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नाले का पानी बेजुबानों पर भारी
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संडीला। फैक्टरियों के प्रदूषित पानी से बेता नाले का पानी भी पूरी तरह से काला और जहरीला हो गया है। कस्बे से होकर यह नाला गोमती नदी में गिरता है।
नाले के जहरीले पानी को पीकर क्षेत्र के मवेशी बीमार ही नहीं हो रहे, बल्कि उनकी जान भी जा रही है। नाले के आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि इसका पानी पीने से कई मवेशियों की मौत हो चुकी है, वहीं अन्य कई मवेशी बीमार भी हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने इसके लिए फैक्टरियों को जिम्मेदार बताते हुए इसकी रोकथाम कराने की मांग की है। संडीला के औद्योगिक क्षेत्र के बीच से बहने वाला बेता नाला उमरताली, महसोना, मलकाना, मोहम्मदपुर समेत कई स्थानों से होकर काकोरी के पास गोमती नदी में मिलता है।
बेता नाला कई किलोमीटर लंबा है। पहले इस नाले में साफ पानी बहता था, जिसका पानी आसपास के गांवों के मवेशी पीते थे। इस नाले में भारी संख्या में मछलियां भी थी।
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जब से औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हुई है, कई ऐसी फैक्टरियां लग गई, जिनका गंदा पानी इसी बेतर नाले में मिलता है। इसके कारण बेता नाले का पानी काला होकर जहरीला हो गया है।
इससे मरताली, महसोना आदि गांवों के कई पशुपालकों के मवेशी इसका पानी पीकर मर चुके हैं। नाले के किनारे बसे बिश्रामगंज, आटा मऊ, मोहम्मदपुर, पहतोइया के ग्रामीणों का कहना है कि इस नाले का पानी पीने से कई मवेशी मर चुके हैं तो आए दिन मवेशी बीमार हो रहे हैं।
पहतोइया गांव के प्रधान राकेश, मोहम्मदपुर के प्रधान सुरेंद्र व आटा मऊ के प्रधान मोहम्मद रईस का कहना है कि संडीला में लगे कारखानों द्वारा गंदा पानी छोड़ने से नाले का पानी प्रदूषित हो गया है।
जो मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। तत्कालीन डीएम जितेंद्र विष्णु व पुलकित खरे ने आसपास के लोगों की शिकायत पर प्रदूषण विभाग को बेता नाले के पानी की जांच कराने के लिए पत्र लिखा था।
इसके अलावा कई फैक्टरी मालिकों को नाले में गंदा पानी न बहाने की हिदायत दी थी। इसके बाद भी कारखाना संचालकों ने इस ओर गौर नहीं किया। मामले में एसडीएम डीपी सिंह का कहना है कि वह बेता नाले की जांच प्रदूषण नियंत्रण विभाग से कराकर आगे की कार्रवाई करेंगे।
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नाले के जहरीले पानी को पीकर क्षेत्र के मवेशी बीमार ही नहीं हो रहे, बल्कि उनकी जान भी जा रही है। नाले के आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि इसका पानी पीने से कई मवेशियों की मौत हो चुकी है, वहीं अन्य कई मवेशी बीमार भी हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने इसके लिए फैक्टरियों को जिम्मेदार बताते हुए इसकी रोकथाम कराने की मांग की है। संडीला के औद्योगिक क्षेत्र के बीच से बहने वाला बेता नाला उमरताली, महसोना, मलकाना, मोहम्मदपुर समेत कई स्थानों से होकर काकोरी के पास गोमती नदी में मिलता है।
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बेता नाला कई किलोमीटर लंबा है। पहले इस नाले में साफ पानी बहता था, जिसका पानी आसपास के गांवों के मवेशी पीते थे। इस नाले में भारी संख्या में मछलियां भी थी।
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जब से औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हुई है, कई ऐसी फैक्टरियां लग गई, जिनका गंदा पानी इसी बेतर नाले में मिलता है। इसके कारण बेता नाले का पानी काला होकर जहरीला हो गया है।
इससे मरताली, महसोना आदि गांवों के कई पशुपालकों के मवेशी इसका पानी पीकर मर चुके हैं। नाले के किनारे बसे बिश्रामगंज, आटा मऊ, मोहम्मदपुर, पहतोइया के ग्रामीणों का कहना है कि इस नाले का पानी पीने से कई मवेशी मर चुके हैं तो आए दिन मवेशी बीमार हो रहे हैं।
पहतोइया गांव के प्रधान राकेश, मोहम्मदपुर के प्रधान सुरेंद्र व आटा मऊ के प्रधान मोहम्मद रईस का कहना है कि संडीला में लगे कारखानों द्वारा गंदा पानी छोड़ने से नाले का पानी प्रदूषित हो गया है।
जो मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। तत्कालीन डीएम जितेंद्र विष्णु व पुलकित खरे ने आसपास के लोगों की शिकायत पर प्रदूषण विभाग को बेता नाले के पानी की जांच कराने के लिए पत्र लिखा था।
इसके अलावा कई फैक्टरी मालिकों को नाले में गंदा पानी न बहाने की हिदायत दी थी। इसके बाद भी कारखाना संचालकों ने इस ओर गौर नहीं किया। मामले में एसडीएम डीपी सिंह का कहना है कि वह बेता नाले की जांच प्रदूषण नियंत्रण विभाग से कराकर आगे की कार्रवाई करेंगे।