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कमीशन के खेल में पेयजल योजना फेल !
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फोटो- 6- आजाद नगर में बनी पानी की टंकी ।
- फोटो : HARDOI
हरदोई। हर घर तक नल से जल पहुंचाने की योजना में करोड़ों खर्च होने के बाद भी नल से जल घरों तक तो नहीं पहुंचा, लेकिन डाली गई पाइप लाइन में हुए खेल से पानी नालियों तक जरूर पहुंच गया।
लोगों का कहना है कि लाइन डालने में घटिया स्तर के पाइप का प्रयोग किया गया। इसका नतीजा है कि जब भी लाइन चालू करने के लिए टेस्टिंग होती है, पानी के प्रेशर से पाइप लाइन फट जाती हैं।
लीकेज के चलते पानी नलों की बजाय नालियों में जाता है। यही कारण है कि वाटर ओवरहेड टैंक एवं बोरवेल आदि का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी योजना के तहत लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
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अमृत योजना हरदोई शहर
शहर में अमृत योजना के तहत घर-घर शुद्ध पेयजल वाटर लाइन से पहुंचाने के लिए निर्धारित किए गए आठ जोनों में पानी की टंकी का निर्माण हुआ व नलकूप बनवाए गए। इसके साथ ही वाटर लाइन डालने का काम हो चुका है।
कार्यदायी संस्था जल निगम को वाटर लाइन एवं कनेक्शन देने का कार्य पूरा करने के बाद पेयजल आपूर्ति सुचारु करके इन सभी जोन का प्रबंधन नगर पालिका को हैंडओवर करना है।
जोन एक के अलावा सभी जोन में पाइप लाइनें लीक हैं। परीक्षण के दौरान पाइप लाइन प्रेशर के कारण फट गईं। नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी लाइनें चालू और कनेक्शन नहीं होते, तब तक हैंडओवर नहीं लिया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई गईं पानी की टंकियों एवं वाटर लाइन का भी हाल खराब है। करोड़ों की लागत से पूरे किए गए इन प्रोजेक्टों में खेल किया गया। इस कारण हर घर तक नल से जल नहीं पहुंच पा रहा है।
कुरसैली, गंजजालाबाद, ककरा, बेंहदरकला, गौसगंज, रायपुर, रैंसो, लोन्हारा, अंर्धरा, कुचिलाबिजना, मंझिगांव, बावन, अहिरोरी, पंहुतेरा, तेजीपुर, अटवाकटैया, रानीगंज, खजुराहा, मंझिला, मुुंडेर, हरपालपुर, पलिया, दहेलिया, सधई बेहटा, तेरवा दहिगवां, खेमीपुर, नारायनपुरवा, भरावन, मानपुर, पसनेर, परसोला, छिबरामऊ, जरसेनामऊ आदि अधिकांश स्थानों पर पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है।
जिम्मेदारों की बात
ग्रामीण क्षेत्रों में जो भी दिक्कतें हैं, उन्हें ग्राम पंचायतों को दुरुस्त कराना है। काफी समय पहले ही सिस्टम को ग्राम पंचायतों को हैंडओवर किया जा चुका है। नगरीय क्षेत्रों के लिए शासन ने विभाग का अलग जोन लखनऊ में बना दिया है। वहां के अफसरों को अवगत कराया जा चुका है। आगे की कार्रवाई उन्हीं के स्तर से होनी है। - एके त्रिपाठी, एक्सईएन, जल निगम
शहर में अमृत योजना के तहत वाटर लाइनों को शुरू कराने के लिए संबंधित विभाग से लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। -रवी शंकर, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका, हरदोई ।
110 किमी पड़ी पाइप लाइन
अमृत योजना के तहत शहर को आठ जोन में बांटा गया था। जोन एक में 1000 किलोलीटर क्षमता की टंकी, दो नलकूप, 20.20 किलोमीटर लाइन आदि का कार्य 4 करोड़ 18 लाख रुपये से कराया गया।
नगर पालिका प्रशासन के अनुसार यहां पेयजल आपूर्ति चालू है। इस जोन में वार्ड संख्या-5 एवं 7 के मोहल्ले शामिल हैं। शहर के अन्य सभी वार्ड के लिए जोन संख्या दो, तीन, चार, पांच, छह, सात, आठ के लिए सामूहिक कार्ययोजना के तहत पांच नलकूप, 1500 और 1600 किलोलीटर क्षमता की दो टंकियां, 90 किलोमीटर वाटर लाइन आदि के कार्य लगभग 35 करोड़ 61 लाख रुपये से कराए गए।
इस तरह से शहर में करीब 110 किलोमीटर लंबाई में पाइप लाइन डालने के साथ ही तीन नई टंकियां बनाई गईं और करीब 39 करोड़ 80 लाख रुपये खर्च किए गए।
एक साल से काम बंद
जल निगम को सभी कार्य दिसंबर 2020 तक पूरे करने थे, लेकिन कोरोना के चलते कार्य मार्च 2021 तक चला। अप्रैल 2021 में नगर पालिका को पेयजल सिस्टम हैंडओवर होना था, लेकिन परीक्षण के दौरान लीकेज पाइप फटने के चलते मामला अटक गया। तब से एक साल का समय सिर्फ बातों एवं चर्चाओं में बीत गया। जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं।
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लोगों का कहना है कि लाइन डालने में घटिया स्तर के पाइप का प्रयोग किया गया। इसका नतीजा है कि जब भी लाइन चालू करने के लिए टेस्टिंग होती है, पानी के प्रेशर से पाइप लाइन फट जाती हैं।
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लीकेज के चलते पानी नलों की बजाय नालियों में जाता है। यही कारण है कि वाटर ओवरहेड टैंक एवं बोरवेल आदि का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी योजना के तहत लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है।
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अमृत योजना हरदोई शहर
शहर में अमृत योजना के तहत घर-घर शुद्ध पेयजल वाटर लाइन से पहुंचाने के लिए निर्धारित किए गए आठ जोनों में पानी की टंकी का निर्माण हुआ व नलकूप बनवाए गए। इसके साथ ही वाटर लाइन डालने का काम हो चुका है।
कार्यदायी संस्था जल निगम को वाटर लाइन एवं कनेक्शन देने का कार्य पूरा करने के बाद पेयजल आपूर्ति सुचारु करके इन सभी जोन का प्रबंधन नगर पालिका को हैंडओवर करना है।
जोन एक के अलावा सभी जोन में पाइप लाइनें लीक हैं। परीक्षण के दौरान पाइप लाइन प्रेशर के कारण फट गईं। नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी लाइनें चालू और कनेक्शन नहीं होते, तब तक हैंडओवर नहीं लिया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई गईं पानी की टंकियों एवं वाटर लाइन का भी हाल खराब है। करोड़ों की लागत से पूरे किए गए इन प्रोजेक्टों में खेल किया गया। इस कारण हर घर तक नल से जल नहीं पहुंच पा रहा है।
कुरसैली, गंजजालाबाद, ककरा, बेंहदरकला, गौसगंज, रायपुर, रैंसो, लोन्हारा, अंर्धरा, कुचिलाबिजना, मंझिगांव, बावन, अहिरोरी, पंहुतेरा, तेजीपुर, अटवाकटैया, रानीगंज, खजुराहा, मंझिला, मुुंडेर, हरपालपुर, पलिया, दहेलिया, सधई बेहटा, तेरवा दहिगवां, खेमीपुर, नारायनपुरवा, भरावन, मानपुर, पसनेर, परसोला, छिबरामऊ, जरसेनामऊ आदि अधिकांश स्थानों पर पेयजल आपूर्ति नहीं हो रही है।
जिम्मेदारों की बात
ग्रामीण क्षेत्रों में जो भी दिक्कतें हैं, उन्हें ग्राम पंचायतों को दुरुस्त कराना है। काफी समय पहले ही सिस्टम को ग्राम पंचायतों को हैंडओवर किया जा चुका है। नगरीय क्षेत्रों के लिए शासन ने विभाग का अलग जोन लखनऊ में बना दिया है। वहां के अफसरों को अवगत कराया जा चुका है। आगे की कार्रवाई उन्हीं के स्तर से होनी है। - एके त्रिपाठी, एक्सईएन, जल निगम
शहर में अमृत योजना के तहत वाटर लाइनों को शुरू कराने के लिए संबंधित विभाग से लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। -रवी शंकर, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका, हरदोई ।
110 किमी पड़ी पाइप लाइन
अमृत योजना के तहत शहर को आठ जोन में बांटा गया था। जोन एक में 1000 किलोलीटर क्षमता की टंकी, दो नलकूप, 20.20 किलोमीटर लाइन आदि का कार्य 4 करोड़ 18 लाख रुपये से कराया गया।
नगर पालिका प्रशासन के अनुसार यहां पेयजल आपूर्ति चालू है। इस जोन में वार्ड संख्या-5 एवं 7 के मोहल्ले शामिल हैं। शहर के अन्य सभी वार्ड के लिए जोन संख्या दो, तीन, चार, पांच, छह, सात, आठ के लिए सामूहिक कार्ययोजना के तहत पांच नलकूप, 1500 और 1600 किलोलीटर क्षमता की दो टंकियां, 90 किलोमीटर वाटर लाइन आदि के कार्य लगभग 35 करोड़ 61 लाख रुपये से कराए गए।
इस तरह से शहर में करीब 110 किलोमीटर लंबाई में पाइप लाइन डालने के साथ ही तीन नई टंकियां बनाई गईं और करीब 39 करोड़ 80 लाख रुपये खर्च किए गए।
एक साल से काम बंद
जल निगम को सभी कार्य दिसंबर 2020 तक पूरे करने थे, लेकिन कोरोना के चलते कार्य मार्च 2021 तक चला। अप्रैल 2021 में नगर पालिका को पेयजल सिस्टम हैंडओवर होना था, लेकिन परीक्षण के दौरान लीकेज पाइप फटने के चलते मामला अटक गया। तब से एक साल का समय सिर्फ बातों एवं चर्चाओं में बीत गया। जिम्मेदार बेखबर बने हुए हैं।