बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

फसल की बर्बादी से टूट रहा किसान

ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई Updated Tue, 07 Apr 2015 12:39 AM IST
विज्ञापन
Farmers harvest waste is broken

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसल को
विज्ञापन
देखकर किसान परेशान है। आलम यह है कि हाड़तोड़ मेहनत कर तैयार की गई फसल की अब लागत भी निकलती नजर नहीं आ रही। ऐसे में किसान को बैंक/साहूकार का कर्ज चुकाना भी दूभर हो रहा है।

हैरत की बात है कि चुनाव के दौरान गांव में मंडराने वाले नेता भी अब उनका दुख दर्द सुनने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। फसल बीमा का कुछ आसरा था उस पर भी बैंक के अफसरों को रवैय्या देख किसान हताश हो रहा है। सोमवार को क्षेत्र के कुछ किसानों से जब बात की तो उनकी आंखे भर आई।

बोले कर्जा तो दूर अब पेट भरने के लिए भी खाद्यान्न जुटाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में बेटियों की शादी भी उनके लिए एक चुनौती बन गई है। हरपालपपुर ब्लाक के इकनौरा गांव निवासी सोमपाल के पिता के पास करीब 20 बीघा खेती है उसने 50 बीघा खेती बटाई पर लेकर अपनी व उधार लेकर पूंजी लगाई थी उम्मींद थी कि फसल तैयार होने पर ट्रैक्टर के लिया दो लाख का लोन भी चुकता होगा और कर्जा भी उतर जायेगा।

लेकिन बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से करीब 70 फीसदी फसल बर्बाद हो गई। ऐसे में वह कभी खेत को देखता है तो कभी अपनी किस्मत को कोसता है। लमकन गांव निवासी संतोष कुमार के पास दस बीघा खेत है। इस खेत में गेंहू की फसल तैयार थी लेकिन बीते दिनों हुई बारिश से फसल बर्बाद हो गई।

ऐसे में ओलावृष्टि से रही बची फसल भी खराब हो गईऱ्। पूछने पर बताया कि कर्जा लेकर उसने फसल तैयार की थी लेकिन अब उसकी भरपाई भी करना मुश्किल है। बेटी की बारात 16 अप्रैल को आनी है ऐसे में बारातियों को खिलाने के लिए उसे खाद्यान्न की व्यवस्था जुटानी पड़ रही है।

इकनौरा गांव निवासी रामपाल सक्सेना भूमिहीन होने के कारण उसने 10 बीघा खेत आज बंटाई पर लिया था। जिसमें फसल तैयार कर वह परिवार को भरण पोषण किसी तरह कर रहा। लेकिन इस बार फसल खराब होने से उसके माथे पर चिंता की रेखाएं उभर आई।

बोला दो बेटे और तीन बेटियों के साथ परिवार का भरण पोषण करना भी अब दूभर हो रहा। खेत में जो फसल बची थी उसमें दो बीघा गेंहू भीगने से काला पड़ गया। इसको लेकर वह काफी परेशान है। ककरा गांव निवासी दिनेश कुमार के 10 एकड़ खेत में खड़ी 60 फीसदी फसल बर्बाद हो चुकी है।

कुरेदने पर बोला कि प्रति बीघा करीब चार हजार की लागत आई लेकिन अब जो फसल बची है उससे लागत भी निकलती नहीं नजर आ रही। फसल बीमा का आसरा है लेकिन उसके क्लेम में भी काफी अड़चने आ रही है। अब तो सरकार से ही कुछ राहत की उम्मीद है। यदि आर्थिक मद्द मिली तो खेती के लिए कर्जा भी निपटा सकेगा।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us