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हर हर गंगे बोले गंगा में लगाई डुबकी
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फोटो-16- हरपालपुर के चियासर घाट पर भोर में स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालू। संवाद
- फोटो : HARDOI
बिलग्राम/हरपालपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर जनपद में बिलग्राम के राजघाट व हरपालपुर के चियासर घाट समेत अन्य घाटों पर पहुंच कर श्रद्धालुओं ने मां गंगा की आरती व पूजन किया। इसके बाद श्रद्धा के साथ गंगा स्नान किया। इस बार घाटों पर कम भीड़ रही। इसके बावजूद श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मौके पर पुलिस बल तैनात रहा।
बिलग्राम में इस बार घाट पर मेले का आयोजन नहीं किया गया। इससे घाट पर दुकानें नहीं लग सकीं। हालांकि देर रात से लेकर शाम तक घाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने व पूजन एवं आरती के बाद गंगा स्नान करने का सिलसिला जारी रहा। क्षेत्र के लोगों के मुताबिक इस बार बाहर से गंगा स्नान करने के लिए घाट पर आने वालों की संख्या काफी कम रही। स्नान करने वालों में अधिकांश लोग स्थानीय ही रहे। इधर, कोरोना संक्रमण को लेकर जारी गाइड लाइन के चलते इस बार प्रशासन देर रात से ही चौकन्ना रहा।
सीओ विशाल यादव ने बताया कि घाट पर व मार्ग पर ऐहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। वाहनों को भी निर्धारित जगह पर पार्क कराया जा रहा है। यहां कोतवाल सुनील सिंह आदि मौजूद रहे। हरपालपुर क्षेत्र के चियासर घाट, गौरी परहन्ना व तेराघाट पर पहुंच कर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। सुरक्षा के दृष्टिगत घाटों पर पुलिस बल तैनात रहा। वहीं, टिलियापुर घटवासा में देव स्थान पर कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले पारंपरिक मेले का आयोजन किया गया। मेले में क्षेत्रीय लोगों ने पहुंच कर दुकानों पर खरीदादारी की। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते इस बार घाटों पर व मेले में अपेक्षा से कम श्रद्धालु पहुंचे।
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गंगा स्नान के दौरान कोई अव्यवस्था न हो और सड़क पर यातायात व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे। इसके लिए राजघाट जाने वाले एंट्री प्वाइंट, कन्नौज तिराहा, गुलाब बाड़ी चुंगी, म्यौरा मोड़ व छिबरामऊ चौराहा पर बैरियर लगाए गए थे। साथ ही इन स्थानों पर विशेष पुलिस बल तैनात किया गया था।
कार्तिक पूर्णिमा के चलते देर रात से ही श्रद्धालुओं के घाट पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, हालांकि राघौपुर रोड समेत अन्य जगहों पर बैरियर लगाकार पुलिस श्रद्धालुओं को घाट पर जाने से रोकती रही। इसके लिए मुख्य मार्ग पर एक प्लाटून पीएसी समेत हरदोई उन्नाव सीमा, कस्बे के बड़े चौराहे, करवा मोड़, राघौपुर तिराहा व तेजीपुर मोड़ पर पुलिस बल तैनात किया गया।
पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं को मेहंदीघाट के लिए डाइवर्ट करते रहे। पुलिस की सख्ती का आलम यह रहा कि पास के गांव कुतुवापुर, एकघरा, सिरसैया, मढ़िया, भगतपुरवा, रतेपुरवा व महल्ला आदि गांव के लोग भी स्नान के लिए बेरियाघाट नहीं पहुंच सके। कोतवाल ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि बेरिया घाट पर मेला व स्नान को लेकर पूर्ण प्रतिबंध लगा था। इसके चलते पीएसी व पुलिस बल तैनात किया गया था।
कल्पवास को भी तरसे श्रद्धालु
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा का स्नान सनातन धर्म में खासा महत्व रखता है। कार्तिक पूर्णिमा से लगभग एक माह पूर्व ही संतों व गृहस्थों द्वारा घाटों पर पारंपरिक रूप से राउटी लगाकर कल्पवास की शुरुआत कर दी जाती थी। साथ ही पूर्णिमा पर घाटों पर मेलों का आयोजन किया जाता था। इसमें जनपद समेत आसपास जनपदों के भी हजारों श्रद्धालु शामिल होते थे, लेकिन इस बार कोरोना के कारण सारी परंपराएं टूट गईं।
शासन से गाइड लाइन जारी होते ही मेलों व अन्य आयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिसके चलते लोग कल्पवास नहीं कर सके, घाट सूने पड़े रहे। हर घाट पर कल्पवास कर भक्ति में समय व्यतीत करने वाले संत व गृहस्थ लोग कल्पवास की अनुमति न मिलने पर खासे परेशान रहे।
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बिलग्राम में इस बार घाट पर मेले का आयोजन नहीं किया गया। इससे घाट पर दुकानें नहीं लग सकीं। हालांकि देर रात से लेकर शाम तक घाट पर श्रद्धालुओं के पहुंचने व पूजन एवं आरती के बाद गंगा स्नान करने का सिलसिला जारी रहा। क्षेत्र के लोगों के मुताबिक इस बार बाहर से गंगा स्नान करने के लिए घाट पर आने वालों की संख्या काफी कम रही। स्नान करने वालों में अधिकांश लोग स्थानीय ही रहे। इधर, कोरोना संक्रमण को लेकर जारी गाइड लाइन के चलते इस बार प्रशासन देर रात से ही चौकन्ना रहा।
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सीओ विशाल यादव ने बताया कि घाट पर व मार्ग पर ऐहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। वाहनों को भी निर्धारित जगह पर पार्क कराया जा रहा है। यहां कोतवाल सुनील सिंह आदि मौजूद रहे। हरपालपुर क्षेत्र के चियासर घाट, गौरी परहन्ना व तेराघाट पर पहुंच कर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। सुरक्षा के दृष्टिगत घाटों पर पुलिस बल तैनात रहा। वहीं, टिलियापुर घटवासा में देव स्थान पर कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले पारंपरिक मेले का आयोजन किया गया। मेले में क्षेत्रीय लोगों ने पहुंच कर दुकानों पर खरीदादारी की। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते इस बार घाटों पर व मेले में अपेक्षा से कम श्रद्धालु पहुंचे।
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गंगा स्नान के दौरान कोई अव्यवस्था न हो और सड़क पर यातायात व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहे। इसके लिए राजघाट जाने वाले एंट्री प्वाइंट, कन्नौज तिराहा, गुलाब बाड़ी चुंगी, म्यौरा मोड़ व छिबरामऊ चौराहा पर बैरियर लगाए गए थे। साथ ही इन स्थानों पर विशेष पुलिस बल तैनात किया गया था।
कार्तिक पूर्णिमा के चलते देर रात से ही श्रद्धालुओं के घाट पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, हालांकि राघौपुर रोड समेत अन्य जगहों पर बैरियर लगाकार पुलिस श्रद्धालुओं को घाट पर जाने से रोकती रही। इसके लिए मुख्य मार्ग पर एक प्लाटून पीएसी समेत हरदोई उन्नाव सीमा, कस्बे के बड़े चौराहे, करवा मोड़, राघौपुर तिराहा व तेजीपुर मोड़ पर पुलिस बल तैनात किया गया।
पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं को मेहंदीघाट के लिए डाइवर्ट करते रहे। पुलिस की सख्ती का आलम यह रहा कि पास के गांव कुतुवापुर, एकघरा, सिरसैया, मढ़िया, भगतपुरवा, रतेपुरवा व महल्ला आदि गांव के लोग भी स्नान के लिए बेरियाघाट नहीं पहुंच सके। कोतवाल ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि बेरिया घाट पर मेला व स्नान को लेकर पूर्ण प्रतिबंध लगा था। इसके चलते पीएसी व पुलिस बल तैनात किया गया था।
कल्पवास को भी तरसे श्रद्धालु
कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा का स्नान सनातन धर्म में खासा महत्व रखता है। कार्तिक पूर्णिमा से लगभग एक माह पूर्व ही संतों व गृहस्थों द्वारा घाटों पर पारंपरिक रूप से राउटी लगाकर कल्पवास की शुरुआत कर दी जाती थी। साथ ही पूर्णिमा पर घाटों पर मेलों का आयोजन किया जाता था। इसमें जनपद समेत आसपास जनपदों के भी हजारों श्रद्धालु शामिल होते थे, लेकिन इस बार कोरोना के कारण सारी परंपराएं टूट गईं।
शासन से गाइड लाइन जारी होते ही मेलों व अन्य आयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिसके चलते लोग कल्पवास नहीं कर सके, घाट सूने पड़े रहे। हर घाट पर कल्पवास कर भक्ति में समय व्यतीत करने वाले संत व गृहस्थ लोग कल्पवास की अनुमति न मिलने पर खासे परेशान रहे।