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Hardoi News: बुनियादी अक़ायद के साथ शरई एहकाम की पाबंदी पर ज़ोर

Sun, 21 Jun 2026 11:13 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 11:13 PM IST
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Emphasis on adherence to Sharia rules along with basic beliefs
पिहानी। मस्जिद सय्यदना फारूक ए आजम में चल रहे 16 दिवसीय शुहदा ए इस्लाम जलसे की चौथी नशिस्त में इस्लाम के बुनियादी अकीदों के साथ शरई एहकाम की पाबंदी पर जोर दिया गया।
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अंजुमन खुद्दाम ए सहाबा की ओर से आयोजित चौथे जलसे में बोलते हुए बहराइच के मौलाना अमीन नूरी ने कहा कि सहाबा ए कराम की जामाअत बड़े-बड़े औलिया ए कराम से भी अफजल है। उनके लिए अल्लाह ने जन्नत की बशारत दे दी। अल्लाह का जिक्र बगैर नबी ए करीम सल्ल. के और नबी ए करीम सल्ल. का जिक्र बगैर असहाब के मुकम्मल नहीं होता। उन्होंने समाज में प्रचलित बुराइयों को मिटाने के लिए शरीयत का तरीका अपनाने पर जोर दिया। इससे पहले मौलाना सबीहुल हसन ने कहा कि जब बस्ती में दीन के नाम पर बिदआत आम थीं।
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हमारे उलेमा ए कराम ने हमें सही गलत का फर्क समझाया। आज कौम में काफी हद तक जो सुधार नजर आता है वो सन 1974 ई. से ‘फिदायाने सहाबा’ के जरिये हुई कोशिशों का नतीजा हैं। इस कड़ी को शुहदा ए इस्लाम जलसों ने आगे बढ़ाया। इससे पहले हाफिज उजैर ने कुरान की तिलावत से आगाज किया। अनवर लोहानी ने नात पढ़ी। अध्यक्षता मौलाना रूहुल्लाह बिहारी ने की। संचालन हाफिज अतीकुर्रहमान ने किया। दुआ पर समापन हुआ। सुरक्षा को लेकर कोतवाल छोटेलाल फोर्स के साथ सक्रिय रहे।
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