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कचरे का ढेर, खपाने का ‘फेर’

Tue, 20 Jan 2015 12:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Tue, 20 Jan 2015 12:34 AM IST
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Garbage dump , consuming the ' restore '

स्वच्छ भारत अभियान जिले में धड़ाम हो रहा है। कारण

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साफ है कि सात नगर पालिकाएं और छह नगर पंचायत क्षेत्रों में प्रतिदिन करीब 131 क्विंटल कूड़ा निकल रहा, पर  इस कूड़े के निस्तारण के लिए अब तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए।

आलम यह हैं कि इस कूड़े को कहीं गड्ढों में तो कहीं सड़क किनारे ढेर लगाए जा रहे हैं। तेज हवा के दौरान कूड़ा इन ढेरों से उड़कर सड़क पर पहुंच रहा। कचरा प्रबंधन को लेकर जिले में कोई ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की गई, जिससे हर वर्ष कूड़ा डलवाने को नगर पालिका व नगर पंचायत प्रशासन को जमीन की खोजबीन करनी पड़ती है।

हैरत की बात यह है कि शहरी क्षेत्रों में भी इस ओर गंभीरता से कार्य नहीं किया। जिसका खामियाजा क्षेत्र की जनता को भुगतना पड़ रहा है। कूड़ा प्रबंधन के बाबत पालिका क्षेत्रों के 10-10 व नगर पंचायतों क्षेत्रों से 5-5 लोगोें से जब बात की गई तो कुल 100 लोगों में 40 फीसदी लोगों ने दो टूक कहा कि उनके क्षेत्र में कूड़ा नियमित नहीं उठाया जाता।

10 फीसदी लोग कूड़े को पालीथिन में रखकर स्वयं नाले अथवा कूड़े के कं टेनर में डालते हैं, जबकि 45 फीसदी लोग कूड़ा उठाने की व्यवस्था से संतुष्ट नजर आए, वहीं 5 फीसदी लोगों को इससे मतलब नहीं। बिलग्राम में प्रतिदिन करीब 12 क्विंटल कचरा ट्रैक्टर ट्राली से नगर के बाहर सड़क किनारे डलवाया जाता है, जबकि पिहानी में प्रतिदिन निकलने वाला कूड़ा छिपीटोला, मीर सराय, रामलीला रोड, महमूद बाग स्थित डंपिंग स्थल पर डलवाया जाता है।

वहीं शाहाबाद में गढ़ी स्थित तलैया में कूड़ा डाला जा रहा है और यहां भी निस्तारण के कोई इंतजाम नहीं। मल्लावां, सांडी, संडीला, कछौना, बेनीगंज, माधौगंज, गोपामऊ, कुरसठ, पाली आदि क्षेत्रों का कूड़ा बस्ती के बाहर गड्ढों अथवा सड़क किनारे डलवाया जा रहा है।

उधर, पालिका और नगर पंचायत प्रशासन जिन वाहनों से कूड़ा उठवाकर डंपिग स्थल तक ले जाते हैं। उस दौरान भी कूड़े के ऊपर पालीथिन की व्यवस्था नहीं। ऐसे में कूड़ा उठकर राहगीरों पर गिरता है। इसकी रोकथाम के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए।

इधर, नालों से निकली सिल्ट के निस्तारण की भी कोई व्यवस्था नहीं। सफाई के बाद सिल्ट के नाले के किनारे ढेर लगा दिए जाते हैं। दो दिन बाद इसको उठवाकर कूड़े के ढेर पर डलवा दिया जाता। यदि इस बीच बारिश हुई तो यह सिल्ट भी दोबारा नाले में पहुंच जाती।

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