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कैडर बढ़ाया, ब्राह्मण-ठाकुर को भी लुभाया

Fri, 06 Jan 2017 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई Updated Fri, 06 Jan 2017 11:52 PM IST
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Enhanced cadre, Brahmin-Thakur also appealed
मायावति - फोटो : प्रतीकात्मक

हरदोई। सूबे में भले ही बसपा ने टिकट बंटवारे मेें मुस्लिमों को तवज्जो दिया हो लेकिन हरदोई जिले में कैडर के साथ ब्राह्मण-ठाकुर के सहारे चुनावी नैया पार करने की जुगत में है। अभी तक आरक्षित सीटों पर पासी बिरादरी को तवज्जो देती आ रही पार्टी ने इस बार कुरील बिरादरी के दो प्रत्याशियों के साथ दो ब्राह्मण व दो ठाकुरों को मैदान मेें उतारा है। 

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 जिले में बसपा का खाता पासी बिरादरी के छोटेलाल ने 1993 में खोला था। सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी छोटेलाल ने भाजपा के संदीप वर्मा को 11018 वोटों से मात दी थी। 1996 में कांग्रेस से गठबंधन कर मैदान में उतरी बसपा ने दो मुस्लिम, एक पासी, एक कुरील और कुर्मी बिरादरी से एक प्रत्याशी को टिकट दिया। इसमें अहिरोरी और संडीला सीट पर उसे फतह हासिल हुई।
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2002 के चुनाव में बसपा ने मुस्लिम-पासी गठजोड़ के सहारे चुनावी समर में उतरी। इस चुनाव में तीन मुस्लिम व दो पासी के साथ ब्राह्मण, कुर्मी, धोबी और कुरील बिरादरी को एक-एक टिकट दिया। इससे तीन सीटें बसपा की झोली में जा गिरीं। 2007 के चुनाव में सूबे में सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला अपनाने वाली मायावती ने हरदोई में मुस्लिम और पासी वोटों के समीकरण पर ही निगाहें गड़ाईं।
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इस चुनाव में तीन मुस्लिम के साथ तीन पासी प्रत्याशियों को भी टिकट दिया। इसके अलावा एक ब्राह्मण, एक कुर्मी और अपने कैडर कहे जाने वाले कुरील बिरादरी से एक प्रत्याशी मैदान में उतारा। जातीय समीकरणों की बदौलत हाथी की चाल ने सभी दलों को बेहाल कर आठ सीटें झटक लीं। उपचुनाव मेें सदर सीट पर जीत के साथ पूरे जिले में नीला परचम लहरा गया।

2012 में परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों का भूगोल बदलने से सीटों की संख्या आठ रह गई तो बसपा ने पासियों को तवज्जो देने के लिए कुरील बिरादरी को हासिए पर ला दिया और मुस्लिमों के सीट कोटे में भी कटौती कर दी। पिछले चुनाव में बसपा ने तीन पासी, दो मुस्लिम, एक कुर्मी के साथ एक ब्राह्मण व एक ठाकुर को भी टिकट दिया।

सत्ता विरोधी रुझान में बसपा कुर्मी बाहुल्य बिलग्राम-मल्लावां और ब्राह्मण बाहुल्य सवायजपुर सीट ही जीत पाई। इसके दो साल बाद हुए 2014 के लोकसभा चुनाव में भी उसे करारी मात मिली। दो साल में दो चुनाव में पासियों से धोखा खाई बसपा अपने कैडर की ओर लौटती दिख रही है। विधानसभा चुनाव 2017 में पहली बार कुरील बिरादरी के दो प्रत्याशियों को टिकट दिया है।


इस बार बसपा अपने कैडर वोटों के साथ ब्राह्मण-ठाकुरों के गठजोड़ पर निगाहें लगाए है। शायद इसीलिए दो ब्राह्मण और दो ठाकुरों को भी टिकट दिया है। मुस्लिम और पासी प्रत्याशियों की संख्या घटकर एक-एक रह गई है जबकि पिछड़े वर्ग का पत्ता ही साफ कर दिया है।
 
बसपा की सोशल इंजीनियरिंग
विस क्षेत्र        प्रत्याशी 2012    प्रत्याशी 2017
सवायजपुर        रजनी तिवारी    अनुपम दुबे
शाहाबाद        आसिफ खां        आसिफ खां
हरदोई        राजा बक्स सिंह    ठा. धर्मवीर सिंह
गोपामऊ        अनीता वर्मा    (पासी)    मीना कुमारी (कुरील)
सांडी        वीरेंद्र वर्मा (पासी)    वीरेंद्र वर्मा (पासी)
बिलग्राम-मल्लावां    बृजेश वर्मा (कुर्मी)    अनुराग मिश्रा
बालामऊ        रामपाल वर्मा     (पासी)    नीलू सत्यार्थी (कुरील)
संडीला        अब्दुल मन्नान    ठा. पवन सिंह

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