकत को परखा सकते हैं।
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वार्ड में स्टाफ की व्यवस्था
एसएनसीयू वार्ड में 24 घंटे कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है जो बच्चों की स्वयं देखभाल करते हैं। रात्रि ड्यूटी 12 घंटे की होती है। दिन में 6-6 घंटे पर कर्मचारियों की ड्यूटी बदलती रहती है।
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बच्चों की मां की जुबानी
अहिरोरी विकास खंड के हूंसेपुर निवासी स्माइल की पत्नी जूली ने मंगलवार को पुत्र को जन्म दिया था। उनका कहना है कि कम वजन के कारण उसके पुत्र का एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है।
वहीं शाहाबाद कस्बे के मौलागंज निवासी मोमीन की पत्नी सहाना ने मंगलवार को एक पुत्री को जन्म दिया था। सांस लेने में परेशानी के कारण उसे एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है। उनका कहना है कि यहां पर बेड के अभाव दो-दो बच्चों को एक बेड पर शिफ्ट किया जा रहा है।
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- 11 बेड पर 16 बच्चों का हो रहा इलाज
- रेड यंत्र फार्मर पर एक साथ दो-दो बच्चे किए गए भर्ती
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। मौसम में आए बदलाव का असर बच्चों में दिख रहा है। बड़ी संख्या में वायरल और संक्रमण से ग्रसित बच्चे रोजाना जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। इनमें से कई गंभीर बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती किया गया है।
स्थिति यह हैं कि 11 रेड फार्मर बेड वाले इस वार्ड में 16 बच्चे भर्ती हैं। ऐसे में इलाज के नाम पर इन्हें संक्रमण बांटा जा रहा है।
मासूमों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला महिला चिकित्सालय में एक एसएनसीयू वार्ड की व्यवस्था है। यहां पर कम दिनों में जन्म लेने वाले मासूम बच्चों के इलाज की बेहतर सुविधा प्रदान की जाती है। मौसम में आए बदलाव के बाद अचानक अस्पताल में बच्चों की संख्या बढ़ गई है। इससे अस्पताल में बेड कम पड़ गए हैं।
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यहां वार्ड में एक बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं। इससे मासूमों में संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। इसकी शिकायत करने पर भी डॉक्टर चेत नहीं रहे हैं।
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डॉक्टर की मानें तो अगर किसी को संक्रमण है और उसी बेड पर दूसरे बच्चे को शिफ्ट किया जाता है तो उसे संक्रमित होने से कोई नहीं बचा सकता है। कुछ इसी तरह की हकीकत एसएनसीयू वार्ड में देखने को मिल रही है। जहां एक ही बेड पर दो-दो का इलाज किया जा रहा है। 11 बेड पर 16 बच्चों को शिफ्ट किया गया है। इसी से आप स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के प्रति जिम्मेदार कितना सचेत हैं इसकी हकीकत को परखा सकते हैं।
वार्ड में स्टाफ की व्यवस्था
एसएनसीयू वार्ड में 24 घंटे कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है जो बच्चों की स्वयं देखभाल करते हैं। रात्रि ड्यूटी 12 घंटे की होती है। दिन में 6-6 घंटे पर कर्मचारियों की ड्यूटी बदलती रहती है।
बच्चों की मां की जुबानी
अहिरोरी विकास खंड के हूंसेपुर निवासी स्माइल की पत्नी जूली ने मंगलवार को पुत्र को जन्म दिया था। उनका कहना है कि कम वजन के कारण उसके पुत्र का एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है।
वहीं शाहाबाद कस्बे के मौलागंज निवासी मोमीन की पत्नी सहाना ने मंगलवार को एक पुत्री को जन्म दिया था। सांस लेने में परेशानी के कारण उसे एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है। उनका कहना है कि यहां पर बेड के अभाव दो-दो बच्चों को एक बेड पर शिफ्ट किया जा रहा है।